CM Rekha Gupta has replaced the photo of Baba Saheb Bhim Rao Ambedkar with that of PM Modi in her office and most Delhi Govt offices.
Why ?
#AmbedkarJayanti
कोई और करे तो ‘हाहाकार’
संघी करे तो ‘जय जयकार’
ABVP के कार्यक्रम में…
ये भगवा वस्त्र धारण किए ��न्या कैसा नृत्य कर रही हैं
कैसी भाव-भंगिमाएँ हैं 🤦🏻♀️
आप भी देखिए !!!
मुख्यमंत्री जी के किसानों को लेकर दिए बयान पर सवाल का जवाब :
अब क्या क्या बोलूं मैं मुख्यमंत्री के बारे में। वो 20 दिन काम कर सकते हैं। खुद किसान बन सकते हैं। किसान तो थे ही ये। किसान ��ी थे ये तो और वो मुख्यमंत्री बने तो अनुभव काम में लें।
अब पता नहीं खुद ही 20 दिन काम करते होंगे। मुझे तो यही लगता है कि ये केवल नाम की किसानी कर रहे होंगे और खुद ही 15–20 दिन मुश्किल से जाते होंगे वही अनुभव इनका काम आ रहा है। । और बोल रहे हैं कि किसान लोग सभी 15–20 दिन ही काम करते हैं।
अरे, किसान खून-पसीना बहाता है, लगातार महीनों तक मेहनत करता है, तब जाकर फसल आती है। फिर ओलावृष्टि हो जाती है, कोई बीमारी ल�� जाती है, फसल खराब हो जाती है। तब उसके दिल में कितनी आग लगती है। इसलिए इस प्रकार की बातें किसान के बारे में नहीं करनी चाहिए।
आदर्श क्रेडिट मामले को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब:
वो बहुत बड़ा घोटाला है। उस पर मैं अलग से विस्तार से बात करूंगा। लेकिन देखिए, हमारे जो सरकारी वकील हैं, वही वकील आदर्श घोटाले के मु��्जिमों के भी बन जाएं क्या आपने कभी ऐसा सुना है? जिनके खिलाफ मामला है, उन्हीं के वकील वही बन जाते हैं। इससे बड़ी मिलीभगत क्या हो सकती है?
मैं समझता हूं कि हिंदुस्तान के जो बड़े दो-चार घोटाले हुए हैं, उनमें आदर्श घोटाला भी एक है। मैंने सुना है कि हमारे सरकारी AAG ही विपक्ष के सह-आरोपियों के वकील बन गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने जो कहा है, उसे मुख्यमंत्री जी को गंभीरता से लेना चाहिए। मुझे लगता है सरकार क��� खुद की मिलीभगत से ,उनकी नॉलेज के अंदर ही हो रहा होगा इसलिए कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। वरना वो इतनी बड़ी घटना थी। जैसे ही नेता प्रतिपक्ष जूली साहब ने कहा और उसी दिन एक्शन होना चाहिए था। कुछ नहीं हो रहा है।
महिला आरक्षण के विषय पर :
वर्किंग कमेटी में प्रस्ताव पास हुए है न वही हम सब की भावना रहेगी।
भाजपा का मुख्यमंत्री बने या जदयू का, चाभी BJP के 2 गुजरातियों के हाथ में ही होगी!
BJP = JDU हो चुका है!
JDU के भूंजा पार्टी गैंग का एजेंडा पूरा हो चुका है!
भूंजा पार्टी गैंग वालों को बीजेपी की तरफ से अब मुंह मांगा इनाम मिलेगा!
अब NDA से किसी के मुख्यमंत्री रहते बिहार का हित कभी गुजरात के हित के समान नहीं माना जाएगा!
BJP का कोई कठपुतली CM रहते बिहार कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा!
@yadavtejashwi
#RJD #LaluYadav #TejashwiYadav
कांस्टेबल निशा अपने ही विभाग की महिला पीआरडी जवान को परेशान कर रही हैं..पीड़िता तंग आकर कप्तान से शिकायत करने पहुंची है..!
क्या लगता है पीड��िता को न्याय मिलेगा ...?
📍हमीरपुर (यूपी)
पीड़िता लक्ष्मी को सुनिए...👇👇
मेरठ के यह व्यापारी सोचते थे बुलडोजर मुसलमानों के लिए हैं। यह सब भाजपा के वोटर हैं। शिक्षा स्वास्थ्य के लिए कभी भी वोट नहीं दिया।
लगाओ नारा: मोदी है तो मुमकिन है।
बाद एक ही बात लगेगी आग तो आयेंगे कई घर जद में……
पहले सबको कहता था, मोदी-योगी को वोट दो. लेकिन अब जब तक जीवित हूं, ये कहूंगा कि BJP को कभी वोट मत दो.
मोदी-योगी के राज में, कटोरा आ गया हाथ में.
- मेरठ के सेंट्रल मार्केट को तोड़ा जा रहा है, इसमें ज्यादातर BJP समर्थकों के मक��न-दुकान हैं.
📍यूपी
बिहार की एनडीए सरकार में अंधकार, अराजकता, नैतिकता और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा पार!
बिहारवासियों को जानकर घोर आश्चर्य होगा कि बिहार के 𝟕𝟔,𝟎𝟎𝟎 से अधिक प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में एक भी संगीत शिक्षक नहीं हैं लेकिन भ्रष्ट जदयू-बीजेपी सरकार ��े संगीत के वाद्य-यंत्रों की खरीद पर ही 𝟏𝟓𝟖.𝟒𝟒 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं।
बताइए इस भ्रष्टाचारी सरकार ने वाद्य-यंत्रों जैसे सितार, सरोद, सारंगी, वाइलिन, बांसुरी, शहनाई, हारमोनियम, शंख, तबला, ढोलक, डमरू, घंटा इत्यादि की खरीद पर 𝟏𝟓𝟖.𝟒𝟒 करोड़ खर्च कर दिए।
हैरानी की बात यह है कि ना ही विद्यालयों के शिक्षकों ने इन उपकरणों की मांग की थी और ना ही उन्हें इसके उपयोग का कोई प्रशिक्षण दिया गया है। स्पष्ट है कि विद्यालयों में म्यूजिक टीचर उपलब्ध न होने के कारण ये वाद्य-यंत्र बजाने के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार रूपी म्यूजियम में सजाने के लिए खरीदे गए हैं।
‘बिना मांगे मोती मिले, मांगे मिले न भीख’ को इतनी सहजता से एनडीए सरकार चरित्रार्थ कर रही है जबकि शिक्षक अभ्यर्थी बेसब्री से वैकेंसी का इंतजा�� कर रहे हैं। हैरानी की बात है कि बिहार के विद्यालयों में म्यूजिक शिक्षक की कितनी रिक्तियां हैं, भाजपा-जदयू की सरकार के पास वर्तमान में कोई आंकड़ा नहीं है। बिना शिक्षक के स्कूलों में वाद्य-यंत्रों का क्या उपयोग है? क्या इन्हें केवल धूल फांकने और खराब होने के लिए खरीदा गया है?
ईमानदारी और सुशासन का चोला पहने मुख्यमंत्री और दो-दो उपमुख्यमंत्री जवाब दें कि बिना शिक्षक बहाली किए, बिना एक भी संगी��� शिक्षक के, ये सैंकड़ों करोड़ के वाद्य-यंत्रों को क्या भ्रष्टाचार का बाजा बजाने के लिए खरीदा गया है?
इनकी खरीद में इतनी हड़बड़ी व अपारदर्शिता से स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं कि क्या एनडीए के मंत्रियों और अधिकारियों ने अपने-अपने हिस्से के कमीशन को सेट करने के लिए इन वाद्य-यंत्रों की खरीदी की है? वैसे भी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी सरकार और विभाग के लिए ये कोई बड़ी बात नहीं है! बिहारवासियों के साथ विश्वासघात कर तंत्र और यंत्र से बनी सरकार का तंत्र अब ऐसे यंत्र से ही अपना मेहनतनामा वसूलेगा।
#Bihar #MusicTeacherVacancy #RJD #TeacherRecruitment #TejashwiYadav
सवाल सुनने की क्षमत�� नेताओं और अधिकारियों को दोनों में भयंकर कम हो गई।
मथुरा में 11 लोगों की जान चली गई,हमारे साथी @Saurabh_Pinch ने सवाल पूछा तो DM साहब तमतमा गए
मुख्यमंत्री @NitishKumar जी- आपने पटना की बड़ी कुर्सी छोड़ने से पहले, दिल्ली की कुर्सी हासिल कर ली है, आपको बहुत बधाई!!
लेकिन बिहार के ये नौजवान अभी भी धूप में बैठे हैं, बस ए�� सवाल के जवाब के लिए... सरकार, अपने वादे कब पूरे करेगी? बहाली कब निकालेगी?
नीतीश जी, आपने तो खुद पिछले साल वादा किया था, कहा था- टीचर बहाली के लिए BPSC TRE 4.0 का आयोजन जल्द किया जाएगा
BPSC कैलेंडर में अगर ये एग्जाम 2024 में हो जाना था, तो कम से कम अप्रैल 2026 में तो डेट फाइनल करा दीजिए... और लाखों लोगों की दुआ के साथ दिल्ली जाइए....
असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास 👇
• तीन देशों के पासपोर्ट हैं
• दुबई में 2 प्रॉपर्टी हैं
• 52,000 करोड़ रुपए की कंपनी है
असम को लूटने में BJP ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।
असम की क्रांतिकारी धरती ने कभी झुकना नहीं सीखा है।
प्रधानमंत्री जी का कार्यक्रम बताकर आज मुझे प्रचार के लिए जाने नहीं दिया गया। क्या लोकतंत्र अब कार्यक्रमों की आड़ में बंद किया जाएगा?
और यह सब ���ैसे हो रहा है? संवैधानिक संस्थाओं का खुलेआम दुरुपयोग कर, एजेंसियों को हथियार बनाकर।
हमारे पुरखों ने हमें झुकना नहीं, संघर्ष करना सिखाया है। हम लड़ते आए हैं, और हर लड़ाई जीतकर ही आगे बढ़े हैं।
असम का शोषित, वंचित, आदिवासी, दलित और पिछड़ा समाज अब जाग चुका है। चाय बागान में रहने वाले लोग भी अब आगे बढ़कर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। अब यह समाज चुप नहीं रहेगा, अपने अधिकार लेकर ही रहेगा।
इसलिए साथ��यों, हमें एकजुट ह��ना है। हमारी एकजुटता ही विरोधियों के लिए सबसे बड़ा जवाब है, और यही एकजुटता पहले ही इनके डर का कारण बन चुकी है।
याद रखिए, जितना हमें रोकोगे, हम उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेंगे क्योंकि हमारे तीर-धनुष की ताकत सिर्फ प्रतीक नहीं, यह हमारे आत्मसम्मान और संघर्ष की पहचान है।
आगामी 9 अप्रैल को हमारा यह संघर्षी समाज अपने ऊपर वर्षों से हुए शोषण और अत्याचार का बदला वोट की ताकत के साथ लेकर रहेगा।
जय असम!
जय जोहार!
চিহ্ন আমাৰ
ধনু-কাঁড়
असम विधानसभा चुनाव