आरक्षण के मुद्दे पर रविवार को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन, लखनऊ और दिल्ली में उमड़ी भीड़
आरक्षण के मुद्दे को लेकर दिल्ली, लखनऊ समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए।
वहीं, महाराष्ट्र के मालेगांव में एससी समुदाय से जुड़े लोगों ने SC आरक्षण में उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया।
आज अजीत भारती तो कल कोई भी हो सकता है। आपका या आपकी बहन या बेटी या बेटा किसी का भी नंबर आ सकता है। आवाज उठानी है इस निरंकुश एक्ट के खिलाफ 😡 😡
#StopMisuseOfSCSTAct
चंद्रशेखर दलित समाज नहीं है। दूसरे की बहन पर गलत टिप्पणी की है, तो सहने की क्षमता रखो। इसमें जातिवाद नहीं है। 🤣😂
ठंड रख इलाज होगा सबका होगा कायदे से होगा 😁
राहुल गांधी के सामने हिंदू लड़कियों को स्वच्छंद आअवारा और जंतर मंतर टाइप वाली बनाने के लिए एक लड़की को स्क्रिप्ट देकर भेजा गया
और वह लड़की बोल रही है कि उसे बाहर जाने के लिए कहा जाता है कि स्कार्प दुपट्टा पहन कर जाओ घर पर बताकर जाओ
और जब यह लड़की राहुल गांधी से बोल रही थी उसी वक्त राहुल गांधी के मंच पर हिजाब बुर्का और सर से पैरों तक तंबू कनात ड्रम बनी एक मुस्लिम लड़की मौजूद थी
अगर राहुल गांधी स्कॉर्प दुपट्टा को गलत मानते हैं तो राहुल गांधी को उस मुस्लिम लड़की से कहना चाहिए था कि तुम यह सब बंधन क्यों पहनी हो उतार दो
लेकिन राहुल गांधी को सिर्फ हिंदुओं को हिंदू धर्म को बदनाम करना है और हिंदू लड़कियों को एक स्वच्छंद जंतर मंतर टाइप की बनाना है
टैक्स देने वाला वर्ग देशद्रोही और उसी टैक्स से मिलने वाली खैरात पर पलने वाला वर्ग देशभक्त, यही इस भीड़तंत्र की विडंबना है, जिसे संविधान का मुखौटा पहना दिया गया है।
हमारी आज़ादी समझौतों की उपज है, हमारा संविधान एक ऐसा बहुविधान है जिसका बड़ा हिस्सा औपनिवेशिक भारत शासन अधिनियम से लिया गया है। लेकिन समस्या केवल व्यवस्था में नहीं है, उससे बड़ी समस्या हमारी मानसिकता में है। झूठ सुनते-सुनते हमें उसकी आदत हो गई है और कड़वे सत्य को स्वीकार करने का साहस खोते जा रहे हैं।
सच यह है कि एक समाज और एक राष्ट्र के रूप में हमारा नैतिक पतन हुआ है। हमारा स्वाभिमान, हमारी देशभक्ति और हमारी सामूहिक चेतना, सब पर सुविधा, स्वार्थ और राजनीतिक छल की परतें चढ़ चुकी हैं।
जिस दिन हम आईना देखने का साहस जुटा लेंगे, उसी दिन वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत होगी। फिलहाल हम एक भीड़तंत्र हैं और कीड़े मकोड़े की तरह रेंग रहे हैं।
एक अभिषेक ठाकुर की बजह से 57 देशों के बुल्लाओं मे डर का माहौल है सोचो 10 अभिषेक सड़क पर आ गए तो ये बुल्ले बुल्ली भागते नज़र आयेंगे 🤣😂
जाहिल अनपढ़ कौम 😂🤣
जल्द हमारे आंदोलन में ,वाल्मीकि , मातंग, भील, भिलाला, सहरिया, मुसहर, भुइयाँ, डोम, मेहतर भंगी, कोरी, बांसफोर, खरवार, गोंड, बैगा, कोरकू, कोल जैसे SC/ST समाज के लोग भी सम्मिलित होंगे ।
अब ये आंदोलन 95% बनाम अंबेडकर के 5% होने जा रहा है असली आरक्षण के हक़दारों को आरक्षण तभी मिलेगा जब ये आर्थिक आधार पर होगा ।
कल RSU (रिजर्वेशन , एससीएसटी, यूजीसी ) हटाओ अभियान की कोर कमेटी बैठेगी जिसमें अगले आंदोलन की तिथि घोषित होगी ।
15 वर्षीय मुस्लिम बच्ची के साथ 'अब्बू के अब्बा' ने किया दुष्कर्म
पेट में हुआ दर्द तो पता चला ढाई महीने की प्रेग्नेंट है नाबालिग... 6 साल पहले अम्मी का हुआ था इंतक़ाल
67 वर्षीय आरोपी दादा को पुलिस ने कर लिया गिरफ्तार
@Keshavmalan93
महिलाओं के प्रति @BhimArmyChief और @AzadSamajParty के प्रमुख की क्या सोच है वो इनके पुराने ट्वीट से स्पष्ट हो जाता है,
क्युकी में ब्राह्मण समाज की बेटी हूँ और क्षत्रिय समाज की बहू हूँ इसलिए चंद्रशेखर रावण जैसे नेताओ को GC की बहन बेटियों को अपमानित करने का लाइसेंस मिल जाता है।
CC @narendramodi@AmitShah@myogiadityanath
ये नरेंद्र मोदी और अमित शाह के तथाकथित ‘मास्टरस्ट्रोक’ का ही परिणाम है कि आज देश के राजनीतिक विमर्श से हिंदुत्व लगभग गायब हो चुका है। पूरा विमर्श विपक्ष की तय की हुई पिच पर आकर ठहर गया है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि अब इनके विनाश की आहट सुनाई देने लगी है। विकृत विचारों से लेकर विपरीत मानसिकता के व्यक्तियों तक को लगातार आयात करते-करते इन्होंने अपने ही वैचारिक घर को इतना दूषित कर दिया है कि उसकी मूल पहचान ही पूरी तरह से धुंधली पड़ गई है।
जिस हिंदुत्व के नाम पर सत्ता मिली, उसी को हाशिये पर पहुँचा देने से बड़ा राजनीतिक आत्मघात कुछ हो नहीं सकता। मुझे नहीं लगता इन्हें अब किसी तरह की गांधीगिरी, आंबेडकरवाद की अति वंदना, और भाषणों तक सीमित तथाकथित आदर्शवाद की तुकबंदी इनको बचा पाएगी। मूल में लौटने के सिवा कोई विकल्प बचा नहीं है लेकिन आगे बहुत बढ़ चुके हैं और समय भी इनके अनुकूल नहीं है।
किसी ने कल्पना भी नहीं किया होगा कि सामान्य वर्ग इनसे घृणा करना शुरू कर देगा लेकिन इन्होंने अपने सबसे संकल्पित वैचारिक समर्थक वर्ग को विवश कर दिया। जो आग इन्होंने लगाया है वह अब भयावह रूप में धधक रही है। पता नहीं क्या क्या जलेगा और क्या क्या बचेगा।
धन्यवाद!