Periyar Army Chief.
Law And Constitution Struggle.
अम्बेडकर पेरियार मिशन मध्यप्रदेश
Social worker OBC,Tribal & Ambedkaried, Periyar following Struggle in M.P.
कहने को इस देश में लोकतंत्र है क्योंकि यहाँ के लोगों को अपने हक के लिए बोलने ओर शांतिपूर्ण आंदोलन करने का हक भी नहीं है, ये सारी पार्टियां मिलके देश को फिरसे गुलाम बनाने पे तुली है सभी की मिली भगत है।
Reservation
#Ethanol#NEETExamProtest#DemocracyWin#StudentPower
देश भर के छात्रों की सेवा के लिये लगातार मौजूद रहने वाले जुनैद को डिटेन करना और उनको परेशान करना इस सिस्टम का सबसे शर्मनाक चेहरा था, देश भर के लोग अपने अपने स्तर पर बच्चों की सेवा कर रहे थे, जुनैद ने भी इंसानियत के नाते छात्रों की मदद की।
सरकार से अनुरोध है कि ऑंदोलन में लोगों की सेवा करने वाले साथियों को डराना बंद करे।
जुनैद भाई ने बिना किसी स्वार्थ के छात्रों को 34 दिनों तक खाना खिलाया
जुनैद भाई का चहेरा बता रहा CJP की टीम से कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा।
ये सच है अंत में मुसलमान की लड़ाई खुद मुसलमान को ही लड़नी पड़ेगी।
काले धन पर गहराई से जानिए मोहम्मद इरफान का ज्ञान!
2014 में काले धन को बड़ा मुद्दा बनाकर मोदी जी सत्ता के शिखर पर पहुंचे थे, लेकिन हुए क्या?
सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए?
सरकार ने स्विस बैंक के साथ कौनसी डील की है?
पुरानी सी टी-शर्ट पहने, गले में गमछा डाले.. ये कौन था जो इस प्रोटेस्ट में आया और अपनी आत्मा की गहराई से, भावनाओं में बहे बगैर देश के लोकतन्त्र और उसमें हिस्सेदारी का दावा पेश कर गया.
अभिव्यक्ति की आजादी का मौका मिला था इसे जंतर-मंतर पर. कह रहा है दौड़कर आया हूं. नीरज ने जो लिखा, वो जीवन की हकीकत है. उसी हकीकत को करीब से..बेहद करीब से देखा और चला आया. लाखों की भीड़ में जहां Gen-Z को लफंडर लिखा गया, दिखाया गया. वहां यह नौजवान सरकार को आईना दिखा गया. Gen-Z ही था, शायद किसी ने ठीक से इसे देखा नही. मंच पर क्यों नही बोलने दिया इसे, थोड़ा सा भगतसिंह और बाहर आता. इस देश के युवाओं को थोड़ा और जोश भर जाता. बता जाता कि मौका मिले तो खुद को इस दुनियां के सामने उड़ेल कर रख दो. बता दो सरकारों को संवाद के बिना कोई रास्ता नही है. हिंदू-मुस्लिम और जातियों में बंट चुकी सियासत और देश में ऐसे ही युवा इस लोकतंत्र को जिंदा रखे है.
किसी को इसका नाम पता चले तो जरूर बताना. इसका स्वागत करना है, इसे एक फूलों का हार पहनाना है.
@TheLallantop
इस नौजवान की बात केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं की बेचैनी की आवाज़ है।
केवल "ट्रिलियन इकोनॉमी" के नारे लगाने से देश खुशहाल नहीं हो जाता। असली सवाल यह है कि विकास का लाभ किसे मिल रहा है? जब देश की बड़ी हिस्सेदारी की संपत्ति कुछ ही लोगों के हाथों में सिमट जाए और करोड़ों लोग शिक्षा, रोज़गार और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हों, तब चमकते आँकड़ों के पीछे छिपी सच्चाई को भी देखना होगा।
इस आतंकवादी को पकड़ो भाई वर्ना यह तो दंगे करा देगा, इस तरह की नफ़रत का संवैधानिक तरीके से वोट का इस्तेमाल करके अंत करना होगा !
क्या भाजपा के यह नफरती लोग कानून से ऊपर हैं ?
इस पर रासुका लगेगी क्या ?
2/2 अगर मेन स्ट्रीम मीडिया अपना कार्य शुरू से ईमानदारी से करती तो शायद आज लोकतंत्र का 4rth आधार स्तंभ देश के लोगो के दिलों में होता ओर ऐसे हालत न कभी पैदा होते ।।
जय भीम ,जय संविधान, जय भगतसिंह
1/2 सैल्यूट इन ईमानदार पत्रकारों को जिन्होंने देश को बर्बादी की ओर ले जा रही गोदी मीडिया को आईना दिखाते हुए हकीकत दिखाई ओर लोकतांत्रिक देश में निष्पक्ष मीडिया कैसे काम करती हे इसकी मिसाल पेश की।।
2/2 अगर मेन स्ट्रीम मीडिया अपना कार्य शुरू से ईमानदारी से करती तो शायद आज लोकतंत्र का 4rth आधार स्तंभ देश के लोगो के दिलों में होता ओर ऐसे हालत न कभी पैदा होते ।।
जय भीम ,जय संविधान, जय भगतसिंह
1/2 सैल्यूट इन ईमानदार पत्रकारों को जिन्होंने देश को बर्बादी की ओर ले जा रही गोदी मीडिया को आईना दिखाते हुए हकीकत दिखाई ओर लोकतांत्रिक देश में निष्पक्ष मीडिया कैसे काम करती हे इसकी मिसाल पेश की।।
कहा जाता था कि यह UPA नहीं, NDA सरकार है - यहाँ त्यागपत्र नहीं होते।
लेकिन आज देश के युवाओं ने लोकतांत्रिक संघर्ष का एक महत्वपूर्ण अध्याय लिख दिया। लाखों छात्र-छात्राओं ने अपने भविष्य, शिक्षा और जवाबदेही के सवाल पर जिस तरह एकजुट होकर आवाज़ उठाई, उसने साबित कर दिया कि लोकतंत्र में संगठित जनआवाज़ को हमेशा दबाया नहीं जा सकता।
यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति या एक पद का नहीं, बल्कि युवाओं के आत्मसम्मान, अधिकार और भविष्य का है। अब लड़ाई ऐसी शिक्षा व्यवस्था की है, जहाँ मेहनत का सम्मान हो, परीक्षाओं पर भरोसा हो और हर युवा का भविष्य सुरक्षित हो।
संघर्षरत हर युवा को सलाम।
युवाओं को सलाम।
और मोदी सरकार तैयार रहे, क्योंकि देश का युवा अब जाग चुका है। यह पीढ़ी सवाल भी पूछेगी, जवाब भी माँगेगी और लोकतांत्रिक तरीके से हर जवाबदेही तय करके रहेगी।
69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति और न्याय की मांग लेकर पहुँचे थे। उनके हाथों में हथियार नहीं, अपने अधिकारों की उम्मीद थी। लेकिन जवाब संवाद से नहीं, पुलिस की कार्रवाई से मिला।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब उत्तर प्रदेश में पिछड़े, दलित और वंचित युवाओं के लिए न्याय माँगना भी अपराध माना जाएगा? लोकतंत्र में अपनी बात कहना अगर हिरासत का कारण बन जाए, तो यह केवल अभ्यर्थियों का नहीं, संवैधानिक मूल्यों का भी प्रश्न है।
आज इन युवाओं की पीड़ा एक पंक्ति में सिमट गई है -
"सुनो, सुनो... उत्तर प्रदेश में कैसा रामराज आया है, जहाँ पिछड़ों और वंचितों के लिए न्याय माँगना भी अपराध बना दिया गया है।"