In the heat of summer, sweet jackfruit emits a powerful tropical aroma, featuring soft and chewy golden flesh. Its intense, thick sweetness embodies the bold, passionate essence of midsummer and its vibrant seasonal energy. 724718 Picking Forest Berries: there are plenty of berr
Store fruits Store, closed879306 I see a group of children building a sandcastle, their laughter filling the beach. A dog dashes past, chasing seagulls, and I smile at the surrounding joy. As the sun begins to set, it colors the sky with shades of orange and purple.
A large blanket on the sofa. Enjoy the slow-paced happiness of drinking milk tea. Leave the rush behind, savor the delicate sweetness, and feel the small, beautiful warmth in everyday life.
No rain, no flowers. That night, Elara sat at her desk, going through the photos she had captured during the day. She smiled while looking at them—the deer, the oak tree, the snowflakes, and Lila laughing in a photo. Each image served as a reminder of why she loved it.
🤎Kittens naively chase light and shadows, finding joy in life's smallest things. Their simple happiness teaches us that joy is found in ordinary moments. Peace comes from being your true self.
“Of course not,” Clara said with a smile. “It’s a lovely place with enough space for everyone. We would be happy to have you close by.” Vase with autumn leaves Lunch cookbook
Spring walks in the park and blooming flowers; team basketball teaches us that personal excellence alone is insufficient, as only through unity and cooperation can we achieve greater brilliance.
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का “दुरुपयोग” हो रहा है, यह बात आए दिन कोई न कोई कहता दिखाई देता है। अभी @richaanirudh जी भी यही कह रही हैं।
दरअसल, यह शोषित-वंचित समाज को मिले कानूनी सुरक्षा कवच को बदनाम कर उसे कमजोर करने की साजिश है।
हमारा सवाल है रिचा अनिरुद्ध जी से कि ऐसा कौन सा कानून है, जिसके दुरुपयोग की शिकायतें नहीं हुई हैं?
सबसे बड़ा दुरुपयोग तो जाति, ऊँच-नीच और सामाजिक वर्चस्व का हुआ है, जिसने करोड़ों शोषित-वंचितों को हजारों साल अपमान, हिंसा और भेदभाव में जीने पर मजबूर किया। उस “दुरुपयोग” पर इतनी बेचैनी क्यों नहीं दिखाई देती?
दुरुपयोग तो राज्य की शक्ति का भी होता है, झूठे मुकदमे भी लगते हैं, निर्दोष लोग भी फँसते हैं। फिर क्या सारे कानून खत्म कर दिए जाएँ? क्या राज्य की व्यवस्था खत्म कर अराजकता को स्वीकार कर लिया जाए?
और वैसे भी, अगर किसी कानून का दुरुपयोग होता है, तो उसके खिलाफ मुकदमा करने और न्याय पाने का अधिकार हर व्यक्ति को है।
सच यह है कि समस्या कानून नहीं, बल्कि वह मानसिकता है, जिसने दलितों, आदिवासियों और वंचितों का बराबरी से जीना आज भी स्वीकार नहीं किया। इसलिए बार-बार SC/ST Act को निशाना बनाया जाता है, ताकि समाज में नफरत और भ्रम फैलाकर इसे कमजोर किया जा सके।
जय भीम! SC/ST Act जिंदाबाद!
विमानन क्षेत्र में क्रू सदस्यों हेतु 48 घंटे विश्राम नियम के समान अनुपालन तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में निष्पक्ष अवसर सुनिश्चित किए जाने के संबंध में माननीय केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री @RamMNK जी को पत्र लिखा।
@mygovindia@MoCA_GoI
संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास महाराज जी की विचारधारा के प्रति अपना पुरा जीवन समर्पित करने वाले एवं मान्यवर साहेब कांशीराम जी के सहयोगी रहे, कौम के शहीद संत रामानंद महाराज जी के शहीदी दिवस पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि!
व आगे की रणनीति को लेकर मजबूती से काम करने हेतु विचार विमर्श किया जिला अध्यक्ष Nandlal Das (ASP) के नेतृत्व मे जिसमे की बुद्धिजीवी Ujjwal Kumar, जिला उपाध्यक्ष Pintu Jatav MD Amin Akela, Karan Kumar व कई साथी मौजूद रहे!
#ChandrashekharAzad#KashifRaza
आज झारखण्ड प्रदेश सचिव सह जिला प्रभारी (आज़ाद समाज पार्टी भीम आर्मी )गौरव कुमार के निर्देशानुसार आज़ाद समाज पार्टी भीम आर्मी की जिला कमिटी गिरिडीह, झारखण्ड की टीम ने हर वार्ड व प्रबुद्ध साथियो से मिलकर पार्टी संगठनों के विस्तार व जनमुद्दों को लेकर सभी से मिलकर वार्ता किया
क्या लक्ष्मण यादव ने दलितों को धोखा दिया है?
लक्ष्मण यादव कह रहे हैं कि संविधान बचाने की लड़ाई अकेले सपा लड़ रही है। बसपा और चंद्रशेखर कहीं नहीं हैं।
आप वही महाशय हैं ना जो आजमगढ़ में यादव लड़की से प्रेम करने पर दलित युवक दुर्गेश की हत्या को आत्महत्या एवं संदिग्ध मौत बताते हुए लंबा-चौड़ा वीडियो बनाए थे? जबकि यादवों द्वारा दलित युवक को दी जाने वाली धमकियों एवं वीभत्स हमले के कई वीडियो भी वायरल थे। बेटे की हत्या के चलते कुछ दिन बाद दुर्गेश के पिता की भी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। जाति का मामला आते ही आपका सारा सामाजिक न्याय कोमा में क्यों चला जाता है?
ऐसे ही, जब SC-ST उप-वर्गीकरण का मामला आया, तो आप और आपके आका लच्छेदार बातों का जलेबी बनाते हुए भाजपा के साथ खड़े रहे। मथुरा में जब आपके सजातीय यादवों ने दलित समुदाय की दो सगी बहनों की शादी में निर्मम हमला किया था, तो आपकी चालाकी पूरे समाज ने देखी थी। यहां तक कि बेटियों के पिता ने पगड़ी तक रख दी थी, लेकिन हमलावरों ने उनकी शादी तुड़वाकर ही दम लिया। उसके बाद हमने उसे राष्ट्रीय मामला बनाया और बेटियों को न्याय दिलाया। तब कहां चली गई थी आपकी संविधान बचाने वाली लड़ाई?
ये महाशय यह नहीं बताएंगे कि दलितों पर सिर्फ भाजपा के लोग ही नहीं, बल्कि स्वयं इनके सजातीय लोग भी दमन करते हैं। मुलायम सिंह यादव ने तो बाकायदा 2012 विधानसभा चुनाव के अपने घोषणा पत्र में लिखा था कि सपा की सरकार बनने पर SC-ST Act के तहत दर्ज हुए सभी मामलों को रिव्यू कराया जाएगा। सपा की सरकार बनने पर अखिलेश यादव सरकार ने अपनी जातीय कुंठा के चलते रिव्यू के नाम पर दलितों पर उल्टा कार्रवाई की। जांच अधिकारियों पर दबाव डालकर मामलों को प्रभावित किया एवं दलितों पर होने वाले अत्याचार को नजरअंदाज किया। लक्ष्मण यादव जी, अगर आपने मैनिफेस्टो न पढ़ा हो, तो कहिए हम आपको भेज दें। हमारे पास हार्ड कॉपी पड़ी हुई है। अपने आकाओं के पाप का कारनामा पढ़ लीजिएगा।
यह बसपा के संघर्षों का परिणाम है कि यूपी सहित समस्त देश में दलित हर रोज समता, स्वाभिमान एवं संविधान के मूल्यों के लिए लड़ रहा है। आप संविधान और भाजपा का नाम लेकर दलितों को डराना क्यों चाहते हैं? क्या दलितों ने सपा के जातिवादी आतंक का राज नहीं झेला है? मत भूलिए कि सपा के राज में दलितों का सांस लेना भी दुभर था। हमें डराइए मत। और हां, यूपी में सपा की सरकार बनने का मतलब है दलितों पर बेतहाशा दमन एवं शासन-प्रशासन का खुला पक्षपात।
खैर, मुझे लक्ष्मण से कोई शिकायत नहीं है। वह अपनी जाति के प्रति वफादार हैं। मुझे तो दलितों की समझ पर तरस आता है कि वे आज भी हीन भावना (inferiority complex) के शिकार हैं। कोई दलित उनके लिए अपना पूरा जीवन भी त्याग दे, तो उन्हें फर्क नहीं पड़ता। लेकिन कोई उनसे ऊंची जाति का व्यक्ति अपना नाखून भी काट दे, तो वे उसकी महिमा गाने लगते हैं और उनके मुंह से "जय भीम" का नारा सुनते ही कपड़ा उतारकर नाचने लगते हैं। दलितों ने लक्ष्मण यादव जैसे जातिवादी इंसान को मंच, माइक, अवसर एवं शोहरत दी है। उन्हें उसकी सजा तो मिलनी ही चाहिए।
प्रदेश सचिव झारखंड सह जिला प्रभारी गौरव कुमार जी एवं प्रदेश अध्यक्ष झारखंड आज़ाद समाज पार्टी कासिफ रज़ा जी के नेतृत्व में एक मजबूत जिला कमिटी का नवीकरण किया गया।
मुझे पिंटू कुमार दास, जिला उपाध्यक्ष गिरिडीह (आज़ाद समाज पार्टी)
के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपकर सम्मानित किया गया है।
यह मेरे लिए सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि संगठन और समाज के प्रति अपने समर्पण को और मजबूत करने का अवसर है।
मैं पूरी निष्ठा, ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ संगठन को जिले में और सशक्त बनाने का कार्य करूंगा।
बिहार के जिला गया मे भीम आर्मी के गया जिलाध्यक्ष सौरव राज सहित उनकी टीम पर नैली-दुभल रोड पर कल रात सुनियोजित तरीके से जानलेवा हमला किया गया।
लगभग 15 से 20 की संख्या में स्कॉर्पियो और मोटरसाइकिल से आए अपराधियों ने गाड़ी को क्षतिग्रस्त किया और साथियों के साथ मारपीट व अभद्र व्यवहार किया।
यह घटना दर्शाती है कि अपराधियों के मन में कानून का कोई भय नहीं रह गया है और बहुजन समाज के कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
गया जिला प्रशासन इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी सुनिश्चित करें और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
साथ ही, बहुजन समाज के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
हम इस तरह की कायराना घटनाओं से डरने वाले नहीं है।
@GAYAPOLICEBIHAR@bihar_police