पंजाब में चल रहे छात्र प्रदर्शन में पंजाब पुलिस ने दही भल्ले बांटकर सभी का स्वागत किया।
आगे का स्वागत केजरीवाल जी के ऑफिस में तय हुआ है।
थैंक यू पंजाब पुलिस।
कुछ महीनों पहले मुझे बुखार आया तो मैं डॉक्टर के पास गया। डॉक्टर ने कुछ चेकअप लिखे और बताया कि
फलानी जगह जाकर ये सारे चेकअप करवा लेना, मगर
मैंने वो चेकअप डॉक्टर की बताई जगह से न करवाकर अपने परिचित की लैब से करवा लिए,
जब मैंने वो चेकअप डॉक्टर को दिखाए तो डॉक्टर साहब भड़क गए, और कहने लगे कि आपने ये चेकअप बाहर से क्यों करवाए?
डॉक्टर्स का यही सब खेल चलता है, लोग कहाँ तक बचे, @raghav_chadha जी ने शानदार मुद्दा उठाया है, इस चीज़ को सुना जाना चाहिए और अमल में लाना चाहिए।
💟 BPSC TRE 4💟
TRE 4 का Exam , पूर्व शिक्षा मंत्री सुनील कुमार 16.12.2025 से 19.12.2025 तक आयोजित करने का दावा किये थे लेकिन हुआ क्या सिर्फ नौटंकी।
✅ बिहार के युवा को फिर से ठगने की कोशिश नही करें अभी के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी जी।
✅ बाँकीपुर तो झांकी है, पुरा बिहार अभी बांकी है।
#TRE4
विदेश से आते बेटे का वीडियो डाल रहे एमपी के मंत्री है ये वही है जो बोलते है मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में होनी चाहिए , पढ़ाई के लिए बाहर क्यों जाना 😂😂
बंकियों तुम सब लड़ मरो,,, और फैलाओ धार्मिक उन्माद,,,समाप्त कर दो 1 दूसरे को।
- इन्हें घंटा फर्क़ नही पड़ता 😂😂😂
>ब्रो पूरी तैयारी के साथ आए थे
>ब्रो ने पैसा भी खर्च कर दिया था
>ब्रो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की
>लेकिन मीडिया वालों ने रांची झारखंड छात्र के बारे में पूछ लिया
>ब्रो का पैसा वेस्ट हो गया
>अब ब्रो फिर से कोई नया कैंडिडेट ढूंढेगा
हर आंदोलन अपनी माँगों से नहीं, बल्कि अपने आचरण से भी पहचाना जाता है। इतिहास गवाह है कि जिन आंदोलनों ने संयम, अनुशासन और तर्क का साथ नहीं छोड़ा, उनकी बात समाज ने अधिक गंभीरता से सुनी।
CJP प्रदर्शन में हमने देखा ही कि मूल मुद्दा पीछे छूट गया और राजनीतिक नारेबाज़ी, व्यक्तिगत टिप्पणियाँ तथा अपमानजनक भाषा चर्चा का केंद्र बन गई। ऐसे माहौल में आंदोलन की वास्तविक माँगें अक्सर शोर-शराबे में दब जाती हैं और जनसमर्थन, पुलिस प्रसाशन भी प्रभावित होता है।
इसके बिल्कुल विपरीत, झारखंड में परीक्षा संबंधी कथित धांधली के विरुद्ध आंदोलन कर रहे छात्रों की एक अलग तस्वीर सामने आती है। कई दिनों से सड़क पर होने के बावजूद वे बार-बार इस बात पर ज़ोर देते हैं कि उनका आंदोलन छात्रों का है, इसे धार्मिक या राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। वे अपनी लड़ाई को मुद्दों तक सीमित रखने, लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने और किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग न करने की बात करते हैं।
यही अंतर किसी भी छात्र आंदोलन की परिपक्वता को दर्शाता है। जब आंदोलन का केंद्र व्यक्तिगत कटुता नहीं, बल्कि अपने अधिकार, न्याय और पारदर्शिता की माँग हो, तब उसकी नैतिक शक्ति भी कहीं अधिक मज़बूत दिखाई देती है।
मैं इन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हूँ।
छात्रों की पीड़ा और उनकी बेबस आवाज़ सुनकर देश के किसी भी कोने में बैठा संवेदनशील नागरिक अपनी आँखें नम होने से नहीं रोक पा रहा। सवाल यही है, जब पूरा देश इन बच्चों का दर्द महसूस कर रहा है, तो सरकारों का कलेजा क्यों नहीं पसीज रहा?
आखिर ये किस मिट्टी के बने हैं, जिन्हें विद्यार्थियों के आँसू, उनका संघर्ष और उनके टूटते सपने भी दिखाई नहीं दे रहे? सत्ता में बैठे लोगों को याद रखना चाहिए कि ये केवल छात्र नहीं, देश का भविष्य हैं; और जब भविष्य सड़कों पर न्याय की गुहार लगाए, तो सत्ता की चुप्पी सबसे बड़ा अन्याय बन जाती है।
Jharkhand's Viral Boy Dhoom, 'Krrish Ka Gaana Sunega' came in support of Jharkhand students 🔥
He came on stage, after singing 'Le Beta Dil Na Diya', he distributed food, explained the importance of study.
No one will share this because he is not Junaid, he is a poor footpath boy 💔
>सर का नाम -राहुल गांधी है
>सर आजकल तथाकथित छात्रों के साथ सम्मेलन में व्यस्त है
>सर 2-4 इनफ्लूसर प्रोटेस्टर के कंधे में बंदूक रखकर चला रहा है
>सर प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं
>सर देहरादून जा रहे हैं
>सर प्रयागराज जा रहे हैं
>सर मुंबई जा रहे हैं
>लेकिन सर झारखंड के बच्चों के नाम पर बीमार हो जा रहे हैं
>सर इसी को दोगलापन कहते है
आपने कभी देखा है कि विधानसभा की छत या प्लास्टर गिर गया हो और किसी नेता या विधायक को चोट लगी हो? छत हमेशा सरकारी स्कूल, अस्पताल और कॉलेज की ही गिरती है। घटना राजस्थान के चुरू जिले की है जहां एक सरकारी अस्पताल में छत से प्लास्टर सीधे महिला के सिर पर गिरा।