जब Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) CGL में 206 अभ्यर्थियों का अतिरिक्त DV पहले ही हो चुका है, तो 32 नई DV सूची क्यों? एक वर्ष से प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के साथ यह अनिश्चितता क्यों? आयोग को स्पष्ट और पारदर्शी स्पष्टीकरण देना चाहिए। @JharkhandCMO@HemantSorenJMM
गाड़ी चला रहे व्यक्ति रांची उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज टंडन हैं। क्या यह कृत्य क्षमायोग्य है? क्या वह वकालत करने के योग्य है? मैं चाहता हूं कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप करे। @HemantSorenJMM@narendramodi@SupremeCourtGOI#manojtandon#ranchi
गाड़ी चला रहे व्यक्ति रांची उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज टंडन हैं। क्या यह कृत्य क्षमायोग्य है? क्या वह वकालत करने के योग्य है? मैं चाहता हूं कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप करे। @HemantSorenJMM@narendramodi@SupremeCourtGOI#manojtandon#ranchi
JPSC CSE ने अपना नोटिफिकेशन जारी किया है। और सीट मात्र 103 है।
झारखंड में 81 विधानसभा क्षेत्र है और लोकसभा 14 सीट है
झारखंड लोक सेवा आयोग की जैसी स्थिति है अगर मान लीजिए एक एक सीट विधायक और सांसद जी आपस में बांट लिए तो कितना सीट बचेगा ?
#jpsc
झूठ और अफ़वाहों की राजनीति बेनकाब!
JSSC-CGL के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका खारिज—हाईकोर्ट का फैसला बरकरार।
जो भर्ती रोकने निकले थे, वही आज कानून के सामने ध्वस्त हो गए।
याद रखें—आंदोलन अफ़वाह से नहीं, सच और योग्यता से चलता है।
चुनी हुई सरकार के साथ अब माननीय सर्वोच्च न्याय।✊🏼🌿
JSSC-CGL परीक्षा से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उसे सही कहा है. सुप्रीम कोर्ट से अपीलकर्ताओं की याचिका खारिज होना, राज्य सरकार और सफल अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत है.
भाजपा का QR कोड का धंधा सिर्फ मासूम बच्चों से पैसे निकलवा अपने और अपने लोगों की तिजोरी भरनी है।
वैसे
QR कोड गैंग फिर एक नया QR कोड जारी करने की तैयारी में।
सत्यमेव जयते!
JSSC-CGL परीक्षा से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने आज
फैसला सुनाते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उसे उचित परिभाषित किया है।
छात्रहित का फर्जी ढोंग करने वालो और साजिशकर्ताओं को करारा जवाब।
@HemantSorenJMM ज़िंदाबाद। जय झारखंड।