उत्तर प्रदेश के पुलिस स्टेशन में घूसखोरी की कहानी –
प्रयागराज में महिला कांस्टेबल के भाई से 60 लाख रुपए का ऑनलाइन फ्रॉड हुआ। उन्होंने साइबर क्राइम थाने में FIR करा दी।
कंप्लेंट होने के बाद 33 लाख रुपए जो खाते में रह गए थे, वो फ्रीज हो गए। कोर्ट ने ये पैसा रिलीज करने का आदेश कर दिया।
केस के इन्वेटिगेशन ऑफिसर ओमनारायण गौतम और सिपाही अभिषेक कुमार ने यह रकम दिलाने के बदले महिला कांस्टेबल की फैमिली से रिश्वत मांगी। विवेचक को कुल 4.20 लाख रुपए दे दिए गए।
इसके बावजूद सिर्फ 24 लाख रुपए खाते में वापस आए। पीड़ित कांस्टेबल जब दोबारा साइबर थाने में गई तो दूसरे पुलिसकर्मियों ने भी 20% कमिशन मांग लिया।
थक हारकर महिला कांस्टेबल और उसके भाई ने पुलिस कमिश्नर से कंप्लेंट की। अब सब इंस्पेक्टर और कांस्टेबल पर घूसखोरी की FIR दर्ज हो गई है।
'मोदी से देश को छुड़वाओ, तभी कुछ हो पाएगा'
- देश के युवा
आज SSC की जूनियर हिंदी ट्रांसलेटर भर्ती परीक्षा 12 बजे से होनी थी, लेकिन नोएडा के सेंटर पर तकनीकी खराबी होने की वजह से परीक्षा नहीं हो पाई।
मोदी सरकार में कोई ऐसी परीक्षा नहीं होती, जिसमें कुछ गड़बड़ी न हो। नरेंद्र मोदी और उनकी भ्रष्ट सरकार ने युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रखा है।
अब देश के युवा नरेंद्र मोदी से छुटकारा चाहते हैं।
मुंबई में सुपरकार रैली के चलते ट्रैफिक जाम।
एक महिला बेबस होकर कह रही थी:
"प्लीज़ जाने दीजिए… घर में इमरजेंसी है।"
सामने अमृता फडणवीस मुस्कुराती हुई खड़ी हैं।
VIP रैली ज़रूरी थी या उस महिला की इमरजेंसी?
सुल्तानपुर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कुछ वर्चस्वादियों ने जिस तरह जन्माष्टमी के आयोजन में बाधा-अड़चन डालकर पूजा-अर्चना का खंडन किया है वो सिर्फ़ किसी समुदाय की आस्था पर प्रहार ही नहीं पाप भी है और अपराध भी।
इस मामले की उच्च स्तरीय जाँच हो और दोषी प्रभुत्ववादियों को ऐसी सज़ा मिले कि फिर कभी किसी का घमंड सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का दुस्साहस न कर सके।
इन जैसी घटनाओं के पीछे उच्चता की दुर्भावना काम करती हैं और ऐसा करने के पीछे ‘सत्ता सजातीय होने का अहंकार’ मूल कारण होता है।
सब जानते हैं कि धर्म-कर्म में बाधा उत्पन्न करनेवालों को क्या कहते हैं।
घोर निंदनीय!
सर्वेश को कौन नहीं जानता है। फोटो पत्रकारिता के लंबे दौर में सर्वेश ने कितने ही चुनाव कवर किए होंगे। उनका नाम भी SIR से कट गया है। दिल्ली में ही पैदा हुईँ। दिल्ली में पढ़ी हैं। सर्वेश चुप रहने वालीं पत्रकार नहीं हैं लेकिन उनके जीवन में फॉर्म भरने का एक काम चुनाव आयोग की वजह से आया। उनका सही कहना है कि फार्म 6 क्यों भरें जबकि वे इसी दिल्ली की मतदाता रही हैं।
जंतर-मंतर से लौट रहे छात्रों पर हाथ उठाना भारी पड़ा! स्वतंत्र भारद्वाज के बाद अब सत्यम पंडित पर FIR दर्ज। छात्रों को थप्पड़ मारने का आरोप, लेकिन गिरफ्तारी अभी तक नहीं। इंसाफ कब? #JantarMantar#SatyamPandit*
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को अवैध तरीके से ध्वस्त कर दिया गया।
आज इस दमनकारी रवैये के विरोध में पीड़ितों और मस्जिद कमेटी के सदस्यों से मिलने यूपी कांग्रेस अध्यक्ष @kashikirai जी सहारनपुर जा रहे थे।
लेकिन BJP सरकार ने पुलिस भेजकर उन्हें और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया।
अगर BJP सोचती है कि वह ऐसे हथकंडे अपनाकर हमारी आवाज दबा देगी तो यह गलतफहमी हटा ले। हम हर अन्याय के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ेंगे ✊
खसरा नंबर 539 याक़ूब ख़ान वहीद ख़ान के नाम दर्ज है, जिसमें मंदिर, मस्जिद कलेक्ट्रेट सब है।
मस्जिद 1947 के पहले बनी है,वक्फ बोर्ड में दर्ज है।
बिना वक़्फ़ बोर्ड को पार्टी बनाये एक तरफ़ा फैसला देकर मस्जिद गिरा दी गई, देखिए चुनाव के पहले यू पी में नफ़रत फैलाने का कैसा खेल खेला जा रहा?
वैधानिक चेतावनी “भाजपाई दंगाइयों से सावधान”
'आम जनमत पार्टी' नाम की फर्जी पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव में 620 करोड़ रुपए का चंदा मिला.
इस पार्टी ने चुनाव में सिर्फ 1 कैंडिडेट उतारा. पार्टी की अध्यक्ष BJP की नेता थीं. पार्टी का ऑफिस गुजरात में है.
इसी तरह 2024 में 6 फर्जी पार्टियों को कुल 1700 करोड़ का चंदा मिला जो कि 5 राष्ट्रीय पार्टियों को मिले चंदे से ज्यादा है. ये 6 फर्जी पार्टियों भी गुजरात की हैं.
आप कुछ समझ पा रहे हैं?
पूरे देश से जो पैसा लूटा जा रहा है, वो इस तरह गुजरात में ठिकाने लगाया जा रहा है.
पिछले लोकसभा चुनाव से पहले, साल 2023-24 के वित्त वर्ष में कई छोटे दलों को काफ़ी ज़्यादा चंदा प्राप्त हुआ.
बीबीसी की टीम ने लगभग दो महीने इस मामले में पड़ताल की, उन्होंने छह ऐसे दलों के बारे में पता किया, जिन्हें 'रजिस्टर्ड अनरिकग्नाइज़्ड पॉलिटिकल पार्टीज़' यानी RUPPs कहते हैं.
बीबीसी की टीम को पता चला कि इन पार्टियों को सैकड़ों करोड़ का चंदा मिला, जोकि कुछ मामलों में किसी राष्ट्रीय दल से भी ज़्यादा रहा.
लेकिन ये पार्टियां चुनावी राजनीति में अधिकतर गायब ही रहीं.
एक्सपर्ट कहते हैं कि हो सकता है ये पार्टियां असल में स्वतंत्र राजनीतिक संगठन ना हों, इसके बजाय ये पार्टियां टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला लेनदेन और दूसरी वित्तीय अनियमितताओं के लिए एक तरह से मोर्चे के तौर पर काम कर सकती हैं.
देखिए बीबीसी की यह ख़ास पड़ताल.
रिपोर्टः शुभांगी मिश्रा
शूट एडिटः दीपक जसरोटिया
ग्राफ़िक्सः वासिफ़ ख़ान और चेतन सिंह
अतिरिक्त रिपोर्टिंगः तेजस वैद्य
होल्डिंग एडिटरः अभिक देब