बहुत मुमकिन है मुश्किल में किसी दिन टूट जाऊँगी
मगर मिट्टी हूँ औरत की बनूँगी या बनाऊँगी
यह खिड़की और दरवाजें यह छत दीवार और आँगन
इन्ही को जोड़ कर इनसे तुम्हारा घर बसाऊँगी
- Manisha Shukla
#WomenDaySpecial
तुम्हारे प्यार में गुम हूं मगर मेरा पता हूं मैं
जली हूं आग से पर रोशनी वाला दीया हूं मैं
तुम्हें देखा नहीं है आजतक मैंने नज़र भरके
अदब से प्यार करती हूं तभी तो शायरा हूं मैं
_मनीषा शुक्ला