संत रामपाल जी महाराज के अनुसार मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति होती हैं संत रामपाल जी महाराज ने स्पष्ट किया है कि मनुष्य जीवन अत्यंत मूल्यवान है और इसका सही उपयोग केवल परमात्मा की भक्ति में लगाकर ही किया जा सकता है
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#मनुष्य_जीवन_का_उद्देश्य#SantRampalJiMaharaj#aim#moksha#salvation कबीर साहेब ने कहा है, "माया महा���गनी हम जानी, तिरगुन फांस लिए कर डोलै," यानी कि माया ठगने वाली है, जो तिरगुन की फांस में डाल देती है। इस फांस से निकलने के लिए केवल सतगुरु की शरण में जाना ही एकमात्र उपाय है।
संत रामपाल जी महाराज के आध्यात्मिक सत्संग सुनने से मनुष्य को ज्ञात होता है कि उसके जीवन का मूल उद्देश्य क्या है, सत भक्ति की विधि क्या है, किस परमात्मा की भक्ति करने से उसक�� जीवन सफल होगा तथा उसे क्या कर्म करना चाहिए और क्या नहीं।
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गुरु के समान कोई तीर्थ नहीं
श्री नानक देव जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहेब जी के पृष्ठ 437 पर कहा है:-
नानक गुरु समानि तीरथु नहीं कोई साचे गुरु गोपाल।
Sant Rampal Ji Maharaj
धन-धन सतगुरु सत कबीर
रहे नल नील जतन कर हार, तब सतगुरू से करी पुकार । जा सत रेखा लिखी अ���ार, सिन्धु पर शिला तिराने वाले। धन-धन सतगुरु सत कबीर, भक्त की पीर मिटाने वाले।
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