"यह रियलाइज़ेशन होने के बाद मैं काफ़ी रिलैक्स हो गई। एकदम-से जैसे सब समझ में आने लगा। जैसे एक पहेली-सी सुलझ गई। अब सब फ़िट होने लगा था। अब मैं अपने लड़के दोस्तों के साथ भी ज़्यादा कम्फ़र्टेबल थी। अब कोई दिखावा नहीं था।"
@RajkamalBooks@thethinkinbird
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#NewBookAlert
" 'आप भगवान में विश्वास करते हो या नहीं' इस प्रश्न का उत्तर मैं एक शब्द में नहीं दे सकता। अर्थात् वह मैं दे नहीं सकता, ऐसी बात नहीं। लेकिन वह मैं देता नहीं, इसका कारण यह कि पूछे जाने वाले प्रश्न में 'ईश्वर क्या है?' इसकी व्याख्या नहीं की गई है।"
@RajkamalBooks
"क्यूँ भी कहना जुर्म है, कैसे भी कहना जुर्म है
साँस लेने की तो आज़ादी मयस्सर है मगर
ज़िंदा रहने के लिए इंसान को कुछ और भी दरकार है
और इस ‘कुछ और भी’ का तज़्किरा* भी जुर्म है!"
— अहमद नदीम क़ासमी
#AhmadNadeemQasmi
#NewBookAlert#Keertigaan
"न्याय और अन्याय में वर्तनी भर का फ़र्क़ रह गया है। अन्याय आपको एक झटके में ख़त्म कर सकता है और न्याय, क्योंकि वह 'प्रिविलेज्ड' है इसलिए, आपको ज़िबह करता है, धीरे-धीरे मारता है।"
@RajkamalBooks@chandanpandey
"रोज़ेल्वा यक़ीन से कहती है
इकलौती चीज़ जो कभी नहीं बदलती, रेल की पटरी है
रेल बदलती है, पटरी के किनारे जम जाती है खरपतवार
लेकिन पटरी नहीं बदलती।
कहती है, तीन साल से देख रही हूँ मैं एक पटरी को
न वह मुड़ती है, न टूटती है, न बढ़ती है।"
https://t.co/4jbySyGfNQ
@RajkamalBooks@indiark@satysingh@shabd_antim 'समर्पण से'
पोषम पा की इस शृंखला में हम आपके लिए कुछ ऐसे अनोखे समर्पण वाक्य प्रस्तुत करते हैं जो लेखकों ने अपनी किताबों की शुरुआत में अपनी किताब समर्पित करते समय लिखे...
आज प्रस्तुत पंक्तियाँ हैं देवी प्रसाद मिश्र की किताब 'जिधर कुछ नहीं' से।
#SamarpanSe#BookDedication
@RajkamalBooks@indiark@satysingh@shabd_antim 'समर्पण से'
पोषम पा की इस शृंखला में हम आपके लिए कुछ ऐसे अनोखे समर्पण वाक्य प्रस्तुत करते हैं जो लेखकों ने अपनी किताबों की शुरुआत में अपनी किताब समर्पित करते समय लिखे...
आज प्रस्तुत पंक्तियाँ हैं अरुंधति रॉय की किताब 'अपार ख़ुशी का घराना' से।
#SamarpanSe#BookDedication
#सालगिरह | अनामिका
"छूट रही है पकड़ से
अभिव्यक्ति भी धीरे-धीरे!
किसी कालका-मेल-से धड़धड़ाकर
सामने से जाते हैं शब्द निकल!
एक पैर हवा में उठाए
गठरी ताने
बिलकुल अवाक् खड़े रहते हैं
गन्तव्य!"
#NewBookAlert@RajkamalBooks
#NewBookAlert
"लोग दहेज में बीएमडब्ल्यू दे देते हैं, लेकिन बेटी को ड्राइविंग नहीं सिखाते। वह बीएमडब्ल्यू होने पर भी इन्तज़ार करती है कि कब कोई फ़्री हो और उसे बाहर ले जाए।"
@RajkamalBooks@thethinkinbird
"अनायास ही मेरे कांधे पर
जब रखती हो तुम अपना सर
मैं थोड़ा ज़िम्मेदार हो जाता हूँ
खुली सड़क पर
जब तुम थामती हो मेरा हाथ
टूटता है मेरा देहाती परिवेश
मुझे साहस मिलता है
जब तुम झगड़ती हो बच्चों की तरह
मैं भूल जाता हूँ
मेरी उम्र अट्ठाईस हो गई है।"
https://t.co/9dMmIl2H2j