Dear, Salman Khan HYC
ये जो चंदे के पैसे से 5-5 हज़ार पे IT सेल तैयार किए हो ये लोग और तुम जो ��ेरी पुरानी घटना की वीडियो को Share करके जश्न मना रहे हो यहां मुझपे हमला मेरे मुसलमान होने की वजह से मेरे रसूल के उम्माती होने की वजह से हुई थी, जहां मेरी हिंदुत्व गुंडे के ज़रिये मोब्लिंचिंग की कोसिस की गई थी अगर मैं उस दिन मारा जाता तो मुमकिन था मेरी लाश पर QR Code लगा कर तुम चंदा माँग लेते, अगर मैं मारा जाता तो मैं शहीद होता, मैं Allah का शुक्र अदा करता हूं के मुझे सिर्फ़ मुसलमान होने की वजह टारगेट किया गय�� वैसे ही जैसे हज़रत बिलाल को Makkah में मुसलमान होने की वजह से टारगेट किया गया था ( मैं हज़रत बिलाल के पैड़ों का धूल भी नहीं हूं) ये जो तुम्हारे IT सेल के गुंडे कह रहे है This Scene Must be Repeated इनसे और तुमसे कहूँगा मेरी आलोचना करने की कोई सही और मज़बूत आर्गुमेंट लाओ,ये सब करके तुम अपने चंदा के धंधा के बिज़नेस को और ख़तरे में डाल रहे हो बाक़ी ये जो 5 हज़ारी IT सेल के लड़के है InshaAllah हसर के मैदान में ये हिन्दुवा गुंडे के साथ मॉब लॉंचिंग करने की जश्न मनाने वाले के साथ खड़े होंगे और InshaAllah मैं मुसलमानों के साफ़ में रहूँगा। मुझे इन लोगो से कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, मेरी तरफ़ से इनको माफ़ी है लेकिन ये है कि ये तौबा करलें ताकि क़यामत के दिन इनकी पकड़ न हो और तुम भी चंदा का बिज़नेस बंद करदो कही ये न हो Allah तौबा का मौक़ा भी ना दें.
अब पीड़ित की आवाज़ बुलंद करने वाले को ही प्रताड़ित किया जायेगा! 👇🏻
जाने माने ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट और बेगुनाह पीड़ितों के केसों की पैरवी करने वाले नदीम खान को मज़लूमों की आवाज बनने की वजह से दुर्भावनापूर्ण एफआईआर के जरिये से प्रताड़ित ���िया जा रहा है।
मामला ये है कि 2 दिन पूर्व राइट विंग गिरोह द्वारा नदीम खान का एक वीडियो जानबूझ कर दुर्भावना के तहत वायरल किया गया। इस वीडियो में एक प्रदर्शनी में हेट क्राइम और नफरती भाषणों की वजह से प्रताड़ित होने वालों की घटनाओं को दर्शाया गया था।
मगर उस वीडियो को दक्षिणपंथी समूह द्वारा द्वेष फ़ैलाने वाला बता कर लगातार प्रशासन और पुलिस को टैग कर के करवाई करने का दबाव बनाया गया था।
सोशल मीडिया के उस कैंपेन का नतीजा ये रहा कि 30 नवंबर 2024 शाम 5 बज�� दिल्ली के शाहीन बाग पुलिस स्टेशन के एसएचओ समेत चार पुलिसकर्मी बैंगलोर में नदीम खान के भाई के निजी आवास पर पहुंचे, जहां पर नदीम खान अपने परिवार के साथ मौजूद थे।
वहां पर बिना किसी वारंट या नोटिस के उन्हें जबरन हिरासत में लेने का प्रयास किया गया है।
शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक वो पुलिस कर्मी घर की पहली मंजिल के हॉल में बैठे रहे और नदीम को "अनौपचारिक हिरासत" में "स्वेच्छा से" उनके साथ दिल्ली आने के लिए मजबूर करते रहे। यह सब कथित तौर पर उसी दोपहर दिल्ली में शाहीन बाग पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर (280/2024) में जांच के लिए किया गया था।
ज्ञात रहे ये FIR शाहीन बाग दिल्ली में 30 नवंबर को ही लगभग दोपहर 1 बजे दर्ज की गई और एक दम फुर्ती दिखाते हुए संबंधित पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारी शाम 5 बजे नदीम के भाई के घर बैंगलोर भी पहुंच गए।
पुलिस द्वारा बहुत जल्दबाजी में, बिना धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी किए या गिरफ्तारी वारंट के रूप में कोई अधिकार लिए बिना उनके बैंगलोर के घर आए और नदीम खान पर अपने साथ दिल्ली चलने के लिए लगातार दबाव बनाते रहे।
नदीम खान और उनके परिवार को 5.45 घंटे तक परेशान करने के बाद, रात 10.45 बजे अधिकारियों ने बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत एक नोटिस चिपकाया, जिसमें उनको छह घंटे के भीतर शाहीन बाग पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा।
नदीम खान के खिलाफ धारा 196, 353 (2) और 61 के तहत एफआईआर दर्ज की गयी है।
ज्ञात रहे इन सभी अपराधों के लिए सजा 3 साल से कम है और अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य के जजमेंट और साथ ही बीएनएसएस की धारा 35 के अनुसार, कानून नदीम की मौजूदा एफआईआर के आधार पर गिरफ्तारी को रोकता है, क्योंकि सजा 7 साल से कम है।
इसके बावजूद शाहीन बाग थाने के एसएचओ और अन्य पुलिस अधिकारियों ने नदीम खान और उनके परिवार के सदस्यों को आपराधिक रूप से धमकाना जारी रखा, बिना ��िसी उचित प्रक्रिया के उन्हें दिल्ली आने के लिए मजबूर करते रहे।
नदीम खान एसोसिएशन फॉर प्रोट���क्शन ऑफ सिविल राइट्स के राष्ट्रीय महासचिव हैं, जो मानवाधिकारों के लिए काम करने वाला एक राष्ट्रीय स्तर प्रसिद्ध संगठन है।
याद रखिये इस एफआईआर से पहले, 29 नवंबर 2024 को, लगभग 9 बजे, 20-25 अधिकारी बिना किसी नोटिस के, बिना किसी एफआईआर की कॉपी के, बिना किसी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नंबरों के माध्यम से संपर्क करने या अपने कार्यों के लिए कानूनी औचित्य प्रदान किए बिना दिल्ली में APCR के ऑफिस पहुंचे थे।
चूंकि ���ात में कार्यालय बंद था, इसलिए उन्होंने सुरक्षा गार्ड से एपीसीआर के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान और संगठन के अन्य सदस्यों और कर्मचारियों के बारे में पूछताछ की।
एफआईआर होने से पहले ही 20 पुलिस अधिकारियों का एपीसीआर कार्यालय में आना उनकी दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाने के लिए काफी है।
30 नवंबर की सुबह कुछ पुलिस अधिकारी वापस लौटे और APCR के पदाधिकारियों के बारे में पूछताछ की। जब इस पूछताछ के आधार के बारे में पूछा गया तो शाहीन बाग थाने के हेड कांस्टेबल योगेश ने कार्यालय में मौजूद वकीलों को जानकारी दे��े से इनकार कर दिया।
हेड कांस्टेबल ने वकीलों के साथ दुर्व्यवहार भी किया और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। एपीसीआर का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील भी पुलिस की छापेमारी के कारणों के बारे में पूछने के लिए शाहीन बाग थाने गए, लेकिन उन्हें कोई उचित जवाब नहीं मिला।
इस मामले में प्रसिद्ध मानवधिकार संगठन PUCL ने दिल्ली पुलिस द्वारा नदीम खान को परेशान करने, डराने-धमकाने और अवैध हिरासत में रखन��� की निंदा की है।
उन्होंने कहा है कि हम इस जांच के तरीके से भी बेहद चिंतित हैं, जहां स्पष्ट रूप से एक दूषित सोशल मीडिया अभियान के जरिए पुलिस और राज्य के अधिकारियों पर नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए लड़ने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने का दबाव बनाने की कोशिश की गई है।
अब पीड़ित की आवाज़ बुलंद करने वाले को ही प्रताड़ित किया जायेगा!
जाने माने ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट और बेगुनाह पीड़ितों के केसों की पैरवी करने वाले नदीम खान को मज़लूमों की आवाज बनने की वजह से दुर्भावनापूर्ण एफआईआर के जरिये से प्रताड़ित किया जा रहा है।
मामला ये है कि 2 दिन पूर्व राइट विंग गिरोह द्वारा नदीम खान का एक वीडियो जानबूझ कर दुर्भावना के तहत वायरल किया गया। इस वीडियो में एक प्रदर्शनी में हेट क्राइम और नफरती भाषणों की वजह से प्रताड़ित होने वालों की घटनाओं को दर्शाया गया था।
मगर उस वीडियो को दक्षिणपंथी समूह द्वारा द्वेष फ़ैलाने वाला बता कर लगातार प्रशासन और पुलिस को टैग कर के करवाई करने का दबाव बनाया गया था।
सोशल मीडिया के उस कैंपेन का नतीजा ये रहा कि 30 नवंबर 2024 शाम 5 बजे दिल्ली के शाहीन बाग पुलिस स्टेशन के एसएचओ समेत चार पुलिसकर्मी बैंगलोर में नदीम खान के भाई के निजी आवास पर पहुंचे, जहां पर नदीम खान अपने परिवार के साथ मौजूद थे।
वहां पर बिना किसी वारंट या नोटिस के उन्हें जबरन हिरासत में लेने का प्रयास किया गया है।
शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक वो पुलिस कर्मी घर की पहली मंजिल के हॉल में बैठे रहे और नदीम को "अनौपचारिक हिरासत" में "स्वेच्छा से" उनके साथ दिल्ली आने के लिए मजबूर करते रहे। यह सब कथित तौर पर उसी दोपहर दिल्ली में शाहीन बाग पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर (0280/2024,) में जांच के लिए किया गया था।
ज्ञात रहे ये FIR शाहीन बाग दिल्ली में 30 नवंबर को ही दोपहर 12:48 बजे दर्ज की गई और एक दम फुर्ती दिखाते हुए संबंधित पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारी शाम 5 बजे नदीम के भाई के घर बैंगलोर भी पहुंच गए।
पुलिस द्वारा बहुत जल्दबाजी में, बिना धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी किए या गिरफ्तारी वारंट के रूप में कोई अधिकार लिए बिना उनके बैंगलोर के घर आए और नदीम खान पर अपने साथ दिल्ली चलने के लिए लगातार दबाव बनाते रहे।
नदीम खान और उनके परिवार को 5.45 घंटे तक परेशान करने के बाद, रात 10.45 बजे अधिकारियों ने बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत एक नोटिस चिपकाया, जिसमें उनको छह घ��टे के भीतर शाहीन बाग पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा।
नदीम खान के खिलाफ धारा 196, 353 (2) और 61 के तहत एफआईआर दर्ज की गयी है।
ज्ञात रहे इन सभी अपराधों के लिए सजा 3 साल से कम है और अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य के जजमेंट और साथ ही बीएनएसएस की धारा 35 के अनुसार, कानून नदीम की मौजूदा एफआईआर के आधार पर गिरफ्तारी को रोकता है, क्योंकि सजा 7 साल से कम है।
इसके बावजूद शाहीन बाग थाने के एसएचओ और अन्य पुलिस अध���कारियों ने नदीम खान और उनके परिवार के सदस्यों को आपराधिक रूप से धमकाना जारी रखा, बिना किसी उचित प्रक्रिया के उन्हें दिल्ली आने के लिए मजबूर करते रहे।
नदीम खान एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के राष्ट्रीय महासचिव हैं, जो मानवाधिकारों के लिए काम करने वाला एक राष्ट्रीय स्तर प्रसिद्ध संगठन है।
याद रखिये इस एफआईआर से पहले, 29 नवंबर 2024 को, लगभग 9 बजे, 20-25 अधिकारी बिना किसी नोटिस के, बिना कि���ी एफआईआर की कॉपी के, बिना किसी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नंबरों के माध्यम से संपर्क करने या अपने कार्यों के लिए कानूनी औचित्य प्रदान किए बिना दिल्ली में APCR के ऑफिस पहुंचे थे।
चूंकि रात में कार्यालय बंद था, इसलिए उन्होंने सुरक्षा गार्ड से एपीसीआर के राष्ट्रीय सचिव नदीम खान और संगठन के अन्य सदस्यों और कर्मचारियों के बारे में पूछताछ की।
एफआईआर होने से पहले ही 20 पुलिस अधिकारियों का एपीसीआर का���्यालय में आना उनकी दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाने के लिए काफी है।
30 नवंबर की सुबह कुछ पुलिस अधिकारी वापस लौटे और APCR के पदाधिकारियों के बारे में पूछताछ की। जब इस पूछताछ के आधार के बारे में पूछा गया तो शाहीन बाग थाने के हेड कांस्टेबल योगेश ने कार्यालय में मौजूद वकीलों को जानकारी देने से इनकार कर दिया।
हेड कांस्टेबल ने वकीलों के साथ दुर्व्यवहार भी किया और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। एपीसीआर का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील भी पुलिस की छापेमारी के कारणों के बारे में पूछने के लिए शाहीन बाग थाने गए, लेकिन उन्हें कोई उचित जवाब नहीं मिला।
इस मामले में प्रसिद्ध मानवधिकार संगठन PUCL ने दिल्ली पुलिस द्वारा नदीम खान को परेशान करने, डराने-धमकाने और अवैध हिरासत में रखने की निंदा की है।
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@Muhamma30192549 @Anaa_Hasan @FiltrationTime Thakur ne Bhadwon ki fauj Banai hai 🤣😂 in Chution aur bakchodon se Deen Qayem hoga jo Bhaunkte rahte kutton ki tarah
शायद अमरावती को अपना पहला मुस्लिम विधायक मिलने वाला है। ज्ञात रहे मुस्लिम केंद्रित सीट होने के बावजूद आज ���क इस सीट पर कोई मुस्लिम विधायक नहीं चुना गया था।
नगीना सांसद चंद्रशेखर की पार्टी के सिम्बल पर अमीन पटेल फ़िलहाल 13377 वोटों से आगे चल रहे है।
पूरा महाराष्ट्र चुनाव का नतीजा एक तरफ और अमरावती जैसी मुस्लिम मुस्ल��म बहुल सीट पर आज़ादी के बाद पहली बार मुस्लिम विधायक बनने की संभावना एक तरफ
सेकुलर पार्टियों के भ्रम को तोड़ा जा रहा है
अगर आप एक मुस्लिम के तौर पर महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों को देखना चाहते है तो निम्नलिखत सीटों के नतीजों को देखिये।
मुस्लिम राजनीति महाराष्ट्र में इन्हीं सीटों के इर्द गिर्द घूमती है।
मालेगांव मध्य
शिवाजी मानखुर्द
मुंबा देवी
भिवंडी पूर्व
भिवंडी पश्चिम
��मरावती
मुंब्रा कलवा
भायखला
अकोला पश्चिम
औरंगाबाद मध्य
औरंगाबाद पूर्व
धारावी SC
वर्सोवा
वांद्रे पूर्व
कुर्ला SC
अणुशक्ति नगर
मलाड पश्चिम
चांदीवली
अंधेरी पश्चिम
अकोट
वांद्रे पश्चिम
परभनी
सोलापुर शहर मध्य
कलीना
बालापुर
नांदेड़ उत्तर
नांदेड़ दक्षिण
नागपुर मध्य
धुले शहर
सिल्लोड
मीरा भयंदर
कागल
औसा
@Anaa_Hasan @FiltrationTime “We” consider? Who the hell you are for concider ? Of shahada of IH ? YS ? And Hamas ? Today in IT’s space ASAD saying “Ismail Hania Is taghoot all Palestinian shuhda is Taghoot”
Who the Hell you are ? YouTube Based opinion makers?
हैदराबाद के चूहे ,
महाराष्ट्र की धरती पर 15 मिनट की धमकी देने से पहले ये याद रखना , ये बाला साहेब की धरती है , उनका एक बेटा बिगड़ा है पर उनके करोड़ों बेटे आज भी भगवा थाम कर खड़े है
15 मिनट के अंदर राम राम जपने लगेंगे ओवैसी और उसके चमचें : Kapil Mishra speech in Pune
आज ही के दिन 24 अक्टूबर 1989 को बिहार के भागलपुर में दंगे शुरू हुए और 2 महीने तक हिंसक घटनाएं जारी रहीं, जिससे भागलपुर के 250 गांव प्रभावित हुए।
1,000 से अधिक लोग मारे गए (जिनमें से लगभग 900 मुसलमान थे), और 50,000 से ज्यादा ��ोग हिंसा के परिणाम से विस्थापित हुए।
#BhagalpurRiots