मुख्यमंत्री आदित्यनाथ अपने कानून व्यवस्था के दावे करते हैं
लेकिन कांवड़ यात्रा के लिए स्कूल बंद करवा दिए
इसका मतलब खुद आदित्यनाथ बिष्ट स्वीकार कर चुके हैं कि वे कानून व्यवस्था संभालने में अक्षम हैं
क्योंकि अगर ये महोदय कानून व्यवस्था और कांवड़ व्यवस्था संभालने में सक्षम होते तो कांवड़ यात्रा भी सकुशल चलती और स्कूल भी खुलत��, दोनों काम एकसाथ हो सकते थे, लेकिन ये आदित्यनाथ बिष्ट को पता है कि वे अक्षम हैं, अयोग्य हैं, अनपढ़ हैं, इसीलिए शिक्षा का महत्व नहीं समझते और सबसे पहला काम उन्होंने स्कूल बंद करने का किया
हमारी मांग यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं। वो अपना बयान दें, हम चर्चा करने को तैयार हैं। चर्चा से ही हल निकलेगा।
सदन शुरु हुए काफी दिन हो गए हैं। उन्हें आना चाहिए, सदन में न आकर वो स��सद का अपमान कर रहे हैं।
: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @kharge
झारखंड में चल रहे JPSC - JSSC में भ्रष्टाचार, धांधली, पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के संघर्ष को सलाम!
छात्रों के विधानसभा मार्च के कॉल में मिलते हैं!
7 अगस्त । 11 बजे । बिर���ा चौक - रांची
मोदी ज�� Gen Z से डर तो रहे हैं
• वरना मित्रों से fraands पर नहीं आते
• TV चैनल पर बोलने के बजाय इंस्टाग्राम पर रील नहीं बनाते
• रात को 12 बजे पोस्ट ना करते, जब Gen Z सबसे ऐक्टिव होते हैं
Gen Z को हल्का समझने की भूल कर बैठे हैं मोदी जी!
लखनऊ में जाकर सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री श्री नितिन नवीन जी मोदी और योगी का समय बता रहे हैं कि उनका समय चल रहा है। मोदी जी के बॉस हैं नितिन नवीन, और खुद का बूथ हार गए।
विपक्ष सरकार से सवाल पूछ रहा था, लेकिन जवाब सरकार से कम और स्पीकर की कुर्सी से ज़्यादा आ रहे थे।
"रसीद लेकर आ जाओ", "तुम तो पैदा भी नहीं हुए थे...", "मैं बताता हूँ कहाँ मिलेगा..." - ये किसी निष्पक्ष स्पीकर की भाषा नहीं लगती। ये तो ऐसा लग रहा था जैसे सत्ता पक्ष का कोई नेता विपक्ष से बहस कर रहा हो।
लोकतंत्र में स्पीकर की कुर्सी किसी पार्टी की नहीं, पूरे सदन की होती है। उसका काम सत्ता का बचाव करना नहीं, नियमों के मुताबिक़ सदन चलाना और दोनों पक्षों को बराबरी से सुनना है।
लेकिन जिस दौर में हर संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हों, वहाँ स्पीकर से भी निष्पक्षता की उम्मीद करना शायद ज़्यादा बड़ी उम्मीद हो गई है।
अब उम्मीद सिर्फ़ जनता से है। वही तय करेगी कि नफ़रत फैलाने वालों, समाज को बाँटने वालों और जवाबदेही से भागने वालों को सत्ता में बनाए रखना है या लोकतंत्र को फिर से मज़बूत करना है।
ये वीडियो देखिए 👇
मध्य प्रदेश के विदिशा ���ें स्कूली छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर, उफनती नदी को पार करते दिखाई दे रहे हैं। छात्र रोज इसी तरह जान हथेली में रखकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
ये वही विदिशा है, जहां से पूर्व CM शिवराज सिंह चौहान सांसद हैं।
'विकास' के हवा-हवाई दावे करने वाली BJP मध्य प्रदेश में करीब 22 साल से सत्ता में है, लेकिन हकीकत सबके सामने है।
BJP के नेताओं को सिर्फ अपनी 'तिजोरी के विकास' की चिंता है, बाकी जनता जिए या मरे- उ��्हें इसकी कोई परवाह नहीं है।
शर्मना��!!
पीडित छात्रा:- एक पुलिस वाले ने मेरे पिछले हिस्से मे लाठी घुसेडी...💔
ठीक ऐसी ही घटना प्रोटेस्टर ��े दौरान जंतर-मंतर पर और भी छात्राओ के साथ भी हुई
हमें ₹@डी बोला गया है, हमे ��ारते वक्त ये बोल रहे थे कि और मारो इन बहन की लौ@डी को 💔
एक लडकी को ये तक बोला गया कि घर चली जा वर्ना थाने ले जा कर नं&गा करके मारूंगा
औरतो की छाती पर पैर रखे गए है और ये सब पुरूष पुलिस के द्वारा किया गया था और जो इनमे से तमाम बिना वर्दी के भी थे !!
इस पीडिता की आवाज प्रधानमंत्री के कानो तक जरूर पहुचनी चाहिए, उनको अपने ऊपर पडी गालियां तो सुनाई दे गई...
पर प्रधानमंत्री की पुलिस ने इन छात्राओ के साथ जो सुलूक किया उसके बारे मे प्रधानमंत्री के क्या विचार है ?