मोदी जी स्वयं अपने खिलाफ समाज को एकजुट होने का आह्वान कर रहे हैं। अतः, आप जहाँ कहीं भी हैं, और आप मोदी एक्ट, मोदी समर्थित यूजीसी नियमावली, भाजपा के 72-75% आरक्षण को ले कर एकजुट होना चाहते हैं तो 29 दिसंबर 2026 को दिल्ली पहुँचिए और अपने अधिकारों, समाज और राष्ट्र के लिए खड़े होइए।
"प्रभु श्री राम भी इंतज़ार कर रहे थे कि मोदी जी हमको घर कब दोगे?"
-बिहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
इतना अहंकार किस काम का की अब भगवान को भी अपने सामने याचक बना दिया??
खैर, विनाशकाले विपरीत बुद्धि!
अब भी संदेह है कि @BJP4India सोच-समझकर प्रतिभा के सामूहिक हत्याकांड के प्रयास में है? सरकार की जगह भाजपा लड़ेगी 73% आरक्षण के लिए। कॉन्ग्रेस का भय दिखा कर भाजपा हर वह कार्य कर रही है जो न तो अखिलेश ने किया, न कॉन्ग्रेस ने। मध्यप्रदेश में जातिवादी हत्यारा राम, महाराष्ट्र में शिवाजी को ‘कुनबी का छोकरा’ बता कर आरक्षण जस्टिफ़ाई किया जा रहा है।
और गिरना रह गया है क्या?
प्रिय @DrMohanYadav51 जी, @BJP4MP से मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश,
समाचार सुना कि आप लोग तीन बार कोर्ट में OBC पर हारने के उपरांत भी, सामान्य वर्ग (और प्रतिभा) को राज्य से भगाने के लिए, अब फिर 73% आरक्षण के विषय पर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
भाजपा संभवतः 2018 भूल गई है जब सवर्णों ने उन्हें तमाचा मारा था तीन राज्यों में। यदि 2028 में आपको वही परिणाम चाहिए तो आप यह असंवैधानिक बकलोली करते रहिए।
मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि जिस तन्मयता से मैंने इस पूरे वर्ष को सामान्य वर्ग और सवर्णों के अधिकार पर लिखने-बोलने पर केन्द्रित कर रखा है, 2027 और 28 में यह राजनैतिक हो चुका होगा। यूपी भाजपा की क्या स्थिति है, फोन कर के पता कर लीजिएगा।
आपने यह चुनाव 73% आरक्षण के दम पर नहीं जीता है। लाडली बहना के कारण आपकी आर्थिक स्थिति का पता है ही। लोगों को पुनः व्यक्तिगत छवि पर आक्षेप करने को विवश मत कीजिए। यूपी यदि 190-210 के रेंज में आता है तो आप सोचिए मध्यप्रदेश का क्या होगा।
हठ छोड़िए और राज्य पर ध्यान दीजिए। भारी उद्योग पर फोकस कीजिए। शिक्षा में अच्छा निवेश कीजिए। अच्छे नेता बनिए जिसकी लेगेसी रहे। 73% आरक्षण पूरे राज्य को बर्बाद कर देगा। आपको मिलेगा नहीं, पर आपकी छवि बर्बाद हो जाएगी, यह निश्चित है।
यदि @narendramodi अपनी घटिया जातिवादी नीतियों के चक्कर में इतना नहीं गिरते, तो लोग कई बातों को इग्नोर करते रहते। परंतु, दुष्कर्म जैसे अपराधों में मेडिकल की अनिवार्यता समाप्त कर के, सवर्णों के विरोध में 'मोदी एक्ट' जैसा एक हथियार दे दिया, जिसमें ना तर्क है, ना तथ्य।
कोई नेता जब दुष्कर्म में जाति ढूँढ रहा हो, तो समझिए कि उसे महिला सुरक्षा की चिंता है या 'दलित महिला वोट' की? यह समाचार पढ़ कर उल्टी आ रही है कि इस घृणित जातिवादी सोच वाले व्यक्ति को देश चलाने का कार्य मिला हुआ है।
यदि यह सत्य है तो एक व्यवस्थित तरीके से यह सब हो रहा है ताकि सवर्णों का प्रतिनिधित्व स्वतः समाप्त हो जाए और फिर जो राज्य या राष्ट्र के स्तर पर नीतियाँ बनें, उसमें स्पष्ट पक्षपात हो।
इसी कारण से सबको जगना पड़ेगा।
बंगाल में दुर्गा पूजा का भव्य 'पुनरारंभ' बताता है कि जितने शुंभ-निशुंभ, मधु-कैटव, चंड-मुंड आते हैं, वो निपटा भी दिए जाते हैं। सनातन सभ्यता निरंतर प्रवाह में चलती रहती है। वह ना तो मुगलों से हारी, ना अंग्रेजों से, और इन भीतरघाती नेताओं से तो घंटा कुछ नहीं उखड़ने वाला है।
इसलिए, इसे सनातन के विशाल कालखंड की अविरल धारा में एक सड़े हुए बहते नाले की तरह देखिए जो नदी में कोई डंप कर रहा है।
जो भी समाज का शत्रु होगा, जो भी स्वयं को भगवान समझेगा, जो भी राष्ट्र को तोड़ने-बाँटने का प्रत्यक्ष (या परोक्ष) संकल्प ले कर उतरेगा, उसको निपटा दिया जाएगा।
वो या तो ऐसे निपटेंगे, या वैसे। आप सबको माता दुर्गा स्वस्थ रखें, समृद्धि दें, शक्ति दें और देश के लिए लड़ने का सामर्थ्य भी।
फूलपुर प्रयागराज से यह रिपोर्ट है। कोई कन्फर्म करेगा कि यह घटना किस तारीख की है? ब्राह्मण परिवार की स्थिति देखिए, उनके महल देखिए जो पीछे हैं।
न तो इन्हें PM आवास योजना मिली, न @myogiadityanath की मुख्यमंत्री आवास योजना। हाँ, मोदी एक्ट अवश्य मिल गया है।
जैन हैं। बेटी के साथ किसी ने अभद्रता की, वो हॉस्पिटल में है। थाने में केस लिखवाया। कार्रवाई नहीं हुई।
फिर जिस पर केस का आवेदन किया, उसने मोदी एक्ट लगवा दिया है। अब वीडियो बना रहे हैं।
अब यह ना तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल उपाध्याय का जनसंघ है! और ना ही अटल-आडवाणी का भाजपा है। नरेंद्र मोदी ने भाजपा को पूरी तरह से सवर्ण विरोधी और भीम मीम का हमदर्द पार्टी बना कर रख दिया है।
यह जो नीला शर्ट में व्यक्ति दिख रहा है आजकल बीजेपी का यह वैचारिक पिता है। आज भाजपा का आईडियोलॉजी वही है जो कल दिलीप मंडल का था।
दिलीप मंडल ने बहुत गर्व से सोशल मीडिया पर लिखा था, मैं नहीं बदला भाजपा बदल गई है!
मैं भाजपा के साथ इसीलिए आया क्योंकि भाजपा ने मेरे विचारों को आत्मसात किया है।"
इतना खुला सच देखने के बाद भी यदि सवर्ण इस सवर्ण विरोधी और घनघोर जातिवादी मोदी सरकार पर UGC और Scst एक्ट हटाने पर दबाव नहीं बनाते दो उनको भगवान भी नहीं बचा सकता ...
सरकार देवी-देवता, ऋषि-महर्षि और धर्म ग्रंथों के अपमान के खिलाफ SC-ST ऐक्ट जैसा कानून क्यों नहीं बना रही है?
सरकार ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य, जैन, सिख के जाति सूचक अपमान के खिलाफ SC-ST ऐक्ट जैसा कानून क्यों नहीं बना रही है?
@PMOIndia@HMOIndia
आज एक बात पता चली कि DU में जो प्राध्यापकों को केबिन मिलता है, वह वरीयता के आधार पर नहीं, जाति के आधार पर मिलता है। वहाँ भी आरक्षण किया है सरकार बहादुर ने।
यानी, आप वरिष्ठ हैं, पर यदि कोई दलीत-पीड़ीत-शोषीत भाई है, तो उसे कनिष्ठ होने पर भी केबिन मिल जाएगा। आप बाहर टहलते रहिए और केतली से खौलती लाल चाय को प्लास्टिक के कप में बर्फ के टुकड़ों पर डाल कर ‘आइस टी’ मानते हुए कलेजे को ठंढा करिए।
सुधिजनों से अनुरोध है कि इस शंका का भी समाधान करें कि प्रोफेसरों में वर्ष भर के अनुभव वाले सहायक प्रोफेसर आदि से ऊपर वालों को EWS का आरक्षण कैसे मिलेगा? एड-हॉक वाले भी आठ लाख से अधिक कमाते हैं, तो कैसे भरती होंगी ये सीटें?
अब एक समाचार 'सूत्रों' के नहीं, 'उच्च पदस्थ सूत्रों' के हिसाब से फैलाया जा रहा है कि सरकार UGC रोलबैक नवंबर के मध्य में करेगी। यह कोई समाचार नहीं है, यह वही धूर्तता है जो इनके प्रवक्ताओं के मुँह में माइक देने पर ये कहते हैं कि 'विषय कोर्ट में है'।
ध्यान रहे हमारी तीन माँगें हैं:
1. UGC रोलबैक
2. मोदी एक्ट में समुचित संशोधन
3. वर्तमान आरक्षण में समीक्षा
कोई एक माँग से कुछ नहीं होने वाला। संघर्ष चलता रहेगा। 5 महीना लगे, 2 साल लगे, 10 साल लगे।