कबीर: पांच सहस अरु पांचसौ,जब कलयुग बीत जाए।
महापुरुष फरमान तब, जग तारण को आये।।
वह महापुरुष संत रामपाल जी महाराज हैं उनकी शरण में आओ और अपना जीवन सफल बनाओ।
#शिवजी_की_सत_साधना_करो
गंगा तो शिव के लोक में बने जटा कुंडली डैम में है। उसे यहाँ से ले जाने की जरूरत नहीं है। रही बात कांवड़ यात्रा की तो सावन में सबसे ज्यादा जीव उत्पन्न होते हैं जिस वजह से कांवड़ के लाने में सबसे ज्यादा जीव मरते हैं।
Gudda Guddi ka Khel Band Karo
#शिवजी_की_सत_साधना_करो
गुड्डा गुड्डी का खेल बंद करो, शिव जी की सत साधना करो।
संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं कि
सूक्ष्मवेद में बताया गया है:
गरीब, तीर्थ बाट चलै जो प्राणी।
सोतो जन्म-जन्म उरझानी।।
Gudda Guddi ka Khel Band Karo
#शिवजी_की_सत_साधना_करो
गुड्डा गुड्डी का खेल बंद करो, शिव जी की सत साधना करो।
संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं कि सूक्ष्मवेद में परमात्मा ने बताया है:
जा तीर्थ पर कर है दानं। ता पर जीव मरत है अरबानं।।
गोते-गोते पड़ि है भारं। गंगा जमना गए केदारं ।।
Gudda Guddi ka Khel Band Karo
#शिवजी_की_सत_साधना_करो
गुड्डा गुड्डी का खेल बंद करो, शिव जी की सत साधना करो।
संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं कि सूक्ष्मवेद में परमात्मा ने बताया है:
जा तीर्थ पर कर है दानं। ता पर जीव मरत है अरबानं।।
गोते-गोते पड़ि है भारं। गंगा जमना गए केदारं ।।
Gudda Guddi ka Khel Band Karo
#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो ढंग की पूजा करो
सावन के महीने में सबसे ज्यादा जीव उत्पन्न होते हैं जिससे कांवड़ यात्रा में आने जाने में पैरों तले सबसे ज्यादा जीव मरते हैं। जिस वजह से पुण्य के स्थान पर अत्यधिक पाप होते हैं।
Read Gyan Ganga
#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो ढंग की पूजा करो
सावन के महीने में सबसे ज्यादा जीव उत्पन्न होते हैं जिससे कांवड़ यात्रा में आने जाने में पैरों तले सबसे ज्यादा जीव मरते हैं। जिस वजह से पुण्य के स्थान पर अत्यधिक पाप होते हैं।
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#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो ढंग की पूजा करो
सावन में सबसे ज्यादा जीव उत्पन्न होते हैं जिससे कांवड़ के लाने में सबसे ज़्यादा जीव मरते हैं।
संत रामपाल जी बताते हैं
इस विषय में परमेश्वर कबीर जी ने कहा है:
कबीर,तीर्थ कर कर जग मुवा,ऊड़ै पानी न्हाय।
रामहि राम ना जपा, काल घसीटें जाय।।
#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो ढंग की पूजा करो
सावन में सबसे ज्यादा जीव उत्पन्न होते हैं जिससे कांवड़ के लाने में सबसे ज़्यादा जीव मरते हैं।
संत रामपाल जी बताते हैं
इस विषय में परमेश्वर कबीर जी ने कहा है:
कबीर,तीर्थ कर कर जग मुवा,ऊड़ै पानी न्हाय।
रामहि राम ना जपा, काल घसीटें जाय।।
#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो ढंग की पूजा करो
कांवड़ यात्रा से पाप होते हैं या पुण्य?
जानने के लिए
पढ़ें पवित्र पुस्तक "हिन्दू साहेबान नहीं समझे गीता वेद पुराण"
Read Gyan Ganga
#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो ढंग की पूजा करो
कांवड़ यात्रा से पाप होते हैं या पुण्य?
जानने के लिए
पढ़ें पवित्र पुस्तक "हिन्दू साहेबान नहीं समझे गीता वेद पुराण"
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#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो ढंग की पूजा करो
गुड्डा गुड्डी का खेल बंद करो,ढंग की पूजा करो।
संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं कि सूक्ष्मवेद में परमात्मा ने बताया है:
जा तीर्थ पर कर है दानं। ता पर जीव मरत है अरबानं ।।
गोते-गोते पड़ि है भारं। गंगा जमना गए केदारं ।।
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#गुड्डा_गुड्डी_का_खेल_बंद_करो ढंग की पूजा करो
गुड्डा गुड्डी का खेल बंद करो,ढंग की पूजा करो।
संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं कि सूक्ष्मवेद में परमात्मा ने बताया है:
जा तीर्थ पर कर है दानं। ता पर जीव मरत है अरबानं ।।
गोते-गोते पड़ि है भारं। गंगा जमना गए केदारं ।।
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#पूर्णगुरु_संतरामपालजीमहाराज
गीता अध्याय 15 श्लोक 1 में गीता ज्ञान दाता ने तत्वदर्शी संत (सच्चा सतगुरु) की पहचान बताते हुए कहा है कि वह संत संसार रूपी वृक्ष के प्रत्येक भाग अर्थात जड़ से लेकर पत्ती तक का विस्तारपूर्वक ज्ञान कराएगा।
Glory of True Guru
#पूर्णगुरु_संतरामपालजीमहाराज
गुरू बिन काहू न पाया ज्ञाना, ज्यों थोथा भुस छड़े मूढ़ किसाना।
गुरू बिन वेद पढ़े जो प्राणी, समझे न सार रहे अज्ञानी।
कबीर, नौ मन सूत उलझिया, ऋषि रहे झख मार।
सतगुरू ऐसा सुलझा दे, उलझै ना दूजी बार।।
Glory of True Guru
#पूर्णगुरु_संतरामपालजीमहाराज
Glory of True Guruसतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद। चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।
सतगुरु गरीबदास जी महाराज अपनी वाणी में पूर्ण संत की पहचान बता रहे हैं कि वह चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा।
#पूर्णगुरु_संतरामपालजीमहाराज
Glory of True Guru
गुरू बिन काहू न पाया ज्ञाना, ज्यों थोथा भुस छड़े मूढ़ किसाना।
गुरू बिन वेद पढ़े जो प्राणी, समझे न सार रहे अज्ञानी।
कबीर, नौ मन सूत उलझिया, ऋषि रहे झख मार।
सतगुरू ऐसा सुलझा दे, उलझै ना दूजी बार।।