माँ बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण रहता है। इनकी आराधना से वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता एवं विनम्रता का विकास होकर मुख, नेत्र तथा संपूर्ण काया में कांति-गुण की वृद्धि होती है।
यह जरूरी है कि माँ बगलामुखी का पूजन करते समय पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। पीले वस्त्र पहनकर पीले आसन पर बैठकर ही मंत्रों का जाप करें। हल्दी की माला का ही प्रयोग करें। जप करने से पहले बगलामुखी कवच का पाठ अवश्य करें।
शक्तिरूपा बगलामुखी देवी की पूजार्चन करने से ऋण,रोग व शत्रु का भय समाप्त हो जाता है। वैदिक तंत्र-मन्त्र-यंत्र के ग्रन्थ में कहा गया है कि यदि शत्रुओ का शमन करना है तो श्री बगलामुखी मन्त्र का प्रयोग करना चाहिए।