@Airtel_Presence वाले ससुरे फ्रॉड होने के साथ बेशर्म और कामचोर भी हैं। पिछली पर जब कंप्लेंट करी थी तो बोले कि DM कर दो। समस्या DM में लिखकर भेज दी तो आज तक ससुरे रिप्लाई ही नहीं किए!
सर्वसाधारण को सूचित कर दूं कि इस घटना से मेरा कोई संबंध नहीं है। यादव जी मुझे ख्वामखा बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं!
मैं यादव जी पर 240 रुपए की मानहानि का केस ठोकूंगा!
जो आदमी ईमानदारी से अपनी कमाई से जी रहा है..उसे Civil का सिस्टम कम भरोसेमंद मानता है। और जो हर छोटी मोटी चीज के लिए कर्जा ले रहा है, क्रेडिट पर पल रहा है..वो इन सालों की नजर में हीरो है।
सिबिल स्कोर आपकी वित्तीय आदत को नापने की कम और आपको लगातार कर्ज के जाल में फंसाए रखने की व्यवस्था ज्यादा है! इससे अच्छा रखना है तो आपको लगातार कर्ज लेतेरहना होगा। कर्ज ना लो तो क्रेडिट खराब और लेकर चुका दो तो भी कुछ दिन में खराब हो जाता है।
साला एकदम चूतियामैटिक सिस्टम है!
भारत के बैंक के पास अभी तक अमेरिकी TransUnion Cibil ही है, यानी एक विदेशी संस्था हमारी क्रेडिट रेटिंग तय करती है, हमारा फाइनेंसियल डेटा भी उनके ही स्वामित्व में रहता है।
#CIBIL एक अव्यवहारिक, मूर्खतापूर्ण तंत्र है। अगर आप लगातार कर्ज लेकर चुकाते रहते हैं तो आपका सिबिल स्कोर अच्छा रहेगा। अगर आपने कर्ज लिया ही नहीं तो भले आपकी कर्ज चुकाने की क्षमता हो, लेकिन यह तंत्र आपका स्कोर नीचे कर देगा। कर्ज लेकर चुका दिया और कुछ वर्षों बाद कर्ज लेने गए, तब भी सिबिल स्कोर कम हो जाएगा। कुल मिलाकर सिबिल आपको समय पर कर्ज देने से अधिक लगातार कर्ज के जाल में फंसाए रखने के लिए है। अब मेरे जैसे लोग कभी क्रेडिट कार्ड नहीं रखते तो उसके आधार पर भी सिबिल स्कोर कम ही रहेगा। यह न समझ आने वाली बात है कि, भारत में इस तंत्र को क्यों मान्यता दी गई है।
"सच्चे सनातनी क्यों हो गए हैं" से क्या मतलब है? अखिलेश जी नेता है और नेताओं का हृदय परिवर्तन तो चलता ही रहता है! "हिंदू हृदय सम्राट" मोदी जी भी तो हृदय परिवर्तन करके "जय भीम नमो बुद्धाय" हो गए हैं!
उनके लिए सवाल क्यों नहीं उठाए बे?
राजनीति और पक्षपात ग्रे एरिया में ही होती है जहां दो प्लेयर के स्किल और आंकड़ों में बहुत अंतर नहीं होता, तो सेलेक्टर के पास बेहुदा तर्क देकर अपनी पसंद नापसंद थोपने का मौका होता है।
आपके फेवरेट को पॉलिटिक्स से बचना है तो उसे इतना बेहतर होना होगा कि नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाए!
31 साल के सूर्यकुमार यादव का इंटरनेशनल टी 20 डेब्यू आईपीएल के आधार पर करवाया जा सकता है क्योंकि मुंबई से थे।
33 साल के दो बार आईपीएल विजेता कप्तान अच्छी बल्लेबाजी करने वाले रजत पाटीदार के इंटरनेशनल टी 20 डेब्यू में उम्र मानक बन गया क्योंकि वो एमपी के हैं और आरसीबी से खेलते हैं।
कोई कारण नहीं है लेकिन पता नहीं क्यों अय्यर हार्दिक पंड्या संजू सैमसन और वाशिंगटन सुंदर मुझे कभी पसंद नहीं रहे। पांडे को देखकर तो पता नहीं क्यों सुलग जाती है!
वहीं ज्यादातर लोगों के निशाने पर रहने वाला धोनी मुझे पसंद आता है।