होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
को करि तर्क बढ़ावै साखा।।
अर्थ:
वही होकर रहेगा जो भगवान श्रीराम ईश्वर ने पहले से रच/तय रखा है। इस विषय में तर्क-वितर्क (चिंता या बहस) करके कौन अपनी व्यर्थ की बातों की शाखाएं बढ़ाए!
मंज़िल में रहा हूं कभी राहों में रहा हूँ,
मैं जब जहां रहा हूं निगाहों में रहा हूं।
यूं ही नहीं निखरे हैं मेरे रूप व रंगत,
कुछ दिन मैं संगमरमरी बाहों में रहा हूं।
मैं जैसे तैसे आ गया एक आध से आगे,
निकल सकता नहीं लेकिन तेरी हर याद से आगे।
मेरा भी ख्वाब है दुनियाँ तुम्हारे साथ देखूं मैं,
कदम बढ़ते नहीं लेकिन मुरादाबाद से आगे।
होता अगर मैं शायर कोई,
नज्में लिखता तेरी अदाओं पे।
शायरी करता तेरी आंखों पे
गजलें लिखता तेरी आन्हो पे।
कायल होता तेरी चाल का,
सजके जाता तेरी निगाहों पे।
मर ही जाता तेरे हुस्न पर,
टूट कर गिरता तेरी बाहों में।
होता अगर मैं शायर कोई,
नज्में लिखता तेरी अदाओं पे।
हर कोई आकर चला जाए, बस अड्डा थोड़ी हूं,
तेरी राहें मुश्किल बना दूं, गड्ढा थोड़ी हूं।
और वादा किया है तो मरते दम तक निभाऊंगा..
ज़रा सी अनबन में ही बदल जाऊं,
Raghav Chadda थोड़ी हूं l .. !!😃🤣
हर कोई आकर चला जाए, बस अड्डा थोड़ी हूं,
तेरी रहे मुश्किल बना दूं, गड्ढा थोड़ी हूं।
और वादा किया है तो मरते दम तक निभाऊंगा..
ज़रा सी अनबन में ही बदल जाऊं,
Raghav Chadda थोड़ी हूं l .. !!😃🤣
@raghav_chadha आपको seprate रहना था #बीजेपी से , अगर सब सत्तापक्ष में ही चले गए तो विपक्ष कमजोर होगा, और सत्तापक्ष से हिसाब लेने वाला भी कोई नहीं बचेगा।
जमीन स्तर के मुद्दे जो आपने उठाए थे , मुझे नहीं लगता अब आप उस मजबूती से बीजेपी में रहकर सरकार पर हमलावर हो पाएंगे।