आज बुद्ध जयंती के अवसर पर, मैं सभी बौद्धों से महाबोधि महाविहार की मुक्ति के लिए वंदना करने का अनुरोध करता हूँ।
1949 का बोधगया मंदिर अधिनियम (BT Act) निरस्त किया जाना चाहिए और महाबोधि मंदिर के प्रबंधन का पूर्ण नियंत्रण बौद्धों को दिया जाना चाहिए।
भारतीय बौद्ध महासभा और वंचित बहुजन आघाड़ी महाबोधि महाविहार की मुक्ति के लिए लड़ाई लड़ रही हैं और आगे भी लड़ती रहेंगी।
कॉ. गोविंद पानसरे यांनी लिहिलेले 'शिवाजी कोण होता?' हे पुस्तक हे 'कुलवाडी भूषण, बहुजन प्रतिपालक, क्रांतीवीर छत्रपती' ही शिवाजी महाराजांची खरी प्रतिमा लोकांना समजू नये, असे आरएसएसला वाटते.
आरएसएस छावणीतील हिंदुत्ववाद्यांनी स्वतःच्या सोयीची छत्रपती शिवाजी महाराजांची प्रतिमा लोकांसमोर मांडण्याचे षडयंत्र रचले होते, ते षडयंत्र उद्ध्वस्त करण्याचे काम 'शिवाजी कोण होता?' या पुस्तकाने केले आहे.
“शिवाजी कोण होता?” या पुस्तकाच्या सामूहिक वाचनाची चर्चा आयोजित करावी, असे आवाहन वंचित बहुजन आघाडीच्या सर्व जिल्हा, तालुका आणि महानगर समित्यांना करण्यात येत आहे.
आज मैने आंबेडकरवादी यूट्यूबर @MukeshMohannn से फोन पर बात की। मुकेश ने हाल ही में कारवां मैगज़ीन के एक आर्टिकल पर एक वीडियो बनाया था। जिसमें BJP के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की बीफ एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी के बारे में बताया गया था। इससे गुस्साए मंत्री नितिन गडकरी ने मुकेश मोहन को 50 करोड़ रुपये का मानहानि का नोटिस भेजा। पुलिस ने उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया।
सरकार के खिलाफ बोलने वालों को धमकाना और उनके सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने की घटनाएं पूरे देश में शुरु हैं। हम सरकार कि निंदा करते हैं। और हम सब मुकेश मोहन के साथ खडे हैं।
#StandWithMukeshMohan
Flash: “I challenge Yogi to have rally as big as Behenji @Mayawati
But you media guys falsely alleged that BSP’s successful was due to tacit backing of Yogi. This is medias hatred towards Ambedkarite parties like @VBAforIndia and @bspindia
Remember -only Ambedkarite parties offer true challenge to RSS BJP. Rest all are hand in gloves with them “ says @Prksh_Ambedkar
जाणत्या राजाचे मावळे ( so called विचारवंत, अभ्यासक,पत्रकार) काल पासून वेगळ्याच विषयावर बोलत आहे, अकोल्यात्य केलेल्या राजाच्या गनिम्या काव्याबद्दल पोवाडे कधी सुरू करणार आहेत?
आले मोठे पुरोगामी !
@Prksh_Ambedkar : I want to stop BJP/RSS. Will never align with BJP
@PawarSpeaks : I want to stop VBA. I’ll support BJP from inside/ outside & support Adani
In an historic event, Vanchit Bahujan
Aghadi organised a protest at the RSS headquarters of Aurangabad. While the protest gathered an overwhelming response, this landmark event is the first in the history of independent India where someone has dared to protest and challenge RSS, right outside their gates.
During the protest, we had intended to peacefully go to the RSS office and hand them three gifts.
Firstly, a copy of the Constitution of India - to make RSS follow, respect and conduct their activities under the guidelines of the constitution.
Secondly, our national flag - to tell the RSS to start hoisting the national flag in all their offices and to stop the RSS from observing 15th August as a black day.
And lastly, the Maharashtra Public Trust Act - to help the RSS( an unregistered organisation) to register themselves under the Indian law.
However, before we could reach them, the RSS members fled, claiming the office was closed. In the end, Aurangabad’s DCP accepted the gifts on their behalf.
This once again proves that the RSS still harbors hatred toward the Indian Constitution and the national flag and does not believe in them.
Only the Ambedkarites have the power and more importantly the ‘political will’ to defeat the RSS. And we will do so whatever it takes ✊🏽
कल देश के इतिहास में पहली बार RSS के खिलाफ उसके दरवाजे के सामने मोर्चा निकाला गया। और यह मोर्चा फुले-शाहू-अंबेडकर की विचारधारा पर चलने वाली वंचित बहुजन आघाड़ी ने निकाला!
पूरे देश में RSS के खिलाफ हमारे जन आक्रोश मोर्चा की चर्चा हैं। हमने कल पूरे देश को बताया की हमारा देश फुले, शाहू और अंबेडकरवादी विचारधारा से चलेगा, मनुवाद से नहीं!
प्रशासन और पुलिस द्वारा हमें RSS के खिलाफ मोर्चा निकालने से रोकने के कई प्रयास किए गए लेकिन हम रुके नहीं। RSS के खिलाफ उसके दरवाजे के सामने मोर्चा निकलने की राजनीतिक हिम्मत बस और बस वंचित बहुजन आघाड़ी में हैं!
लेकिन मैं हर दूसरी पार्टी से पूछना चाहता हूँ — वंचित बहुजन आघाड़ी ने कल जो किया, वह आप इतने सालों में क्यों नहीं कर सके? यही सवाल वंचित बहुजन आघाडी का कार्यकर्ता अब हर दूसरी पार्टी से पूछेगा!
कल RSS ने हमारे हाथों से भारत का संविधान और तिरंगा लेने से इनकार कर दिया! मैं एक फिर दोहराता हूँ, हमारा देश फुले, शाहू और अंबेडकरवादी विचारधारा से चलेगा, मनुवाद से नहीं!
RSS मुर्दाबाद! मनुवाद मुर्दाबाद!
जय फुले। जय शाहू। जय भीम। जय संविधान। जय भारत।
भीमटे, चोर-चम*र, धेड, भंगी, सरकारी जवाई!
अगर ब्राह्मणवादियों और मनुवादियों को लगता है कि ये जातिवादी गालियां देके तुम हमें चुप करा लोगे तो मेरी बात ज़रा अच्छे से, ध्यान से सुन लो —
जब भी तुम दलितों के खिलाफ ज़हर उगलते है, तो हमें कमज़ोर नहीं कर रहे बल्कि खुद की जातिवादी मानसिकता को बेनकाब कर रहे हो।
तुम्हारे शब्दों से तुम्हारी ब्राह्मणवादी और मनुवादी की सड़ी हुई सोच साफ़ झलकती है। और हर बार जब तुम अपना मुंह खोलते हो, तुम हमें ये याद दिलाते हो कि फुले-शाहू-अंबेडकर का आंदोलन कितना ज़रूरी हैं!
तुम जब-जब हमें गालियाँ दोगे तब-तब हम जय भीम बोलेंगे!
तुम जब-जब हमें नीचा दिखाने की कोशिश करोगे तब-तब हम और शिक्षित होंगे, संगठित होंगे, और आंदोलन करेंगे — जैसे बाबासाहेब ने हमें सिखाया है।
तुम्हारी घृणा और गंदी गालियां हमें याद दिलाती हैं कि समानता अभी भी एक दूर का सपना है और यह हमारे आंदोलन का ईंधन है।
ब्राह्मणवादियों और मनुवादियों की नफ़रत अगर हमें मिल रही है, तो समझ लो की हम सही रास्ते पर हैं।
हम यहां तुम्हें अच्छा लगने के लिए नहीं आए हैं।
हम यहां जाति को खत्म करने आए हैं।
तो बोलते रहो, ज़हर उगलते रहो!
ये दुनिया को और साफ़ दिखा रहा है कि ये जातिवादी व्यवस्था कितनी घातक है, और इसे खत्म करना कितना जरूरी है। और ऐसी मानसिकता किसकी हैं और कौन इसको बढ़ावा दे रहा हैं।
जय भीम 💙
जय संविधान. जय भारत 💪🏻
यह चौंकाने वाला ही नहीं, बल्कि शर्मनाक भी है कि केंद्रीय मंत्री @RamdasAthawale ने यह कहकर जनता को गुमराह किया है कि महाबोधि महाविहार बौद्धों के नियंत्रण में है। रामदास आठवले ka बयान न केवल गलत है, बल्कि एक कड़वे सच को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश है। एक ऐसा सच जिसे हर जागरूक बौद्ध भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में जानता है — महाबोधि महाविहार बौद्ध समाज के नियंत्रण में नहीं है!
कई महीनों की चुप्पी के बाद उनका अचानक सामने आना और "मोर्चा निकालने" की खोखली अपील करना, राजनीतिक अवसरवाद की बू देता है, न कि किसी सच्चे संकल्प की।
और यह भी मत भूलिए की रामदास आठवले की पार्टी भाजपा के साथ केंद्र में गठबंधन में है। भाजपा ही वह पार्टी है जो केंद्र और बिहार दोनों में सत्ता में है। अगर सच्ची राजनीतिक इच्छाशक्ति होती, तो वह बौद्धों को नियंत्रण दे सकती थी। फिर सवाल उठता है की रामदास आठवले ने इस मुद्दे पर दिल्ली या पटना में भाजपा के खिलाफ कितनी बार मोर्चा निकला? कितनी बार उन्हें मोदी ने खिलाफ मोर्चा निकाला? जवाब स्पष्ट है — एक बार भी नहीं!
अगर यह मुद्दा वाकई रामदास आठवले के लिए मायने रखता है और अगर बौद्धों के लिए धार्मिक न्याय और सम्मान का मुद्दा एक राजनीतिक नौटंकी से बढ़कर है, तो उन्हें तुरंत मंत्रिपद से इस्तीफा देना चाहिए और भाजपा से गठबंधन तोड़ देना चाहिए। इसके अलावा किया गया कोई भी दावा सिर्फ पाखंड और दिखावा ही माना जाएगा।
रामदास आठवले ने अंबेडकरवादी आंदोलन की एकता को तोड़ते हुए अपनी अलग रिपब्लिकन पार्टी बना ली, आज हमें कह रहे हैं कि हम उनके पीछे मार्च करें। हम ऐसे नेताओं का अनुसरण नहीं करते जो पद के लिए सच्चाई से समझौता कर लें और सुविधा के लिए न्याय को कुर्बान कर दें।
महाबोधि महाविहार की मुक्ति की लड़ाई कोई फोटो खिंचवाने का मौका नहीं है, न ही कोई राजनीतिक सहारा। यह धार्मिक न्याय का मुद्दा है। और इस लड़ाई को ऐसे नेताओं की ज़रूरत है जिनमें ईमानदारी हो न कि ऐसे जो महीनों की नींद के बाद केवल नारे लगाने उठते हैं, वो भी भाजपा की गोद में बैठे हुए। और वो इमामदारी की लड़ाई वंचित बहुजन अघाड़ी लड़ रही है! प्रकाश अम्बेडकर, भीमराव अम्बेडकर, सुजात अम्बेडकर और वंचित बहुजन आघाड़ी के लाखों कार्यकर्ता लड़ रहे हैं!
.@RamdasAthawale भाजपचे मंत्री आहेत. महाबोधी महाविहार बौद्धांच्या ताब्यात आहे, असा अत्यंत खोटा दावा आणि भाजपची भाषा बोलत आहेत. गेल्या अनेक दशकांपासून महाबोधी ही ब्राह्मण्यवाद्यांच्या तावडीतून सोडवण्यासाठी लढे सुरू आहेत. आता जागे झालेले आठवले या आंदोलनाला डायव्हर्ट करण्यासाठी वेगळीची भाषा बोलताय.
उद्या महाबोधी मुक्ती आंदोलनासाठी काहींनी एकत्र येत मोर्चा काढताय, हे सर्व नाटकं आहेत, हे आता स्पष्ट झाले आहे. बोधगया येथे भिक्षूंना मारहाण झाली, जेलमध्ये डांबले गेले, तिथून त्यांना हाकलून लावले, तेव्हा हे मंत्री महोदय कुठे होते?
भारतीय बौद्ध महासभा लढत होती, तेव्हा हे तथाकथित बौद्ध म्हणवणारे पुढारी कुठे होते?
उद्या काँग्रेस, भाजप आणि काही छोटे गट ― भाजप विरोधात मोर्चा काढणार आहेत 😳😂
अरे, सुधरा रे!
#महाबोधी_मुक्ती_आंदोलन #Bodhgaya #BiharElections #Bihar
📍 नवी मुंबई
नवी मुंबई येथील डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संग्रहालयाला वंचित बहुजन आघाडीचे युवा नेते सुजात आंबेडकर यांनी भेट दिली.
संग्रहालयातील चित्रसाहित्य आणि ऐतिहासिक दस्तऐवज डिजिटल स्वरूपात सादर करण्यात आलेले आहेत त्याची सुजात आंबेडकरांनी पाहणी केली
#VBAForIndia
🌸 सत्यशोधक मैत्री संघ आयोजित — कान्हेरी महाराजा महाविहार बौद्ध विद्यापीठ (लेणी) अभ्यास दौरा, मुंबई🌸
जगप्रसिद्ध बौद्ध विद्यापीठ म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या “कान्हेरी लेणी” या ऐतिहासिक स्थळाचा अभ्यास दौरा दिनांक ५ ऑक्टोबर २०२५ रोजी संपन्न झाला.
जाति-आधारित अत्याचारों को केवल गाँवों की क्रूर वास्तविकता के रूप में देखा जाता था, जहाँ जाति व्यवस्था को खुलेआम और हिंसक तरीके से लागू किया जाता है। शहरों में जाति भेदभाव एक मूक मुखौटा पहनकर रहता है — ऑफिसों, अस्पतालों और सरकारी दफ़्तरों की चारदीवारी के भीतर छिपा हुआ।
लेकिन अब ऐसा नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश गवई पर हाल ही में हुआ हमला इस सच्चाई का कड़वा प्रमाण है कि जातिगत घृणा अब चार दिवारी से बाहर आ गई है। जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को भी जाति के आधार पर निशाना बनाया जा सकता है, तो दलित आईएएस अधिकारियों, डॉक्टरों और सरकारी अधिकारियों के लिए इसका क्या मतलब है?
अगली बारी आईएएस अधिकारियों, डॉक्टरों और सरकारी अधिकारियों की हो सकती है!
यह सिर्फ़ एक घटना नहीं है। यह एक संदेश है!
सर्वोच्च न्यायालयात सुनावणी दरम्यान सरन्यायाधीश भूषण गवई यांच्यावर बुट भिरकावाण्याचा प्रयत्न झाला.हा प्रयत्न करणारा व्यवसायाने वकील असून 'सनातनचा अपमान सहन करणार नाही'.असे तो ओरडत होता.
ह्यातून सरन्यायाधीश भूषण गवई यांनी बोध घेतला पाहिजे की, ह्या देशात उपवर्गीकरण करायला आणि क्रिमी लेअर लावायला त्यांनी जे निकष लावले ते किती तकलादू आहेत.ह्या देशात तुम्ही ज्या जातीत जन्माला आलात ती जर वर्ण व्यवस्थेत खाली असेल तर तुम्ही कितीही मोठ्या पदावर गेलात तरी तुमचे सामाजिक स्थान बदलत नाही.म्हणून डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ह्यांनी अस्पृश्यता, जातिभेद यांची मुळे कुठे आहेत आणि या सामाजिक व्याधींवर उपाय काय? याचा सर्वांगाने अभ्यास केला होता.ज्या समाजात पिढ्यानपिढ्या भेदभाव आणि वंचना सहन केली आहे, त्या समाजाला मुख्य प्रवाहात आणण्यासाठी आरक्षणा सारख्या उपाययोजनांची गरज आहे. म्हणून सामाजिक मागासलेपण हा आरक्षणाचा पाया ठरविला गेला आहे.
त्यामुळे आरक्षण वर्गीकरण आणि क्रिमी लेअर लागू करण्याचा निर्णय देणारे सरन्यायाधीश भूषण गवई यांना आता आपण कोण आहोत ह्याची आठवण झाली असावी असे वाटते....
राजेंद्र पातोडे