बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष @madanrrathore, आपने विश्व आदिवासी दिवस मनाने वालो को भेड़चाल कहकर घोर अपमानित किया है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित विश्व आदिवासी दिवस का संबंध भारत से नही है तो विश्व योग दिवस और विश्व महिला दिवस भी तो संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा घोषित किये हैं। फिर तो इनका संबंध भी भारत से नही होना चाहिए।
पूरे आदिवासी समाज व आदिवासी की कद्र करने वाले उस प्रत्येक व्यक्ति व संगठन को आपने भेड़चाल चलने वाला कहकर अपमानित किया है। उसका जवाब जरूर मिलेगा आपको।
#मदन_राठौड़_माफी_मांगो
जयपुर की कालवाड़ रोड़ पर थारा भाई जोगिंदर
सब माफ़ियाँ को नाश्ते में खाने वाले मंत्री के पीछे पड़े हुए है 😇
राजस्थान वाले इन्फ़्लुएंसर कौनसे बिल में ग़ुस्से हुए है
जो थारा भाई जोगिंदर को आवाज़ उठानी पड़ रही है 🙏
एक आरक्षण वाले दलित ने झंडे गाड़ दिए हैँ,
मेरिट वालों, पुष्पक विमान वालों कहाँ हो,
आओ जल्दी से चूड़ी तोड़ो, मांग का सिंदूर पोछकर रुदाली गाओ,
आओ जल्दी सब,
राजस्थान के डांगावास हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मेरी बात हुई। 11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 5 अगस्त को आए फैसले से वे बेहद आहत हैं। उनकी एक ही पीड़ा है यदि सभी 40 आरोपी बरी हो गए, तो फिर उनके 5 परिजनों सहित कुल 6 लोगों की हत्या किसने की?
वर्ष 2015 में राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास गांव में हुए इस जघन्य हत्याकांड में 5 दलितों सहित कुल 6 लोगों की नृशंस हत्या हुई, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब एससी-एसटी विशेष अदालत द्वारा सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी किए जाने से पीड़ित परिवार स्वयं को न्याय से वंचित महसूस कर रहा है।
यह केवल एक परिवार का मामला नहीं है। इस फैसले ने पूरे क्षेत्र, विशेषकर दलित समाज के लोगों के बीच असुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। लोगों के मन में यह सवाल है कि यदि इतनी बड़ी घटना में भी दोषियों की जवाबदेही तय नहीं हो पाती, तो पीड़ितों को न्याय कैसे मिलेगा और कानून के प्रति विश्वास कैसे कायम रहेगा?
डांगावास का फैसला उन पुराने जख्मों को फिर ताज़ा कर गया है, जो लक्ष्मणपुर बाथे जैसे नरसंहारों ने दलित समाज को दिए थे। वर्ष 1997 में बिहार के लक्ष्मणपुर बाथे में 58 दलितों का नरसंहार किया गया था, जिसमें 27 महिलाएं और 16 मासूम बच्चे भी शामिल थे। वर्षों बाद उस मामले में भी सभी आरोपी बरी हो गए। आज देश जानना चाहता है कि यदि सभी आरोपी निर्दोष हैं, तो इन निर्दोष लोगों की हत्या आखिर किसने की?
परिवार ने बताया है कि वे इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन न्याय की इस लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। हमें विश्वास है कि राजस्थान हाईकोर्ट में मामले के सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा होगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।
नागौर के डांगावास में वर्ष 2015 में हुई जघन्य सामूहिक हत्या की घटना आज भी पूरे राजस्थान को झकझोर देती है। इस हृदयविदारक घटना में 6 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी, जिनमें 5 दलित समाज से थे। इतने लंबे न्यायिक संघर्ष के बाद, लगभग 11 वर्ष बीत जाने पर सभी 40 आरोपियों का बरी हो जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
यदि सभी आरोपी निर्दोष हैं, तो आखिर उन 6 लोगों की हत्या किसने की? क्या इतने बड़े नरसंहार का कोई दोषी नहीं है? क्या पीड़ित परिवारों को कभी न्याय नहीं मिलेगा? ऐसे फैसले पीड़ित परिवारों के विश्वास को तोड़ते हैं और समाज में न्याय व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा करते हैं। यदि दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे और कानून का भय समाप्त होता जाएगा। यह किसी भी सभ्य और लोकतांत्रिक समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
मैं राजस्थान सरकार से मांग करती हूं कि इस मामले में तत्काल उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी अपील दायर की जाए, पूरे प्रकरण की गंभीरता से समीक्षा की जाए और दोषियों को कानून के अनुसार कठोर से कठोर सजा सुनिश्चित की जाए।
@RajCMO@RajGovOfficial
मेरे प्रभार क्षेत्र की दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी श्री घनश्याम सिंह जी की ऐतिहासिक विजय पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
यह जनादेश लोकतांत्रिक मूल्यों, जनविश्वास और कांग्रेस की जनहितकारी विचारधारा के प्रति जनता के अटूट विश्वास का प्रतीक है। यह जीत आदरणीय श्री राहुल गांधी जी के नेतृत्व, उनकी जनहितकारी सोच और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की जनता के बीच निरंतर सक्रिय उपस्थिति पर जनता द्वारा व्यक्त किए गए विश्वास का भी प्रमाण है। हम सभी कांग्रेसजनों ने धरातल पर रहकर जन-जन के बीच उनकी आवाज़ को मजबूती से उठाया और जनता ने उस विश्वास पर अपनी मुहर लगाई है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके नेतृत्व में दतिया विधानसभा क्षेत्र विकास, जनसेवा और प्रगति की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।
आपके सफल, जनकल्याणकारी एवं उज्ज्वल कार्यकाल के लिए पुनः हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।
@RahulGandhi@INCIndia@INCMP
Cockroach Janta Party की तर्ज़ पर एक और Instagram पर अकाउंट बना है।
CJP की तरह धरातल पर भी आयेंगे या सोशल मीडिया तक ही सीमित रहेगा।
पहले जातिवाद हटाओ फिर आरक्षण हटाओ तो हमारा पूरा साथ मिलेगा।
भाजपा राज में मनुवादियों द्वारा दलित और पिछड़े समाज के बच्चों को इस तरह घेर-घेर कर मारना योगी सरकार की नाकारा कानून-व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है!
यह सत्यम पंडित नाम का हरामखोर गुंडा सरकार की शह पर पिछड़े समाज के बच्चे को सिर्फ़ इसलिए बेरहमी से पीट रहा है, क्योंकि वह अपने हक और अधिकार के लिए जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करने जा रहा था!
अगर इस हरामखोर की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होती है, तो साफ़ समझ जाना चाहिए कि भाजपा सरकार ने इन मनुवादियों को खुलेआम छूट दे रखी है, ताकि ये दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को यूँ ही सरेआम घेरकर मारते रहें!
देशभर के आंदोलनकारियों के सूचनार्थ!
भाजपा और उनके संगी-साथियों के दुर्व्यवहार, दुर्वचनों और हिंसा को सब देख लें। इनका दुस्साहस देखिए कि अभी युवाओं को वचन दिए हुए चंद घंटे भी नहीं हुए हैं और ये भाजपाई अपने इतिहास को दोहराते हुए फिर से धोखा दे रहे हैं। भाजपा के ये संस्कारी नेताजी अपने शीर्ष नेतृत्व के दिये गये आश्वासन की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और वीडियो भी बना रहे हैं। अब क्या ये भी डबल इंजन की टकराहट के कारण हो रहा है।
तुरंत गिरफ़्तारी हो!
भाजपाई तो अपने वचन के भी सगे नहीं हैं।
भरोसे का विलोम भाजपा!
विनोद जाखड़ जी को भी धन्यवाद दीजिए, जिन्होंने पूरे भारत में पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ बुलंद करते हुए इस लड़ाई की शुरुआत की। देशभर के लगभग 45 शहरों में जाकर आंदोलन किए और छात्र हितों की इस लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया।
अंग्रेजी शिक्षिका नीतू मैम ने राघव चड्ढा पर तीखा बयान देते हुए कहा कि आज राघव चड्ढा जिंदा होते तो वह जरूर छात्रों के लिए आवाज उठाते, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा, भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।
#Bihar#India#RaghavChadha#NeetuMam#LawAdvisory
पहली बार किसी मंत्री के इस्तीफ़ा में मीडिया की भूमिका शून्य रही
कई बड़े चैनल धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा नहीं हो इस पक्ष में थे
लेकिन सोशल मीडिया 🪳 की क्रांति से मोदी सरकार हिल गयी 👊🙏