चाचा घर बैठो …दलाली के पैसों से मज़े करो। अब देश तुम जैसे दो कौड़ी के राजनीतिक विश्लेषक के टेड़े बाल को अच्छे से जान गया है।
रवीश कुमार बनने के लिए कलेजा चाहिए, और आपके पास तो सिर्फ एक बित्ते भर की एक जीभ है वो भी बीजेपी ऑफिस के फर्श चाटने में इस्तेमाल करते हो।
ऋचा जी आपको देखकर कोई पत्रकारिता में आया ??
स्टूडियो से जहर उगलने वाले ऐंकर के खिलाफ लोगों में गुस्सा है आप लोग इस बात को समझ नहीं पा रहे जिस दिन गोदीगिरी बंद कर देंगे ये लोग उसी दिन से गोदी मीडिया गो बैक के नारे लगाना बंद हो जायेंगे ।
BTW फील्ड रिपोर्टर्स पर हमलों को उकसाने वाले और जायज़ ठहराने वाले "वरिष्ठ" "निष्पक्ष" (स्वघोषित) पत्रकार खुद जंतर मंतर क्यों नहीं जा रहे? भीड़तंत्र से डर लगता है? लेकिन अपने से कई साल जूनियर रिपोर्टर्स के पिटने पर आनंद आ रहा है? शर्म कीजिए.. आप शायद कभी इन सबके आदर्श रहे होंगे.. आपको देखकर ये पत्रकारिता में आए होंगे..हालांकि तब इनको नहीं पता था कि आप किसकी गोदी में बैठे हैं! आज आप जिस भीड़ को उकसा रहें हैं उसी के बीच खुद भी तो जाइए न!!
पहले ज़मीर बेचने वाले लोगों की कमी थी , इसलिए बायकाट होता था ।अब पूरी मीडिया ही जमीर बेच दी इसलिए पूरे देश में गोदी मीडिया गो बैक के नारे लगते है अखिलेश जी #godimedia
मैंने पत्रकारिता में एकजुटता का वह दौर भी देखा है जब देश के किसी हिस्से में पत्रकारों पर हमला होने पर विरोध में सब साथ आ जाते थे। आशुतोष जी पर बीएसपी नेताओं के हमले के विरोध में प्रेस क्लब से नॉर्थ ब्लॉक तक मार्च किया गया था जिसमें प्रिंट और टीवी के उस समय के सारे दिग्गज संपादक शामिल थे। कुछ रिपोर्टर को एंट्री न मिलने पर सारे रिपोर्टर प्रेस कांफ्रेंस का बायकॉट कर देते थे। यह एकजुटता थी। अब वह दौर है जब पत्रकार ही भीड़ को पत्रकारों की लिचिंग के लिए उकसा रहे हैं।
It was such a peaceful movement, feel so sad that it had to take a violent turn. My heart goes out to the students and their families who were hurt. Paper leak is a very serious issue, and I am glad to know n see that the kids of our country have come together for a better educational system, and their parents supported them.
I truly appreciate the stand they have taken, showing dedication, sincerity, and keenness to study hard n make their future and a greater, educated India. This andolan, this protest, is the right way to go abt it, n the students have done this peacefully. So courageous and brave. Driven and motivated towards education, this generation will make India proud.
This issue is between the students and the educational system, it should not be hijacked politically, the credit should only go to the students of our country, and I am sure the government will also give them all the support n make it a stronger educational system. It’s a win-win situation. Hoping n praying for a positive decision. God bless all of you who wanna be educated.
Education should be the next trend and fashion, and should get trendier n more fashionable yr by yr, itna k bahar se log come to India to study and India becomes an educational hub.
देश की दुर्दशा लाली लिपस्टिक लगा कर स्टूडियो में बैठकर न्यूज पढ़ने वाले पत्रकारों ने की है,
लेकिन उसकी सजा हर चैनल के न्यूज रिपोर्टर को भुगतनी पड़ती है
क्या नाविका जैसे कई संपादकों का दायित्व नहीं कि वो अपने ग्राउंड रिपोर्टर्स की सुरक्षा का ध्यान रखें।
सैलरी इनकी ज़्यादा , पॉप्यूलैरिटी भी इनकी ज़्यादा, मंत्री संत्री प्रधानमंत्री सब इनके फ़ंक्शन में आएँ, तो ज़िम्मेदारी इनकी ज़्यादा क्यों नहीं ?
अपने बेक़सूर ग्राउंड रिपोर्टर्स को ऑफ़िस में काम दें, खुद फ़ील्ड में जाएँ । एक अच्छी टीम लीडर की यही निशानी होती है
अखिलेश जी गोदी शब्द फील्ड रिपोर्टर के लिए नहीं है , जो लोग स्टूडियो में बैठ के जहर उगल रहे हैं,प्रदर्शन को पाकिस्तान से जोड़ रहे है उनके लिए हैं । स्टूडियो से जहर उगलना लोग बंद कर देंगे उसी दिन से आप लोग गोदी मीडिया के कैटेगरी से बाहर आ जाएंगे @akhileshanandd
रवीश जी ! बतौर पत्रकार मैं आपकी इज़्ज़त करता हूँ लेकिन हर पत्रकार को आपके गढ़े शब्द की वजह से बेइज़्ज़त होना पड़ रहा है. आज भी ज़्यादातर पत्रकार ना तीन में हैं, ना तेरह में. उन्हें कहीं से लिफाफा नहीं मिलता. नौकरी करते हैं, सैलरी आती है..घर चलता है. नौकरी से निकाल दिए जाते हैं. घर बैठ जाते हैं लेकिन ये जो पत्रकारों की मॉब लिंचिंग शुरू हो गई है वो बहुत खतरनाक है. जंतर मंतर पर महिला जर्नलिस्ट के साथ दुर्व्यवहार हुआ. उनकी लिंचिंग हुई. कुछ साथियों ने बताया उन पर थूका गया. क्या आपको ये सही लगता है? भीड़ कैसे ईमानदारी और बेईमानी का सर्टिफिकेट देकर मारपीट कर सकती है ? जब किसी के सामने माइक आए तो उसका अधिकार है मना कर सकता है या उसके मुताबिक जो ग़लत हैं उनका नाम लेकर उन्हें दलाल बोल दे लेकिन सभी को एक तराजू में तौल देना आपको जायज़ लगता है ? ये किसी को नहीं भूलना चाहिए कि जो आपको माइक थामे फील्ड में दिख रहा है वो नौकरी भी कर रहा है. मॉब लिंचिंग उतना ही खतरनाक है जितना किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिसिया लाठी
ये व्यक्ति पत्रकारों के खिलाफ भीड़ को “लिचिंग” के लिये भड़का रहा है.
एक पॉलिटिकल पार्टी की राजनीतिक यात्रा में हिस्सा लेकर अपनी पत्रकारिता बेच देने वाला शख़्स पत्रकारिता सिखाने में लगा हुआ है.
तुमसे बड़ा लोकतंत्र का हत्यारा कौन होगा? तुम्हारे बोए जहर से तैयार हुई भीड़ ने तुम्हारे साथ काम किए संवाददाताओं को भी नहीं बख्शा। नाम इसलिए नहीं लिख रहा कि, उसकी पीड़ा बताना है, उसे पीड़ित नहीं दिखाना। असली गोदी मीडिया तुम्हारे जैसे लोग हैं जो सारी जिंदगी गोदी में ही बैठे रहे और गोदी से उतार दिए जाने पर रोने लगे। जरा सा भी शर्म आ रही हो तो अलग-अलग चैनलों के उन रिपोर्टरों से बात करो जिनके साथ भीड़ ने गंदा व्यवहार किया है। शर्म आए तो उनसे माफी मांगो और खुद को पत्रकार कहना बंद कर दो।
तुमसे बड़ा लोकतंत्र का हत्यारा कौन होगा? तुम्हारे बोए जहर से तैयार हुई भीड़ ने तुम्हारे साथ काम किए संवाददाताओं को भी नहीं बख्शा। नाम इसलिए नहीं लिख रहा कि, उसकी पीड़ा बताना है, उसे पीड़ित नहीं दिखाना। असली गोदी मीडिया तुम्हारे जैसे लोग हैं जो सारी जिंदगी गोदी में ही बैठे रहे और गोदी से उतार दिए जाने पर रोने लगे। जरा सा भी शर्म आ रही हो तो अलग-अलग चैनलों के उन रिपोर्टरों से बात करो जिनके साथ भीड़ ने गंदा व्यवहार किया है। शर्म आए तो उनसे माफी मांगो और खुद को पत्रकार कहना बंद कर दो।
बदरपुर के सूर्यांश नाम के इस लड़के का अगर कोई पता या नंबर बता सके तो मेहरबानी होगी . मुझे DM करें . पुलिस ने इस बच्चे को पीटा भी था और इसका फ़ोन तोड़ दिया था . कुछ लोग मुझे मैसेज कर रहे हैं कि इस बच्चे को फ़ोन देना चाहते हैं . प्लीज़ , बदरपुर के रहने वाले , मेरी मदद करें .
This is the new cannon fodder for the BJP IT CELL. The video is being circulated as the ideal student. I disagree. We are humans, not robots; this boy who is academically brilliant is being used by the crooks who run the system. If there were five more leaks in NEET, Bansal ji would have still said the same. I will not protest but prepare again. Maybe after ten leaks he would protest. Everyone has a different threshold. So, try something better.
BJP's paid PR campaign has started.
First, NDTV interviewed the 'NEET topper' where the kid said he'd rather study than join the protest.
Now PR agencies are approaching influencers to make videos praising the govt and opposing the protest.
Have known Dev since our college days. He is truly a gem of a person- calm, composed, and not easily provoked. While I understand the frustrations with the media house he works for, there is no justification whatsoever for attempting to mob-lynch a journalist. An unruly crowd will only damage the credibility of the movement. @Cockroachisback@abhijeet_dipke