जिन ब्राह्मणों का सारे भारत देश की संस्थानों में कब्जा है उनको डर है...
कोई विदेशी किसी देश में जाकर निवास कर सकता है वहां की सत्ता पर कब्जा करके नहीं रह सकता है
#DNA_RAKHIGARHI
@KKacchavaha@Profdilipmandal आपसे कुछ शब्द छीन लिये जायें जैसे- हिन्दु-मुस्लिम.. आतंकवाद.. पाकिस्तान तो आप किसी से भी तर्क नहीं कर पायेंगें .. आप इस देश के नागरिक है .. उतने ही मुस्लिम भी .
ना ही हिन्दु खतरे में है और ना ही मुसलमान खतरे में .. दरअसल लोगों में बढ़ती शैक्षिक जागरूकता से इनकी सत्ता को खतरा है
देश में ऐसा ही "अमृत काल" चल रहा है।
#कहां_मर_गये .... देश में जातिवाद और भेदभाव अपने चरम पर है .... यहां के निवासियों से कैसा व्यवहार किया जा रहा हे .... और कुछ मानसिक गुलाम इसे डिफेंड कर रहे हैं ....
बुद्ध मुर्ति को विकृत कर अलग अलग देवी देवता के नाम से संपूर्ण भारत में पुजा जा रहा है | इन सभी देवी देवताओं की मुर्तियां बौद्ध मुर्तियाँ है| इसी तरह, खुद को हिंदू कहनेवाले सभी लोग प्राचीन बौद्ध है|
#पोल_खोल_अभियान
@KKacchavaha •-‘अयोध्या’
यहीं नही अपितु राम की कथित ‘अयोध्या’ भी दो हजार
वर्ष पूर्व अस्तित्व में नहीं थी।आज जिसे अयोध्या कहते है
उसे पहले ‘साकेत’ कहा जाता था ।
‘मौर्यकाल’ के बाद ‘शुंगकाल’ में ही “साकेत” का नाम
अयोध्या रखा गया।
’साकेत’ का ही नाम बदलकर ‘अयोध्या’
रखा गया।
@KKacchavaha *द्वितीय- भारत और ‘श्रीलंका’ के बीच में “कोरल्स” की
चट्टानें है उन्हें पत्थर नहीं कहा जा सकता है । इन ‘कोरल्स’
की संरचना ‘मधुमक्खियों’ के छत्ते के समान होती है, जिनमे
बारीक़ रिक्त स्थान होते है।
अतः किसी भी हल्की वस्तु का आयतन, पानी के घनत्व के
कम होने पर वह तैरने लगती है !!!
@KKacchavaha हालांकि तब भी श्रीलंकावासी स्वयं इस तथ्य से अनभिज्ञ
ही थे ।
‘रामायण’ में जिस ‘लंका’ का उल्लेख किया गया है वह
प्राचीन भारत का कोई ग्रामीण क्षेत्र था जो लंबे-चौड़े
नदी-नालों से आमजन से कटा हुआ था ।कई इतिहारकारों के
अनुसार यह स्थल ‘दक्षिण-भारत’ का ही कोई क्षेत्र था ।
@KKacchavaha क्योंकि स्वयं
‘लंकावासियों’ को भी राम, रामायण, और रावण का कोई
अता-पता नही था।
तीसरी सदी ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक के पुत्र महेन्द्र
के यहां आने पर ‘बौद्ध धर्म’ का आगमन हुआ।
मगर भारत के ‘चोल’ शासकों का ध्यान जब इस द्वीप पर
गया तो वे इसका संबंध रावण की लंका से जोड़ने लगे ।
@KKacchavaha आप इंटरनेट पर ‘श्रीलंका’ का इतिहास पढ़ सकते हैं । लंका से
पहले यह देश ‘सीलोंन’ नाम से जाना जाता था ।
‘सीलोंन’ से पूर्व इसे ‘सिंहलद्वीप’ कहा जाता था । इससे भी
पूर्व यह दीपवंशा, कुलावंशा, राजावेलिया इत्यादि नामों
से जाना जाता था।मगर ‘लंका’ कभी नही,
@KKacchavaha 1972 से पूर्व ‘श्रीलंका’ नाम से
संसार में भी कोई देश नही था ।
भारत के दक्षिण में स्थित इस देश की दूरी भारत से मात्र 31
किलोमीटर है। 1972 तक इसका नाम सीलोन
(अंग्रेजी:Ceylon) था, जिसे 1972 में बदलकर लंका तथा 1978
में इसके आगे सम्मानसूचक शब्द “श्री” जोड़कर श्रीलंका कर
दिया गया।
@KKacchavaha •-‘श्रीलंका’
नाम के आधार पर ‘श्रीलंका’ को ‘रावण’
की लंका मानते हैं और वहाँ स्थित प्राचीन बौद्ध-स्थलों
को भी रावण की राजधानी से जोड़ रहै हैं। पर शोधकर्ता
इससे सहमत नहीं हैं।
उस देश का नाम भी ‘श्रीलंका’ नही था! आप ‘श्रीलंका’
का इतिहास पढ़ सकते हैं।