जहाँ कहीं भी पाओ कि
जो रास्ता तुम चुन रहे हो
वह रास्ता तुमको और आश्रित बना देगा;
तो बचो!
और अगर कोई ऐसा रास्ता है
जिसपर चल करके तुम्हारे बंधन टूटेंगे,
तुम्हारी निर्भरताएँ धीरे-धीरे कम होती जाएँगी,
तुम स्वावलंबी होते जाओगे,
तुम निरालंबी होते जाओगे,
तो उस रास्ते पर आगे बढ़ जाओ।