आरक्षण विरोधियों किया चनौती देते हुए नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद कहते है
आरक्षण क्या जाति के आधार पर ही मिलता है? आरक्षण क्षेत्र के आधार पर भी मिलता है। आप जाकर देखो जम्मू-कश्मीर में, आरक्षण क्षेत्र के आधार पर मिलता है। आप जाकर देखो हिमाचल में, आरक्षण क्षेत्र के आधार पर मिलता है। आप जाकर देखो उत्तराखंड में, आरक्षण क्षेत्र के आधार पर मिलता है। कौन कहता है जाति के आधार पर मिलता है?
आरक्षण उनको मिलता है जो पीछे रह गए हैं, जिनका प्रतिनिधित्व कम है। और इस देश का... मैं गारंटी से कहता हूँ, कास्ट सेंसेस करा के आप लोग डेटा उठा के लाइए, आइए डिबेट कीजिए और बताइए आपकी संख्या कम है, मैं गारंटी देता हूँ।
मैं चंद्रशेखर आजाद, जो लोकसभा का सदस्य है, और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ता में वचन देकर कहता हूँ—अगर किसी भी विभाग में आपका आरक्षण कम हुआ, चाहे वो विधानसभा हो, या लोकसभा हो, या कोई भी विभाग हो, अगर आपका आरक्षण आपका प्रतिनिधित्व कम हुआ, मैं वचन देकर कहता हूँ कि दलित-पिछड़ों की लड़ाई को पीछे छोड़ के पहले आपकी लड़ाई लड़ने का काम करेंगे, इस बात का मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ।
मैं संविधान को मानने वाला व्यक्ति हूँ, न्यायप्रिय व्यक्ति हूँ, इसलिए आपसे कह रहा हूँ... सच बोलना पड़ेगा।
इस देश में अगर आरक्षण आया सबसे पहले, तो 1902 में आया, जिसे छत्रपति शाहूजी महाराज ने लागू किया। किसी और ने लागू नहीं किया। कुर्मी वंश के छत्रपति शाहूजी महाराज ने लागू किया। उससे पहले तमाम न्यायप्रिय लोगों के पास था अवसर, उन्होंने लागू नहीं किया।
इस देश में अगर वोटिंग राइट मिला, इस देश के बहुसंख्यक लोगों को, बालिग लोगों को, वयस्क मताधिकार मिला, सार्वभौमिक मताधिकार मिला, इसका श्रेय अगर किसी को जाता है, तो वो बाबा साहब अंबेडकर को जाता है। आपको इतिहास पढ़ना चाहिए। 1919 से पहले इस देश में बहुत कम परसेंट लोग वोट करते थे। मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार समिति बनी, और सुधार समिति ने नए पैमाने तय किए कि वोट देने का अधिकार उनको मिले जो जमींदार हैं, जो भूमि जिनके पास बड़ी संख्या में है, जो लगान देते हैं, जो टैक्स देते हैं, जो बहुत पढ़े-लिखे हैं, जो पूँजीपति हैं, जिन पर व्यापार है...
आप इतिहास उठाकर देखो, जिनको न आँख थी, या जिनको अपने अधिकारों का पता ही संविधान के आने के बाद लगा है, उनकी संख्या कितनी रही होगी—आप इस बात को महसूस करके देख लीजिए।
तो इसलिए मैं कह रहा हूँ कि कुछ भी माँगने से नहीं मिला है भारत..."
@BhimArmyChief
जंतर-मंतर से शुरू हुई शिक्षा के अधिकार की लड़ाई को सड़क पर लड़ने में सभी नेताओं में सबसे अग्रणी @BhimArmyChief जी रहे थे अब इस लड़ाई को संसद के भीतर लड़ने का काम भी माननीय चंद्रशेखर आजाद जी कर रहे हैं वह भी अकेले।
#संसद_मार्च#jantar_mantar
@askrajeshsahu दशरथ >कौशल्या, कैकयी, सुमित्रा।
और भी हिंदू राजाओं के एक से अधिक रानियां हुआ करती थीं।
वर्तमान में सब वोट बैंक की राजनीति है इसके अलावा कुछ भी नहीं।
अन्य जगहों पर बारिश हो रही लेकिन लखनऊ में अभी भी प्रचंड गर्मी है। गर्मी के साथ उमस। दोपहर में 41 डिग्री का तापमान 45 का लगता है।
तमाम लोग इतनी गर्मी में सड़कों के किनारे अपना काम करते नजर आते हैं।
@dhruv_rathee OBC नेता DHARMENDRA PRADHAN ही अकेले क्यों ?
क्या देश की आर्थिक हालात ठीक है. निर्मला सीतारमण का इस्तीफ़ा मांगो. GERMANY बैठा हुआ जर्मन शेफर्ड को नायक केवल सवर्ण नेताओं में नजर आता है. लेकिन RJD SP और JMM के समर्थक इतने अंधे हैं कि इस जर्मन शेफर्ड को पहचान नही पाते.
परम प्रतापी योद्धा, अद्भुत साहस, दूरदर्शी रणनीति और जनकल्याणकारी शासन के प्रतीक, बहुजन प्रतिपालक राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के संबंध में यह कहना कि वे युद्धों से थककर अपना मुकुट किसी और को सौंपना चाहते थे, न केवल ऐतिहासिक रूप से असत्य है, बल्कि उनके अदम्य साहस और स्वाभिमान का घोर अपमान भी है।
प्रधानमंत्री @narendramodi जी के ‘मुँहबोले छोटे भाई’ धीरेन्द्र द्वारा नागपुर में ऐसे मंच से, जहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में इस प्रकार का बयान दिया जाना, भाजपा-आरएसएस की उसी सोच का परिणाम है, जहाँ बहुजन नायकों के योगदान को कमतर दिखाने, उनके संघर्ष को कमजोर करने और उनके व्यक्तित्व को विकृत करने की कोशिश लगातार की जाती रही है।
इतिहास साक्षी है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी।उनका जीवन त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की सर्वोच्च मिसाल है-न कि थककर पीछे हट जाने की कहानी।
ऐसे भ्रामक और असत्य बयानों के माध्यम से न केवल समाज को गुमराह किया जा रहा है, बल्कि नई पीढ़ी के सामने इतिहास की विकृत तस्वीर प्रस्तुत की जा रही है। यह सीधे-सीधे हमारे महापुरुषों के गौरव को ठेस पहुँचाने का प्रयास है।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि बहुजन समाज अपने महापुरुषों के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। इस बयान के लिए धीरेंद्र पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, स्वाभिमान और बहुजन अस्मिता के जीवंत प्रतीक हैं। उनके गौरव को ठेस पहुँचाने वाली किसी भी सोच और साजिश को देश का जागरूक समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
बड़गाँव,गुजरात से विधायक ,क्रांतिकारी नेता बडे भाई श्री जिग्नेश मेवाणी जी से विडियो कॉल पर बात कर आगामी 28 फरवरी 2026 को आयोजित होने वाली “संकल्प सभा” कार्यक्रम के लिए सादर आमंत्रित किया।
@jigneshmevani80@kanhaiyakumar@anshultrivedi47