ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सोशल मीडिया पर एकदम से सैकड़ों हैंडल्स प्रधानमंत्री की छवि बिगाड़ने में जुट गए हैं, कम्युनिटी नोट लगाने लगे हैं।
दरअसल 11 वर्षों तक सत्ता, लाइमलाइट के सिरमौर बने रहने के बावजूद जब आपका ही भूतपूर्व समर्थक....
नए उद्घाटन हुए ब्रिज पर अकेले वॉक करते हुए, रोड पर फोटोशूट करवाते हुए, दिन में 5 बार कपड़े बदलते हुए, कैमेरा के प्रति अजीब सी लोलुपता प्रदर्शित करते हुए,
AI Summit में रीलबाजी के लिए सबको किनारे हटाकर हाथ हिलाते हुए, योगी को पैदल चलाते हुए, हर भाजपाई नेता के ट्वीट की शुरुआत "आदरणीय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में" जैसे शब्दों के साथ देखता है...
तो एक खीज, उबाऊपन और मद्धिम क्रोध आना स्वाभाविक है। ऐसा नहीं है कि वह आपको देखना नहीं चाहता परंतु जिस प्रकार पार्टी में अन्य नेताओं को संपूर्ण रूप से ठिकाने लगाकर प्रधानमंत्री की ब्रांडिंग को उसके गले तक कोंच-कोंच के ठूँसा जा रहा है, उससे वह विक्षुब्ध हो चुका है।
ब्रांड मोदी की ओवरसेलिंग हो चुकी है और भाजपा आज चुनाव जीत रही है तो वह बेहतर फंडिंग, घटिया विपक्ष, संगठन शक्ति और चुनावी मैनेजमेंट के बलबूते हो रहा है ना कि 2014-19 वाले दौर के मोदी की छवि की बदौलत जहाँ मोदी का नाम ही वोटर को खींच लाता था।
एक थकान, एक नैराश्य का वातावरण अब स्प्ष्ट तौर पर दिखता है जहाँ भाजपा के ही समर्थक खुलकर कहने से नहीं चूकते कि इन्हें अब राष्ट्रपति बना दो और योगी को तुरंत केंद्र में लाया जाए।
मोदी से अंदरूनी तौर पर थका हुआ ये वर्ग अब फ्रेश फेस, एनर्जी और थोड़ी हार्डलाइनर पॉलिटिक्स की उम्मीद में बैठा है और गवर्नेंस के आइडियाज के अभाव में यह भावना प्रबल से प्रबलतम होती जाएगी, इसमें कोई संशय नहीं।
इस डेफिसिट, इस असंतोष को आप निशिकांत दुबे, अनुराग ठाकुर और गिरिराज जैसे लोगों के ट्वीट्स से, पुराने टैक्टिक्स वाली आईटी सेल से नहीं भर सकते.... यह लोकतंत्र है तो परिलक्षित होकर रहेगा।
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अधिकतर घरों में बच्चे यह दो प्रश्न अवश्य पूछते हैं जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाई जाती है तो दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों होता है? राम और सीता की पूजा क्यों नही?
सभी से निवेदन है कि अपने घरों में full volume में swasti-vachan का मंत्र daily एक बार चलाएं।
ईसमें सारे देवताओं की उपासना सभी बुरे ग्रहों का शमन एवं सभी के लिए 100 वर्षों के दीर्घायु होने का आशीर्वाद है।
इसको तेज बॉल्यूम पर पूरे घर में चलाएं और सभी को यह मैसेज अग्रेषित करें अथर्ववेद में, इस श्लोक या मंत्र का उपयोग प्राचीन काल में खराब वायरस - रोगाणुओं या किसी संक्रामक रोगों को मिटाने के लिए किया जाता था। इस मंत्र को अपने घर में दिन में कम से कम एक बार लगाएं।
अपने रिश्तेदारों को भी बताएं। इसमें केवल तीन मिनट और पच्चीस सेकंड लगते हैं। लेकिन प्रभाव लंबे समय तक रहता है।
हर हर महादेव जय श्रीराम ✨🚩
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इजरायल की सेना आज एक कस्बे में गई तब वहां 40 बच्चों की लाश मिली जिनमें गर्दन काट दिए गए थे 20 महिलाओं की लाश मिली जिनके साथ बलात्कार करके मारा गया था
हमास जैसों का जो जो समर्थन कर रहे है उन्हें पहचानों वो तुम्हारे क़तई नहीं हो सकते
हमास ने जो इजराइल में किया उसकी धमकी भारत के मुसलमान हिंदुओं को बार-बार दे रहे हैं की इनसे सतर्क रहना पड़ेगा !
हिंदुओं को अपना जाति भूलना पड़ेगा एक होना पड़ेगा, याद रखना संविधान में तुम पिछड़ा ,दलित,सवर्ण आदिवासी हो सकते हो
लेकिन उनकी किताब में तुम सिर्फ काफिर हो….
#IsraelFightsBack
सवर्णों में एक जाति आती है ब्राह्मण जिस पर सदियों से राक्षस, यवन, मुगल, अंग्रेज, कांग्रेस, सपा, बसपा, वामपंथी, भाजपा, सभी राजनीतिक पार्टियाँ, विभिन्न जातियाँ आक्रमण करते आ रहे है!
आरोप ये लगे कि ब्राह्मणों ने जाति का बटवारा किया
उत्तर: सबसे प्राचीन ग्रंथ वेद जो अपौरुषेय जिसका संकलन वेदव्यास जी ने किया, जो ब्राह्मण नहीं थें
१८-पुराण, महाभारत, गीता सब व्यास विरचित है जिसमें वर्णव्यवस्था और जाति व्यवस्था दी गई है, रचनाकार व्यास ब्राह्मण जाति से नही थे
ऐसे ही कालीदास या कई कवि जो वर्णव्यवस्था और जाति-व्यवस्था के पक्षधर थे पर जन्मजात ब्राह्मण नहीं थे
मेरा प्रश्न:- कोई एक भी ग्रन्थ का नाम बतलाइए जिसमें जातिव्यवस्था लिखी गई हो और ब्राह्मण ने लिखा हो?
शायद एक भी नही मिलेगा, मुझे पता है आप मनुस्मृति का ही नाम लेंगे, जिसके लेखक मनु महाराज थे, जो कि क्षत्रिय थे, मनु स्मृति जिसे आपने कभी पढ़ा ही नहीं और पढ़ा भी तो टुकड़ों में! कुछ श्लोकों को जिसके कहने का प्रयोजन कुछ अन्य होता है और हम समझते अपने विचारानुसार है
अब रही बात कि ब्राह्मणों ने क्या किया? तो सुनें! यंत्रसर्वस्वम् (इंजीनियरिंग का ग्रन्थ) भारद्वाज
वैमानिक शास्त्रम् (विमान बनाने हेतु) भारद्वाज
सुश्रुतसंहिता (सर्जरी चिकित्सा)- सुश्रुत
चरकसंहिता (चिकित्सा) चरक
अर्थशास्त्र (जिसमें सैन्यविज्ञान, राजनीति, युद्धनीति, दण्डविधान, कानून आदि कई महत्वपूर्ण विषय हैं) कौटिल्य
आर्यभटीयम् (गणित) आर्यभट्ट
ऐसे ही छन्दशास्त्र, नाट्यशास्त्र, शब्दानुशासन, परमाणुवाद, खगोल विज्ञान, योगविज्ञान सहित प्रकृति और मानव कल्याणार्थ समस्त विद्याओं का संचय अनुसंधान एवं प्रयोग हेतु ब्राह्मणों ने अपना पूरा जीवन भयानक जंगलों में, घोर दरिद्रता में बिताए!
उसके पास दुनियाँ के प्रपंच हेतु समय ही कहां शेष था? कोई बताएगा समस्त विद्याओं में प्रवीण होते हुए भी, सर्वशक्तिमान् होते हुए भी ब्राह्मण ने पृथ्वी का भोग करने हेतु गद्दी स्वीकारा हो?
विदेशी मानसिकता से ग्रसित वामपंथियों ने कुचक्र रचकर गलत तथ्य पेश किया, आजादी के बाद इतिहास संरचना इनके हाथों सौपी गई और ये विदेश संचालित षड़यन्त्रों के तहत देश में जहर बोने लगे
ब्राह्मण हमेशा से यही चाहता रहा है कि हमारा राष्ट्र शक्तिशाली हो अखण्ड हो, न्याय व्यवस्स्था सुदृढ़ हो
सर्वे भवन्तु सुखिन:सर्वे सन्तु निरामया: सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दु:ख भाग्भवेत्.. का मन्त्र देने वाला ब्राह्मण, वसुधैव कुटुम्बकम् का पालन करने वाला ब्राह्मण सर्वदा काँधे पर जनेऊ कमर में लंगोटी बाँधे एक गठरी में लेखनी, मसि, पत्ते, कागज, और पुस्तक लिए चरैवेति-चरैवेति का अनुशरण करता रहा, मन में एक ही भाव था लोक कल्याण!
ऐसा नहीं कि लोक कल्याण हेतु मात्र ब्राह्मणों ने ही काम किया, बहुत सारे ऋषि, मुनि, विद्वान्, महापुरुष अन्य वर्णों के भी हुए जिनका महत् योगदान रहा है, किन्तु आज ब्राह्मण के विषय में ही इसलिए कह रहा हूँ कि जिस देश की शक्ति के संचार में ब्राह्मणों के त्याग तपस्या का इतना बड़ा योगदान रहा!
जिसने मुगलों, यवनों, अंग्रेजों और राक्षसी प्रवृत्ति के लोंगों का भयानक अत्याचार सहकर भी यहां की संस्कृति और ज्ञान को बचाए रखा, वेदों, शास्त्रों को जब जलाया जा रहा था तब ब्राह्मणों ने पूरा का पूरा वेद और शास्त्र कण्ठस्थ करके बचा लिया और आज भी वे इसे नई पीढ़ी में संचारित कर रहे हैं वे सामान्य कैसे हो सकते हैं?
👉 ब्राह्मण अपनी रोजी रोटी कैसे चलाए?
पढ़ाई के लिए सबसे ज्यादा फीस
काम्प्टीशन के लिए सबसे ज्यादा फीस
नौकरी मांगने के लिए लिए सबसे ज्यादा फीस
सरकारी सारी सुविधाएँ OBC, SC, ST, अल्पसंख्यक के नाम पर पूँजीपति या गरीब के नाम पर अयोग्य लोंगों को दी जाती हैं, इस देश में गरीबी से नहीं जातियों से लड़ा जाता है
जिसने शिक्षा को बचाने के लिए सर्वस्व त्याग दिया उसके साथ इतनी भयानक ईर्ष्या क्यों?
मैं ब्राह्मण हूँ अत: मुझे किसी जाति विशेष से द्वेष नही है, मैने शास्त्रों को जीने का प्रयास किया है, अत: जातिगत छुआछूत को पाप मानता हूँ
गलत तथ्यों के आधार पर हमें क्यों सताया जा रहा है? हमारे धर्म के प्रतीक शिखा और यज्ञोपवीत, वेश भूषा का मजाक क्यों बनाया जा रहा हैं?
हमारे मन्त्रों और पूजा पद्धति का उपहास होता है और आप सहन कैसे करते हैं? विश्व की सबसे समृद्ध और एकमात्र वैज्ञानिक भाषा संस्कृत को हम भारतीय हेय दृष्टि से क्यों देखते हैं
👉 हमें पता है आप कुतर्क करेंगें, आजादी के बाद भी 75 साल से अत्याचार होता रहा है, हमारा हक मारकर खैरात में बाँट दिया गया, किसी सरकार ने हमारा सहयोग तो नही किया किन्तु बढ़चढ़ के दबाने का प्रयास जरूर किया फिर भी हम जिन्दा है और जिन्दा रहेंगे!
#BrahminsUnderAttack
@TheSnehal1@myogiadityanath अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण... अगर कार्यवाही नहीं हुई तो क्या कुछ लोगों द्वारा समाज को बाँटने की जो कोशिश हो रही है उसे भाजपा सरकार का मौन समर्थन माना जाये?