रेलवे में खुली लूट चल रही है… तत्काल में टिकट बुक किया… पेमेंट कट गया और ऐप घूमता रहा… थोड़ी देर बाद 1 वेटिंग हो गई
ज़ाहिर है टिकट कंफर्म नहीं होना था… चार्ट बनने के बाद टिकट कैंसिल हुआ और रिफंड का मैसेज आया
रिफंड में 153 रुपये काट लिए हैं… ऐसा हर दिन करोड़ों लोगों के साथ होता होगा… आखिर यात्री की क्या गलती है इसमें
ब्रह्मांड का सबसे घटिया ऐप भी रेलवे का ही है…
@RailMinIndia@AshwiniVaishnaw@RailwaySeva@IRCTCofficial
जनसंख्या बढ़ रही है तो महंगाई तो बढ़ेगी ही।😀
पूर्व भाजपा सांसद दिनेश लाल यादव से जब पत्रकारों ने बढ़ते हुए चीनी के दाम के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि जनसंख्या बढ़ रही है तो महंगाई तो बढ़ेगी ही।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि संसाधन उतने ही हैं और जनसंख्या लगातार बढ़ रही है जिसकी वजह से महंगाई बढ़ रही है।
दिनेश लाल यादव से कोई पूछो कि अभी 10 दिन पहले जो चीनी 45 रुपए किलो मिल रही थी अभी वह 65 रुपए मिल रही है।
मात्र 10 दिन में कौन सा जनसंख्या विस्फोट हो गया?चाटुकारिता की भी हद होती है।
इन विद्यालयों को समीप के किसी विद्यालय में मर्ज कर दिया गया होगा।
इस तरह से तो up में बहुत से विद्यालय जहां बच्चों की संख्या कम थी पिछले वर्ष पास के अन्य विद्यालय में मर्ज किए जा चुके हैं । ग़लत जानकारी से सनसनी मत फैलाइए।
विद्यालय में शिक्षा और व्यवस्थाओं की परखी गई गुणवत्ता
उच्च प्राथमिक विद्यालय कन्या सिवाया, विकास क्षेत्र दौराला, मेरठ में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्रीमती आशा चौधरी ने विद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सत्र परीक्षा की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और विद्यार्थियों से संवाद किया।
बेसिक शिक्षा विभाग विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, विद्यार्थियों के पोषण और बेहतर शैक्षिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
निरीक्षण के दौरान व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
#SchoolEducation #SamagraShiksha #BasicEducationUP #BasicShikshaUP
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी के नेतृत्व में परिषदीय विद्यालयों में 19 प्रमुख मानकों पर आधारभूत सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण कर बच्चों के लिए बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक शिक्षण वातावरण तैयार किया जा रहा है।
#लखीमपुर_खीरी बाकेगंज ब्लॉक के बोझिया गांव में स्थित सरकारी विद्यालय का मामला,,,,,,
ध्यान से देखिए, अपने स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालय के शिक्षक अपनी जान की परवाह किए बगैर एक ज़हरीले सांप का कैसे रेस्क्यू कर रहे हैं,,,,,
शिक्षकों से अनुरोध है अपनी सेफ्टी का भी ध्यान रखें,,,,,
स्कूल ठीक करो या राजनीति चमकाओ. CJP के नेता 15 अगस्त से स्कूल ठीक करो कैंपेन के नाम पर अलग-अलग स्कूलों में जाकर छापेमारी कर रहे हैं. यहां पर सवाल कई सारे खड़े होते हैं. स्कूल तो वाकई ठीक होने चाहिए लेकिन इस छापेमारी की इजाज़त कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने कैसे ली? सबसे पहले स्कूल में जाने के लिए प्रधानाचार्य या शिक्षक की परमिशन जरूरी है. दूसरा अगर वाकई आपकी नीयत स्कूल ठीक कराने की है तो साथ में कैमरे क्यों ले जा रहे हैं? तीसरा कैमरे और दलबल के साथ पहुंचने के समय बच्चों को फिल्म किया जाय, क्या इसकी इजाज़त आपने ली है? अपने स्वभाव के अनुसार कॉकरोच जनता पार्टी एक नहीं कई कानूनों का उल्लंघन कर रही है. शिक्षा और स्वास्थ्य इसी को शोकेस करते हुए आम आदमी पार्टी अपनी राजनीति चमकाती रही है. अब CJP स्कूल और अस्पताल की बात कर रही है. ये महज़ संयोग नहीं ये एक एक प्रयोग है.
#AbhijeetDipke #AshutohRanka #Souravdas #schooltheekkaro #naxal #cochroachjantaparty #deepakchaurasia #DeepakChaurasia #aamaadmiparty
@abhijeet_dipke@cockroachisback@SauravDassss@AshutoshRanka@CJP_for_India@AamAadmiParty
A very Happy Independence Day to all..
There’s something special about being Indian...the colours, the contrasts, the beautiful differences, the spirit and above all, the feeling of belonging to something much bigger than ourselves...our Country.
May we always value what we have and do our little bit to make our country proud.
Proud to be an Indian and love being one. Jai Hind!
अब तो कोई भी उठाईगीरा और लुच्चा लफंगा
मुँह मे गुटखा भरकर, साथ मे हाफ निक़्कर पहने 4 लफंगे और 500 रु का मोबाइल लेकर विद्यालय में जबरदस्ती घुसकर विद्यालय संचालन में बाधा उत्पन्न कर सकता है और महिला शिक्षिका और रसोइया से बदतमीजी कर सकता है
जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठियाँ चलीं तो सवाल उठा था -
दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है, तो लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया? गृह मंत्री अमित शाह जवाब दें।
सवाल बिल्कुल जायज़ था और आज भी पूछा जाना चाहिए।
और अब यही सवाल झारखंड में पूछा जाएगा -
कल छात्रों पर लाठियाँ चलीं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, वाटर कैनन चलाए गए। कई छात्रों के घायल होने की तस्वीरें और वीडियो सामने हैं।
और झारखंड में गृह विभाग खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है।
तो फिर सवाल है-
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन @HemantSorenJMM बताइए, छात्रों पर बल प्रयोग का निर्णय किस स्तर पर और किसके आदेश से लिया गया?
नियम पार्टी देखकर नहीं बदल सकता।
वहाँ अमित शाह जी से सवाल है,
तो यहाँ हेमंत सोरेन से जवाब और जवाबदेही की मांग भी उतनी ही है ।
छात्र की पीठ पर पड़ी लाठी यह देखकर दर्द नहीं करती कि सरकार BJP की है, JMM की है या Congress समर्थित है।
सत्ता किसी की भी हो-
लाठी किसके आदेश से चली, जवाब देना ही पड़ेगा।
आज आप गाँवों में जाकर देखिए- किसान खुद अपने बच्चे से कहता है, “बेटा, पढ़-लिख लेना… मेरी तरह खेती मत करना।”
सोचिए, जिस पेशे पर पूरे देश का पेट टिका है, उसी पेशे में लगा आदमी नहीं चाहता कि उसका बच्चा उसका काम आगे बढ़ाए। ये बड़ी चेतावनी है ।
क्योंकि किसान को खेती से सिर्फ फसल नहीं चाहिए, उसे भी सम्मानजनक जीवन चाहिए, बच्चों की अच्छी शिक्षा चाहिए, इलाज चाहिए, पक्का घर चाहिए और अपने भविष्य की सुरक्षा चाहिए। लेकिन अगर सालभर खेत में मेहनत करने के बाद कभी आलू ₹1 किलो बिके, कभी टमाटर सड़क पर फेंकना पड़े और कभी लागत तक न निकले, तो अगली पीढ़ी खेती क्यों चुनेगी?
हम अक्सर कहते हैं-
रोटी खाना आसान है,
रोटी पकाना उससे मुश्किल,
रोटी कमाना उससे भी मुश्किल,
लेकिन उस रोटी के लिए अन्न उगाना सबसे मुश्किल है।
और मुझे आने वाले भारत की एक बड़ी चिंता यही दिखाई देती है- अगर किसान का बेटा किसान नहीं बनना चाहता, तो 20–30 साल बाद हमारे लिए अन्न उगाएगा कौन?
इसलिए किसान की आय का सवाल केवल किसान का सवाल नहीं है। ये भारत की भविष्य की food security का सवाल है।
कैसी पत्रकारिता है ये? पहली बात, झारखंड में जो छात्र आंदोलन कर रहे हैं, उनमें ज़्यादातर ग्रेजुएट हैं। उन्हें अच्छी तरह पता है कि अगर ज़रा-सी भी बात बिगड़ी, FIR हो गई, तो सरकारी नौकरी का सपना हमेशा के लिए खत्म हो सकता है। इसलिए उनका संयम उनकी समझदारी भी है और उनकी मजबूरी भी।
दूसरी बात, आप लोग बार-बार जंतर-मंतर और झारखंड की तुलना में ही क्यों उलझे हुए हैं? मान लीजिए जंतर-मंतर का आंदोलन आपको बिल्कुल पसंद नहीं था, बहुत खराब था... उससे क्या बदल जाएगा? असली सवाल तो यह है कि उसका नतीजा क्या निकला- शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा हो गया। उस आंदोलन के बाद संसद में चर्चा हुई, कानून आया, सरकार को जवाब देना पड़ा।
और अगर झारखंड का आंदोलन आपको इतना ही अच्छा लग रहा है, तो स्टूडियो में बैठकर तारीफ करने से क्या होगा? जाइए, सरकार और छात्रों के बीच संवाद कराइए। यही तो पत्रकारिता का काम है- समाधान तक पहुँचने की कोशिश करना।
*"बच्चों को शिक्षा नहीं, मौत का रास्ता दिया जा रहा है!"*
मध्य प्रदेश के विदिशा में स्कूली बच्चों को उफनते स्टॉप डैम पर छलांग लगाकर स्कूल जाना पड़ रहा है। ज़रा सोचिए, अगर एक भी बच्चा फिसल जाए तो उसकी मौत का जिम्मेदार कौन होगा।
सरकार शिक्षा के नाम पर करोड़ों के दावे और विज्ञापन करती है, लेकिन बच्चों के लिए एक सुरक्षित पुल तक नहीं बना सकी यह सिर्फ़ लापरवाही नहीं, बल्कि मासूमों की ज़िंदगी के साथ खुला खिलवाड़ है।
किताबों से पहले बच्चों को सुरक्षित रास्ता चाहिए सरकार जवाब दे आख़िर बच्चों की जान की कीमत कब समझेगी।
Reaching ranchi @tuesday ||
मैंने पिछले 10 सालों में युवाओं की आँखों में मरते हुए सपने देखे हैं।
सालों तक लटकती भर्तियों के बीच उनकी उम्र निकलते देखी है।
आज कभी Paper Leak, कभी Cheating, कभी Result में गड़बड़ी, तो कभी कई राज्यों की भर्तियों में खुलेआम नौकरी की खरीद-फरोख्त...
आख़िर एक छात्र कब तक हिम्मत रखे? कब तक उम्मीद बनाए रखे?
मेरा सबसे बड़ा डर ये है कि जिस युवा को हम देश का भविष्य कहते हैं, वही युवा अब किताबें छोड़ने लगा है।
अभी झारखंड के हालात देखिए। भर्तियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ युवा सड़कों पर हैं।
ऐसे समय में मेरा फ़र्ज़ है कि मैं आपकी आवाज़ और आपका हौसला बुलंद करने आपके बीच पहुँचूँ।परसों आप सबसे रांची में मुलाकात होगी। सुबह-शाम वहीं से क्लास लूँगा और दिनभर आपके साथ रहूँगा।
आप जानते हैं, अभी एक बड़ा आंदोलन ख़त्म हुआ ही है। वो महीना मुश्किल रहा। 4-5 घंटे पढ़ाकर निकल जाना और कई रातों को 3-4 बजे घर लौटना।
क्योंकि अगर हमारा Education System और Exam System नहीं बदला, तो देश की सेवा ऐसे लोगों के हाथों में जा रही है जो उसके योग्य नहीं हैं। फिर एक अच्छे राष्ट्र की कल्पना भी झूठा स्वप्न हैं... 'विकसित भारत' तो दूर की बात होगी।
गाली देना गलत है, इसमें दो राय नहीं।
हर बार हम लक्षण का इलाज करते हैं, बीमारी का नहीं। कोई युवा गाली दे दे तो FIR कर दो |लेकिन ये कभी पूछा कि उसकी भाषा ऐसी बनी कैसे?
पिछले 10–15 साल में हमने उसे क्या दिखाया? OTT पर गाली-गलौज, फिल्मों में vulgarity, सोशल मीडिया पर trolling , नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस, टीवी डिबेट्स में चीख-पुकार, it cell की भाषा....
मुन्ना भैया की गालियाँ 'डायलॉग' , gangs of वासेपुर के किरदारों की गालियाँ डायलॉग - लेकिन वही भाषा अगर कोई 20 साल का युवा बोल दे, तो अचानक पूरी Gen Z असभ्य ?
सवाल यही है कि भाषा का माहौल बनाया किसने?
हम मूल कारण को नहीं समझ रहे हैं, घटिया web series, घटिया फिल्में, घटिया reels shorts , क्या सिखा रही हैं बच्चों को? और उन बच्चों से उम्मीद- बहुत अलग है हमारी |
और सबसे बड़ा सवाल- भाषा की मर्यादा तय करेगा कौन? जहाँ सांसद किसी को 'गटरछाप', 'परजीवी', 'पप्पू', 'गद्दार', 'टुकड़े-टुकड़े' जैसे शब्द कह रहे हो |
हमने एक ऐसी डिजिटल दुनिया बना दी है, जहाँ 27M युवा रोज़ 10–11 घंटे बिता रहे हैं और उस दुनिया में सबसे ज़्यादा दिखने वाली चीज़ गाली-गलौज, नफ़रत, अश्लीलता, ट्रोलिंग और सनसनी है। फिर सिर्फ़ युवाओं से आदर्श व्यवहार की उम्मीद करना पूरी तरह गलत है।
Hypocrisy की भी एक सीमा होती है।
“किन परिस्थितियों में धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफ़ा दिया और फिर उनका यहॉं स्वागत हो रहा है
जैसे किसी Super Star का आगमन हो रहा है???
इस सरकार पर कोई विश्वास नहीं कर सकता !”
@priyankagandhi जी 🔥🔥🔥
सबने देखा कि किन हालातों में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, लेकिन कल संसद परिसर में उनका ऐसे स्वागत किया गया, जैसे वे कोई सुपरस्टार हों!
क्या ये शर्मनाक नहीं है?
मोदी सरकार पर कोई भरोसा नहीं कर सकता, क्योंकि आज भी छात्रों को परेशान किया जा रहा है।
सरकार को बातचीत कर इस मामले को सुलझाना चाहिए, लेकिन वो अभी भी छात्रों के पीछे पड़े हुए हैं, उनका दमन करना चाहते हैं। ये गलत है।
: कांग्रेस महासचिव एवं सांसद श्रीमती @priyankagandhi जी
📍 दिल्ली