किसी भी अपराध में पीड़ित के साथ सभ्य समाज की संवेदना होती है, और सम्पूर्ण समाज का सहारा होता है।
हत्या जैसा संगीन अपराध में मृतक की जाति को तलाशना और कहना की उसके जाति के लोगों में आक्रोश है, अपने आप में संवेदनहीनता है क्योंकि ऐसी घड़ी में सभी विचार, जाति और क्षेत्र या अन्य भेद से ऊपर उठकर मानवीय रिश्तों को आगे रखते हैं।
अंकित बाल्यान के परिवार को न्याय मिले, ये एक जाति या फिर गोत्र का विषय नहीं, मेरा और हर न्याय प्रिय व्यक्ति का है।
सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते,
कोई बात नहीं थी…
जाट समाज को टारगेट करना और कहना ABCD हमने सिखाई?
मैं इस अहंकार को देख चुका हूँ करीब से और मानता हूँ ऐसा आचरण सिर्फ़ पतन लाता है!
एक लड़का अपने दोस्तों के साथ गोवा घूमने गया था। घूमना-फिरना, बीच और मस्ती सब बढ़िया चल रहा था।
वापसी से एक दिन पहले उसने सोचा कि गोवा से काजू और बादाम खरीदकर ले चलते हैं। आखिर वहां की यही चीजें सबसे ज्यादा मशहूर मानी जाती हैं।
सुबह वह कई दुकानों पर गया और कीमतें पूछीं। लगभग हर जगह काजू ₹550 और बादाम ₹650 प्रति किलो के आसपास मिल रहे थे।
काफी दुकानों में पूछताछ करने के बाद उसे एक दुकान मिली जहां दुकानदार ने कहा -
"5 किलो लोगे तो ₹500 किलो में दे दूंगा।"
सस्ता सौदा देखकर वह खुश हो गया।
पैकिंग भी बढ़िया थी। ऊपर से दिख रहे काजू बिल्कुल सफेद और अच्छी क्वालिटी के लग रहे थे।
उसने बिना पैकेट खोले 5 किलो काजू और 5 किलो बादाम खरीद लिए और होटल वापस आ गया।
अगले दिन वह अपने शहर लौट आया।
घर पहुंचकर जैसे ही उसने काजू के पैकेट खोले, उसके होश उड़ गए।
ऊपर दिखाई देने वाले कुछ काजू अच्छे थे, लेकिन अंदर ज्यादातर काजू काले, खराब और खराब स्वाद वाले निकले।
सभी पैकेटों का लगभग यही हाल था।
छंटाई करने के बाद कई किलो में से मुश्किल से कुछ सौ ग्राम अच्छे काजू ही बच पाए।
तब उसे समझ आया कि असली खेल पैकिंग में था।
ऊपर अच्छी क्वालिटी दिखाकर अंदर खराब माल भर दिया गया था।
किसी भी नए शहर या पर्यटन स्थल से पैक सामान खरीदते समय सिर्फ पैकिंग देखकर भरोसा मत कीजिए।
जहां तक संभव हो, पैकेट वहीं खोलकर सामान जरूर चेक कर लीजिए।
क्योंकि कई बार सबसे बड़ा नुकसान खराब सामान से नहीं होता।
बल्कि उस भरोसे से होता है जो हम बिना जांचे कर लेते हैं।
क्या आपके साथ भी कभी घूमने के दौरान ऐसा कोई खरीदारी वाला धोखा हुआ है?
आजीवन किसानों के हक़ में डटे रहने वाले, सामाजिक न्याय के प्रबल पक्षधर और किसान हितों की बेबाक आवाज़ भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।
उनका संघर्ष, उनके आदर्श और किसानों के प्रति उनकी निष्ठा सदा हमें प्रेरित करती रहेगी।
#ChaudharyAjitSingh
Rupee: ₹95 → ₹100
Stocks: Crashing
Economy: Collapsed
Jobs: Gone
Income: Falling
Savings: Wiped out
Cylinders: Unavailable
Why?
PM = Compromised
He is desperate to protect himself and his financial structure. But 140 crore Indians know - PM Modi has surrendered India’s future.
आज माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी, माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ दिल्ली–मेरठ नमो भारत कॉरिडोर और मेरठ मेट्रो के नए खंडों के उद्घाटन का अवसर मिला।
आज उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरा देश विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के एक नए युग का साक्षी बन रहा है। #MeerutMetro, #NamoBharat ट्रेन और #RRTS के नए खंडों से NCR में यात्रा अधिक सुगम और सुविधाजनक बनेगी। भारत में Multi Modal Transport Infrastructure Vision का पहला क्रियान्वयन मेरठ में हो रहा है!
इस परियोजना से दिल्ली–मेरठ की दूरी एक घंटे से भी कम समय में तय होगी, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता के लिए आवागमन सुगम होगा और शिक्षा, रोजगार व आर्थिक अवसरों को नई गति मिलेगी।
विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम!
The Economic Survey 2025-26 has put a spotlight on the leadership of Uttar Pradesh in Agriculture. UP is the leading producer of Rice, Wheat and Sugarcane (220.80 MT - 2024-25).
After declaring a farmer friendly SAP in Sugarcane, today the State Government has taken another progressive step to augment Sugar Industry and farmer incomes.
Thank you Yogi ji for fulfilling the promise made to farmers of Morna region, Muzaffarnagar!
आज केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष, श्री पंकज चौधरी जी के साथ दिल्ली निवास पर बैठक में उत्तर प्रदेश के चौमुखी और तीव्र विकास की योजना पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई।
ये शायद 2012 के आसपास की बात है।
मैंने एक अनौपचारिक बातचीत में चौधरी अजित सिंह से पूछा…
आप चौधरी चरण सिंह की विरासत को बिखरने से रोक नहीं पाए,
आख़िर इसकी वजह क्या रही?
चौधरी साहब ने बिना किसी लाग-लपेट के जवाब दिया
उस वक्त के हालात और समाज दोनों अलग थे
चौधरी चरण सिंह स्वतंत्रता संग्राम से सियासत में आए थे
उनके पास तजुर्बा हासिल करने का वक्त ज़्यादा था
जब मैं सियासत में आया, तब पचास पार कर चुका था
तुलना करने से पहले आपको उस दौर और आज की परिस्थितियों के फर्क को देखना होगा
उनकी यह बात आज भी मेरे ज़ेहन में अटकी है
बीते दिनों कुछ ऐसा ही सवाल
मैंने जयंत चौधरी के संदर्भ में
छपरौली से पाँच बार विधायक
और चौधरी चरण सिंह के विश्वासपात्र रहे
एडवोकेट नरेंद्र सिंह से किया
उनका जवाब था
“अगर आप माउंट एवरेस्ट से तुलना करने लगें तो यह कैसे उचित है
जयंत युवा हैं, पढ़े-लिखे, समझदार नेता हैं
उनका अपना दौर है
चौधरी साहब तो माउंट एवरेस्ट थे”
उनका जवाब अपनी जगह है
लेकिन मुझे लगता है कि असल बदलाव **नेताओं में नहीं, गांवों में** आया है
जमींदारी उन्मूलन,
चकबंदी,
और पटवारियों से मुक्ति जैसे
चौधरी चरण सिंह के फैसलों का
सीधा लाभ लेने वाली पीढ़ी
अब तेजी से दुनिया छोड़ रही है
सामाजिक तौर पर तो
“ताऊ” बहुत पहले ही पीछे हट चुके थे
जब
*ताऊ हट जा पाछे*
न गाना
शादी-ब्याह में बजना शुरू हुआ
नौजवान
दो पैग लगाकर
डीजे पर थिरकने लगे
और ताऊ
समारोह स्थल के एक कोने में
हुक्के पर सिमट गए
इस सामाजिक बदलाव से
सियासत कैसे अछूती रह सकती थी
जब ग़ाज़ियाबाद बसाया गया,
तो 35,000 एकड़ ज़मीन अधिग्रहण की योजना बनी
चौधरी चरण सिंह ने विरोध किया
तो लक्ष्य 6,000 एकड़ पर आ गया
तब किसान
ज़मीन को माँ मानता था
गांव में शराब पीना,
अंडा-मुर्गा खाना
और ज़मीन बेचना
पाप समझा जाता था
आज हर गांव में शराब का ठेका है
किसानों की नई पीढ़ी इस इंतज़ार में है
कि उनके इलाके में
कौन सा नया प्रोजेक्ट आएगा
जिसमें ज़मीन बेची जा सके
खेतों में
दिन-रात प्लॉट कट रहे हैं
गांव शहर की ओर भाग रहा है
बेटी का रिश्ता करने से पहले
पिता चाहता है कि
बेटी शहर में रहे
कभी गांव में
किसान के घर
हफ्तों तक
बाज़ार से कोई चीज़ नहीं आती थी
अब शायद ही कोई घर हो
जहाँ रोज़ कुछ न कुछ
दुकान से न आता हो
खानपान,
पहनावा,
रहन-सहन,
मकान और मकान बनाने का ढंग,
शादी-ब्याह से लेकर तेरहवीं तक
सब कुछ बदल गया है
ठेठ खड़ी बोली और साफ़गोई की जगह
दिखावा और हिंग्लिश ले रही है
मोटा खाना,
मोटा पहनावा
और सादा जीवन
अब पिछड़ेपन की निशानी कहे जाने लगे हैं
जो जातियां
तड़के खेतों में जाकर
नित्यकर्म निपटाते हुए
नीम की दातून करती थीं
उनके घर अब
दिन की शुरुआत
बेड टी से होती है
दातून की जगह टूथपेस्ट ने
पैदल चलने की जगह
मोटरसाइकिल और कार ने ले ली है
बाज़ार ने
चूल्हे से लेकर
महिलाओं-बेटियों के श्रृंगार तक
हर जगह कब्जा कर लिया है
तो क्या
विचार और सियासत का पैटर्न
वही रह सकता है
जो चौधरी चरण सिंह के ज़माने में था
यहीं से
**जयंत चौधरी की राजनीति को समझने** की जरूरत है
जयंत चौधरी
विरासत के उत्तराधिकारी जरूर हैं
लेकिन वे ऐसे समाज में राजनीति कर रहे हैं
जहाँ
किसान अब सिर्फ किसान नहीं रह गया
वह निवेशक,
जमीन कारोबारी
और शहर की आकांक्षा से भरा नागरिक भी है
2009 में
वे मथुरा से लोकसभा पहुंचे
यह वह दौर था
जब विरासत अभी भी
मतदाता को भरोसा देती थी
लेकिन 2014 में
मथुरा से हार मिली
और 2019 में
बागपत
पारिवारिक गढ़
वहाँ से भी हार
यह हार
किसी एक नेता की नहीं थी
यह उस सामाजिक बदलाव की हार-जीत थी
जिसे समझने में
पूरा किसान नेतृत्व पिछड़ गया
जयंत चौधरी
न टूटे
न राजनीति छोड़ी
किसान आंदोलन के दौरान
वे फिर मैदान में दिखे
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में
आरएलडी की सांस
यहीं से लौटी
2022 में
सपा से गठबंधन
यह भावनात्मक फैसला नहीं था
यह अस्तित्व की राजनीति थी
और 2024 में
एनडीए में जाना
यह सबसे ठंडा
सबसे व्यावहारिक
और सबसे विवादास्पद फैसला था
लेकिन सवाल यह नहीं है
कि फैसला पसंद आया या नहीं
सवाल यह है कि
क्या बदले हुए गांव,
बदलते किसान
और बदलती पीढ़ी के बीच
कोई भी नेता
चौधरी चरण सिंह के दौर की राजनीति
ज्यों की त्यों दोहरा सकता है
शायद नहीं
यही चुनौती
आज जयंत चौधरी के सामने है
उनके पास वक्त है
अब अनुभव भी
लोकसभा और राज्यसभा दोनों का
सियासत के भी
और गांव के भी
वे नए नहीं हैं
सवाल यह नहीं है कि
वे चौधरी चरण सिंह बन पाएंगे या नहीं
सवाल यह है कि
क्या वे
बदलते गांव के लिए
नई किसान राजनीति गढ़ पाएंगे
47वें जन्मदिन पर
यही बहस
उनके हिस्से आती है
बधाई और शुभकामनाएँ
चौधरी #JayantSingh को
Flagged off computers today for 15 government schools across Baghpat District under the Vidyanjali initiative.
The contribution from NICSI will significantly strengthen digital access in our rural classrooms and help students connect with new learning opportunities.
Grateful to all partners working together to uplift our schools and support our children’s future.
@vidyanjali_edu@EduMinOfIndia@MeitY_NICSI
विज्ञान भवन से PM श्री @narendramodi जी का संदेश:
"आईटीआई आत्मनिर्भर भारत की वर्कशॉप हैं।"
आज ₹ 60,000 करोड़ की #PM_SETU (Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs) योजना, 1200 स्किल लैब्स और 4th #कौशल_दीक्षांत_समारोह से युवाओं को नया आत्मविश्वास, नए अवसर और नए सपनों की उड़ान मिली है।
@PMOIndia@MSDESkillIndia@DGT_ MSDE
@EduMinOfIndia
#SkillIndia #ITIs
Seriously @Flipkart@flipkartsupport . Issue raised today will be resolved after 1 month . What kind of support you are providing to customer? What's the benefit of black membership?
Sachin Yadav’s stupendous javelin throw and performance at the World Athletics Championships 2025 represents Bagpat’s pride and talent as well as the soaring ambitions of the young sportspersons of Uttar Pradesh! Kudos!!