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What is this mumth movement bro 😂
They worked in princely states because of their knowledge and merit, not as slaves or because they were being fed by kings. Rising from such positions to become the President and Prime Minister of India is a far greater achievement than ruling over a small princely estate.
Instead of trying to belittle other communities, focus on education and meaningful discussions. Mocking historical figures over jobs they once held makes little sense. Dr. Rajendra Prasad and Lal Bahadur Shastri earned the nation's highest respect through their service. Their stature in Indian history is far greater than that of many local rulers. They are remembered as national icons, not because of the positions they started with, but because of what they achieved for the country.
@TheKayastha011 देर हो चुकी है, अब अगला नंबर नौकरियों पर है लेकिन फिर भी कोई नहीं मानेगा और न कोई उपाय ढूंढेगा इसको डिफेंड करने का... अधिकतर के हालत गंभीर हैं और जो सेटल्ड हैं उन पर आर्थिक हमला होने वाला है गुप्त और सिस्टेमेटिक तरीके से जैसे राजनीति से साफ किया गया...
16 जुलाई 2026 को सिवान के आंदर थाना क्षेत्र में हुई गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुए स्वर्गीय मुकेश श्रीवास्तव का 19 जुलाई 2026 को इलाज के दौरान निधन हो गया।
आज उनके पीछे लगभग 10 वर्षीय पुत्र, 6 वर्षीय पुत्री और 80 वर्षीय वृद्ध माता हैं, जिनका सहारा छिन चुका है।
यह केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि न्याय और कानून के शासन से जुड़ा एक गंभीर विषय है।आइए मुकेश श्रीवास्तव जी के परिवार को न्याय दिलाने के लिए एक छोटा सा कदम उठाते हैं।
इस लिंक पर क्लिक करके ईमेल के जरिए बिहार के मुख्यमंत्री और उनके अफसर तक अपनी बात पहुंचाये।
https://t.co/MKxoRTqvps
मोदी के कैबिनेट में एक भी कायस्थ मंत्री नहीं ।
नरेंद्र मोदी के अनुसार कायस्थ एक अनपढ़ ,जाहिल जाति है
वहीं दूसरी और ब्रिटेन में किसी कायस्थ को मंत्री पद से नवाजा जाता है।
मैं कायस्थों से यही कहूंगा कि भारत में योग्यता का कोई मूल्य नहीं 🙂
@naveencslover@AnantKayastha तुम कही से कायस्थ नहीं लगते, और न ही तुम्हे जातिवाद की समझ है, घोर जातिवाद तुम्हारी आँखों के आगे से निकल जाएगा लेकिन तुमको जातिवाद केवल उनमें दिखाई देगा जिनमें केवल नाम मात्र का है...और वो है कायस्थ, गजब आदमी हो भाई😂
भारत का सबसे कम जातिवाद समाज है कायस्थ!
प्रशांत किशोर जी, आप हर नेता से डिग्री मांगते हैं, लेकिन अपनी डिग्रियों का हाल क्या है?
1991 में बिहार बोर्ड से मैट्रिक, 1993 में इंटर, 1996-99 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन। ये ठीक है। लेकिन 2001-03 का पोस्ट ग्रेजुएशन हैदराबाद के एक कॉलेज से, जो यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं है। यानी यह डिग्री देश में कहीं काम नहीं आती। फिर 2010 में फ्रांस से फ्रेंच लैंग्वेज कोर्स किया, जिसे आपके समर्थक 'विदेशी पढ़ाई' बताकर बेचते रहे।
भाषा सीखना अच्छी बात है, लेकिन क्या महज एक भाषा कोर्स आपको 'विदेशी शिक्षित' बना देता है? क्या आप बिहार की जनता को फ्रेंच में समझाएंगे? आपकी पीजी की डिग्री ही UGC अप्प्रूव्ड नहीं, तो फिर आप किस मुंह से दूसरों की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हैं?
अब साफ है कि आपका 'डिग्री का रौब' झूठ पर टिका है। आपने जानबूझकर फ्रेंच कोर्स को डिग्री की तरह पेश किया, जबकि असली पीजी तो अमान्य है।
प्रशांत किशोर भीड़ जुटाने में निश्चित रूप से माहिर हैं, लेकिन उनकी भीड़ और वोटिंग परसेंटेज का ग्राफ अक्सर एक दूसरे के बिल्कुल उलट दिखाई देता है।
मेरे गृह जिला मधुबनी में जब उनकी सभा हुई थी, तब करीब 60 से 70 हजार से अधिक लोग पहुंचे थे। पूरा शहर 4 से 5 घंटे तक जाम रहा। माहौल देखकर लगा था कि चुनावी नतीजे भी उसी अनुपात में आएंगे, लेकिन परिणाम उसका 1% भी नहीं निकला।
उस समय सभी संभावित उम्मीदवारों से कहा गया था कि जो सबसे ज्यादा भीड़ जुटाएगा, उसके टिकट पर गंभीरता से विचार होगा। इतना ही नहीं, तथाकथित "परिवार लाभ कार्ड" बनवाने का भी लक्ष्य दिया गया था। यह कार्ड बिल्कुल ATM कार्ड जैसा दिखता था और गरीब लोगों से कहा जाता था कि इससे ₹20,000 का लाभ मिलेगा। इसी भरोसे में मासूम लोग लाइन लगाकर कार्ड बनवाते थे। खास तौर पर OBC, SC और ST बस्तियों में इन्हें अधिक से अधिक बांटने का लक्ष्य रखा गया था।
सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि उस समय मैं भी इस पूरी प्रक्रिया को कोऑर्डिनेट कर रहा था। इसकी वजह सिर्फ इतनी थी कि मेरे एक परम मित्र के पिता संभावित उम्मीदवार थे। टिकट वितरण के समय उन्हें पटना भी बुलाया गया था। वहां जो कुछ हुआ, उस पर फिलहाल लिखना उचित नहीं समझता। शायद कभी सही समय आने पर उस पर भी विस्तार से बात करूंगा।
@TheKayastha011 बिल्कुल सही पहचाना, यही कारण है और चुनाव के बाद ये सभी के सभी बीजेपी में ही मिलेंगे। इनको ये भी पता है कि बीजेपी नहीं हारेगी और फ्रस्ट्रेटेड इसलिए है कि कायस्थ जैसी इंटेलेक्चुअल कास्ट पर नैरेटिव काम नहीं कर रहा क्योंकि कायस्थ खुद नैरेटिव बनाने में एक्सपर्ट रहे है!
देख रहें हैं किस तरह का झूठ फैलाते हैं ये जन सुराज के आईटी सेल वाले, नीरज सिन्हा बूथ लेवल के नेता हैं उसको सम्राट का करीबी बता रहे हैं। ये लोग चाहते हैं कि कायस्थ का एकमात्र प्रतिनिधित्व वाला सीट भी कायस्थ समाज हार जाए।