डेहरी नगर पालिका के कार्यपालक अधिकारी विमल कुमार की हत्या विधि व्यवस्था के पतन का जीता जागता प्रमाण है। इस सरकार में भ्रष्टाचार की बात करना तो बेकार है। आज इसी संबंध में प्रेस वार्ता को संबोधित किया।
बिहार में 100 दिनों के अंदर दूसरे कार्यपालक अधिकारी की हत्या इस बड़बोली सरकार के माथे पर कलंक है। यह दर्शाता है कि नए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में अपराधियों का मनोबल बढ़ा है और अधिकारियों का घटा है।
इस पूरे मामले को पुलिस अलग दिशा देने में लगी है। पुलिस ने आनन-फ़ानन में बिना जाँच, अनुसंधान, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट के सीधे ही ड्राइवर को दोषी बता दिया। कह रहे है कि ड्राइवर पर काम का अत्यधिक दबाव, छुट्टी नहीं मिल रही थी, तो इसका मतलब वह EO कर्तव्यपरायण थे।
कल को मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात किसी सुरक्षाकर्मी या अधिकारी को छुट्टी नहीं मिली तो वह कुछ भी कदम उठा सकता है। क्या IG स्तर के अधिकारी तब भी ऐसा ही Sweeping Statement देंगे।
ड्राइवर के बार बार बदलते बयान संदेह उत्पन्न करते है। पहले बयान में कहता है कि, "दो अपाची बाइक से हमलावर आए”
दूसरा बयान में- "एक अपाची बाइक से हमलावर आए" और तीसरे बयान में कहता है कि "मैंने ही हत्या की"
स्पष्ट है कि पुलिस ड्राइवर को हत्यारा बता रही है लेकिन असली साजिशकर्ता को बचा रही है। साजिशकर्ता के नाम दिवंगत के परिजन बता रहे है। उनकी पत्नी जिन्होंने अपना सुहाग खोया है, वो नन्हे बिलखते बच्चे जिन्होंने अपना पिता का साया खोया है, वो माँ जिसकी कोख सूनी हुई है और वो बहन जिनके भाई को सत्ता संरक्षित अपराधियों ने छीन लिया।
परिजन जिस सत्ताधारी विधायक पर आरोप लगा रहे है उस एंगल से पुलिस जांच क्यों नहीं कर रही? क्या इसलिए कि उस विधायक के उसी रेंज के वरीय अधिकारी से घनिष्ठ संबंध है और वह अधिकारी प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के संबंधी है।
पत्नी के आरोप को यह सरकार हल्के में क्यों ले रही है? जब सपष्ट है कि ये EO उस विधायक के सीधे टारगेट पर थे, इसी विधायक ने विधानसभा में EO को लेकर टिप्पणी भी की थी। अगर EO कर्तव्यपरायण नहीं होते तो विधायक की शिकायत के बाद नगर विकास मंत्री उन्हें हटा देते लेकिन यहाँ मामला भ्रष्टाचार और वसूली का था।
जैसा की डेहरी में विधायक के कार्यकलाप और उसकी कैसे राजनीतिक एंट्री हुई सभी जानते है। इस विस्फोटक आरोप को भला पुलिस और प्रशासन कैसे नजरअंदाज कर सकते है कि डेहरी विधायक ₹25 लाख से लेकर ₹50 लाख से तक की वसूली की नियमित मांग कर रहे थे। विधायक पर भ्रष्टाचार के साथ साथ हत्या का मुक़दमा दर्ज होना चाहिए। नामज़द FIR होनी चाहिए।
EO की पत्नी बबीता देवी ने आरोप लगाया है कि डेहरी विधायक सोनू सिंह रोजाना फोन कॉल कर वसूली की मांग कर मानसिक उत्पीड़न करते थे, और EO स्व॰ श्री विमल कुमार मनोवैज्ञानिक दबाव में "हाँ सर" "हाँ सर" का जवाब देते थे। घटना से 1 दिन पूर्व विमल जी की विधायक से मुलाकात भी हुई। इस विधायक ने अधिकारी को इतना अधिक प्रताड़ित कर दिया था कि उनकी पत्नी ने उन्हें तबादले की सलाह भी दी थी। लेकिन ईमानदार अधिकारियों का इस सरकार में कैसे ट्रांसफर पोस्टिंग होता है, सब जानते है। ज़ाहिर है कि अधिकारी और उनके परिजनों को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता और जान के खतरे का पूर्वानुमान भी था।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 199 जो पूर्व में धारा 166A थी उसका बिहार पुलिस ने जानबूझकर उल्लंघन किया है। यह धारा मुख्य रूप से पुलिस या जांच अधिकारियों पर लागू होती है यदि वे किसी गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करते या जांच के नियमों को तोड़ते है। स्पष्ट है कि बिहार पुलिस में विधायक से संबंधित साक्ष्यों की जानबूझकर उपेक्षा की है और यह BNS की स्पष्ट अवेहलना है।
क्या मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर बिहार पुलिस द्वारा पूर्वाग्रही तरीके से जांच की जा रही है? बिहार पुलिस निष्पक्ष जाँच क्यों नहीं कर रही है?
7 हत्याओं का आरोपी इस प्रदेश के मुख्यमंत्री बने है जब से सम्पूर्ण बिहार में सत्ताधारी नेताओं और अपराधियों का नापाक गठजोड़ बनना शुरू हुआ है और दो अधिकारी इस सिंडिकेट की बलि चढ़ चुके है। मुख्यमंत्री और दो-दो उपमुख्यमंत्रियों की निष्क्रियता, भ्रष्टाचारियों को संरक्षण तथा लचर प्रदर्शन से प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल टूट चुका है।
प्रदेशवासियों में नागरिक सुरक्षा, सरकार-अपराधी गठजोड़ तथा पुलिस की एकपक्षीय कार्यशैली तथा मुख्यमंत्री की समझ और विश्वसनीयता को लेकर एक जनव्यापक चर्चा शुरू हो चुकी है। ये बड़बोले मुख्यमंत्री सोचते है कि विपक्ष का आवास और सुरक्षा लेकर, जाति और धर्म विशेष समूहों को टारगेट कर , बुलडोजर चलाकर तालियाँ बटोर लोगों को ख़ुश कर देंगे तो यह मूर्खता और अंहकार की पराकाष्ठा है।
छात्रों की आवाज़ उठाना अगर ‘दलाली’ है, तो छात्रों के इतने बड़े आंदोलन पर चुप रहना क्या कहलाएगा?
मुझे घेरने में इतनी ऊर्जा लगाने से अच्छा आप छात्रों की सुन लेते तो दिल्ली से आना ना पड़ता।
पत्रकार पर हमला आसान है लेकिन शायद छात्रों के सवालों का जवाब देना मुश्किल।
@hvgoenka Hw many reserved indians you hav given jobs to mr goenka?? Plz answer?? One more thing.. that american was talking abt 50% general & 10% EWS reserved indians.. total 60% reserved 😂😂 rest 40% are the deserved ones
Hon’ble PM SIR… बाक़ी सब तो ठीक था...
कम से कम Friday Night को तो छोड़ देते
See you Monday Sir 🙏🙏 तब तक लिए जितने गालीबाज़ सांसद विधायक समर्थक इन्फ़्युएंसर्स और क्रिएटर्स को आपने फॉलो कर रखा है सबको अनफॉलो कर दिया जाये सर.. वो कहते हैं ना…Charity begins at home
छात्र आंदोलन के दौरान जेल में बंद कई जिलों के योद्धा साथी रिहा हो चुके है। आश्वासन मिला है कि अन्य जगहों से रिहा करने की न्यायिक प्रक्रिया की अधिकांश औपचारिकताएं परिपूर्ण हो चुकी है तथा कुछ समय पश्चात शेष विधिक प्रक्रियाएं पूरा होते ही सभी को छोड़ दिया जाएगा।
धन्यवाद। छात्र-युवा शक्ति जिंदाबाद!
बांकीपुर के रोड शो में उमड़ा अभूतपूर्व जनसमर्थन, मोहब्बत उत्साह और सहयोग बता रहा है कि अब लालटेन के पक्ष में बदलाव की आवाज़ बुलंद हो चुकी है।
राजद ने बांकीपुर उपचुनाव में महिला को प्रत्याशी बनाया है। केवल नारों व भाषणों में महिला सशक्तिकरण की खोखली बातें करने वाले, अमन शांति और सौहार्द विरोधी भाजपाइयों को जनता कड़ा सबक सिखाएगी।
तुम्हारी समझ तुम्हारी जानकारी “आरक्षण” को लेकर शून्य है हर्ष। ये क्या हो रहा है क्यों हो रहा है कौन करवा रहा है हर कोई समझ रहा है हर कोई जान रहा है.. थोड़ा समझ लो आरक्षण को जानकारी दुरुस्त कर लो तब थोड़ा ठीक लगेगा। अभी बहुत ही अपरिपक्व लग रहा है दोस्त
70 सालों में रिजर्वेशन से यदि दस परसेंट लोग भी गरीबी रेखा से नहीं निकले हैं, तो क्या ये पॉलिसी फेल नहीं है? अगर निकले हैं, तो उनको उस साइकल से निकालना चाहिए या नहीं निकालना चाहिए?
#reservation#harshdubey#student#education
देखिए कैसे बिहार में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मी AK-47 से गोली चला रहा है? संपूर्ण देश में किसी भी छात्र प्रदर्शन में Police Manual का उल्लंघन कर AK-47 से गोली चलाने का यह प्रथम मामला है।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। अगर यही परिपाटी बनी तो आगे से प्रदर्शन करने वाले वकीलों पर, डॉक्टर्स पर, शिक्षकों पर, जजों पर, हक-अधिकार के लिए लड़ रहे छात्रों-युवाओं, महिलाओं और किसानों पर भी क्या बीजेपी सरकारें AK-47 से गोलियां चलवायेंगी?
कल को कोई भी पुलिसकर्मी किसी भी नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री पर भी कभी भी कहीं भी अकारण गोली चला सकता है? क्या ऐसे मामलों में सिर्फ गोली चलाने वाला ही दोषी होगा? उस जिले के SP और उच्च अधिकारियों को अविलंब सस्पेंड करना चाहिए? गृहमंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए अन्यथा प्रदेश में अराजक स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। अपराधी प्रवृति के व्यक्ति को जनता ने बिहार का मुख्यमंत्री नहीं चुना था। यह Elected नहीं Selected CM है।
7 हत्याओं का आरोपी बिहार का मुख्यमंत्री सड़क छाप अपराधी है जिसने तमाम लोकतांत्रिक परंपराओं को त्याग देश में पहली बार प्रदर्शनकारी छात्रों पर AK-47 से गोली चलवाई है।
छात्रों से समझौते के बाद भी बिहार में हज़ारों छात्रों पर फर्जी केस दर्ज कर हिरासत में लिया जा रहा है, परिजनों को प्रताड़ित किया जा रहा है। अगर छात्रों को रिहा नहीं किया गया तो NDA सरकार को महंगा पड़ेगा।
पुलिस की गोली से घायल छात्र प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आवश्यक अधिकार है जो नागरिकों को अपनी असहमति और विचार व्यक्त कर निरंकुश सत्ता को जवाबदेह बनाता है।
बिहार सरकार छात्रों पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों पर अविलंब कारवाई करें।#protest
माननीय सेलेक्टेड मुख्यमंत्री @samrat4bjp जी
समझे… आपको अपनी पार्टी में ही साबित करना है कि आप मुख्यमंत्री हैं… कर्मभूमि बिहार को बनाइए महोदय
छात्रों की पीठ को क्यों बना रहे हैं।
देखे नहीं… एक का इस्तीफ़ा हो गया ना जी..
कहीं 🤔🤔