हाथ जोड़ रहे युवाओं पर इस तरह लाठी चलाना क्रूरता की पराकाष्ठा है। भाजपा राज में रोजगार मांगने वाले युवाओं को लाठियों से पीटा जाता है। यूपी हो, बिहार हो या मध्य प्रदेश - युवा अगर अपनी आवाज उठाते हैं तो उनके साथ बर्बरता की जाती है।
दुनिया के सबसे युवा देश के नौजवानों का भविष्य क्या होगा, यह सोचना और उसके लिए नीतियां बनाना सरकारों का काम है। लेकिन भाजपा के पास सिर्फ कुर्सी बचाने का विजन है। जो मांगेगा रोजगार, उस पर होगा अत्याचार।
मैंने संसद में कहा था कि जिस तरह एकलव्य का अंगूठा कटवाया गया था उसी तरह पेपर लीक करवाकर युवाओं का अंगूठा काटा जाता है।
इसका ताज़ा उदाहरण बिहार है। BPSC अभ्यार्थी पेपर लीक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं और एग्जाम को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
लेकिन NDA की सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए उल्टा छात्रों पर ही लाठी चार्ज करवा रही है।
यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम उनके साथ हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे।
पटना में पीटे जा रहे ये वही युवा है जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी ने अच्छे दिनों का वादा किया था।
पिछले 10 सालों से वही युवा डबल इंजन सरकारों में प्रधानमंत्री के इशारे पर रोज पीटे जा रहे है,
पटना में BPSC अभ्यर्थियों पर बर्बर लाठीचार्ज की मैं कड़ी निंदा करता हूँ।
BPSC Protest: प्रदर्शन कर छात्रों पर Police ने किया Lathicharge , देखिए कैमरे पर कैसे रो-रोकर अभियर्थियों ने सुनाया दास्तान
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VIDEO | Protesting BPSC aspirants attempt to reach BPSC office in Patna. They are demanding the cancellation of 70th CCE Prelims re-examination.
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7)
पटना में BPSC अभ्यर्थियों पर निर्दयी डबल-इंजन सरकार ने बर्बर लाठीचार्ज कराया है।
ये आम घरों के युवा है, कमलगट्टों के घरों से होते तो सड़कों से उठाकर ICC चैयरमैन बना दिये जाते।
बिहार में BPSC परीक्षा में धांधली के खिलाफ बेरोजगार युवा कई दिन से प्रदर्शन कर रहे थे।
आज बिहार सरकार ने पुलिस भेजकर युवाओं पर लाठी चलवाई।
वीडियो में दिख रहा है कि युवा हाथ जोड़ रहे हैं, दया की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन बिहार की बेरहम पुलिस सरकार के आदेशों का पालन करती रही।
ये हालात सिर्फ बिहार के युवाओं के नहीं है, आज पूरे देश में युवा नौकरी और रोजगार के लिए लाठी खाने को मजबूर हैं।