“अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च: ”
इस श्लोक के अनुसार अहिंसा ही मनुष्य का परम धर्म हैं और जब जब धर्म पर आंच आये तो उस धर्म की रक्षा करने के लिए की गई हिंस
बाढ़ का पानी उतरने के बाद पहुंचे रूडी जी अब उन पत्रकारों से नाराज हैं, जिन्होंने उनके कार्यकर्ताओं का न्यूज वीडियो नहीं बनाया।
गजबे प्रभु! बाढ़ की कवरेज हो रही है या कार्यकर्ताओं की हाजिरी? 😅😂
छपरा के सांसद राजीव प्रताप रूडी के सपनों का शहर। नवरात्रि में इसी रास्ते से आप गांधी चौक, नेहरू चौक और म��युनिसिपल चौक जा सकते है मेला घूमने के लिए।
मेयर लक्ष्मी नारायण गुप्ता और विधायक छोटी कुमारी ��र वार्ड पार्षद श्याम कुमार का विशेष आभार।
🚨Let’s make #ArrestCJPAntiNational trend! Full support for @DelhiPolice🔥✊
🔄 RT if you agree and share with every nationalist!
Thank you, ma’am @SachdevaAmita. Everyone, tag @DelhiPolice and urge them to investigate the pending cases against Dhruv Rathee and take appropriate legal action wherever the charges are substantiated. ⚖️🇮🇳
I urge @DelhiPolice to take immediate action on my pending criminal complaint against Dhruv Rathee under Sections 196 and 299 of the BNS for spreading misinformation about Hindu Deities, including Bhagwan Shri Ram and Sita Maa.
The Ld. CJM’s direction to file an Action Taken Report remains uncomplied with by Delhi Police.
If action is further delayed, I shall be constrained to approach the Hon’ble Delhi High Court again.
10 दिनों बाद छपरा पहुंचे सांसद महोदय राजीव प्रताप रूडी! बाढ़ के सवाल पर जवाब कम, पत्रकारों को ज्ञान ज्यादा।
बिहार में जब बाढ़ से लोग परेशान थे, घरों में पानी घुसा था और लोग मदद की उम्मीद लगाए बैठे थे, तब सांसद महोदय कहां थे? यही सवाल जब पत्रकार पूछ रहे हैं, तो सीधे जवाब देने के बजाय पत्रकारों को ही पत्रकारिता का पाठ पढ़ाया जा रह��� है। छपरा हो या पटना, सवाल वही है और जवाब देने का अंदाज भी लगभग वही!
अब बाढ़ पीड़ितों से सांसद जी उर्फ 'राणा सांगा' जी का जवाब सुनिए। कहते हैं कि उन्हें तैरना नहीं आता, खाना बनाना नहीं आता, तो जाकर क्या करते?
सांसद जी, जनता ने आपको तैराकी सिखाने या खाना बनवाने के लिए नहीं चुना है। जनता ने आपको इसलिए चुना है कि मुसीबत के वक्त आप उनकी आवाज बनें, प्रशासन को सक्रिय करें, राहत पहुंचाने की व्यवस्था करें और लोगों को भरोसा दिलाएं कि उनका जनप्रतिनिधि उनके साथ खड़ा है।
और गजब तो तब हो गया, जब बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे नेताओं के बारे में कहा गया कि पैसे नहीं बांटने चाहिए, शासन ऐसे नहीं चलता।
बिल्कुल, शासन नियमों से चलता है। लेकिन जनसेवा सिर्फ नियमों की दुहाई देने से नहीं होती, उसके लिए संवेदनशीलता और सक्रियता भी चाहिए। राहत सामग्री बांटने में नियमों का पालन होना चाहिए, लेकिन जो लोग संकट में हैं, उन्हें मदद मिल रही है या नहीं, यह सवाल भी उतना ही जरूरी है।
पत्रकार सवाल पूछेंगे, क्योंकि जनता जवाब चाहती है। बाढ़ पीड़ित सवाल करेंगे, क्योंकि उनका घर-परिवार प्रभावित हुआ है। और सांसद से सवाल पूछना कोई अपराध नहीं, लोकतंत्र में जनता का अधिकार है।
सांसद जी, जनता को यह जानने में दिलचस्पी कम है कि आपको तैरना आता है या खाना बनाना। जनता तो बस यह जानना चाहती है कि संकट के समय उसके सांसद ने उसके लिए क्या किया?
क्योंकि चुनाव के समय जनता तक पहुंचने के लिए रास्ते खोज लिए जाते हैं, लेकिन आपदा के समय जनता तक पहुंचने का रास्ता ही सवाल बन जाए, तो जवाब तो देना पड़ेगा!
बिहार में 20 साल से एनडीए की सरकार है लेकिन बढ़ में राहत सामग्री pahuchana ही इन लोगों को बहुत बड़ा उत्थान लग रहा है...#BJP wale kitna #arrogant ho gaye h....
माननीय मुख्यमंत्री जी @samrat4bjp एवं शिक्षा मंत्री जी @mkrtiwari_bjp उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के उसे PM SHRI विद्यालयों के तर्ज पर विकसित किया जाना चाहिए। कक्षा 6 से 12 तक समेकित रूप से एक साथ चलना चाहिए और PGT शिक्षकों से सभी सभी कक्षाओं का वर्ग संचालन करवाना चाहिए। इसे शिक्षकों का सदुपयोग हो सकेग��।
कक्षा 6 से 8 के शिक्षकों को वहां से हटाकर अन्यत्र पदस्थापित करना चाहिए जहां शिक्षकों क�� कमी। PGT शिक्षकों के लिए न्यूनतम 5 घंटी लेना अनिवार्य करना चाहिए।
बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक संघ ने आंदोलन में अपना पूर्ण सहयोग दिया।
शिक्षकों के सातवें वेतनमान की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में कल शिक्षा मंत्री जी के साथ तीसरे दौर की वार्ता हुई। वार्ता के बाद आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लिया गया।
इस अवसर पर JDU नेता अभिषेक झा जी ने जूस पिलाकर अनशनरत साथियों का अनशन समाप्त कराया। वार्ता में चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद सातवें वेतनमान देने का पूर्ण आश्वासन दिया गया है।
हम सरकार के इस आश्वासन का सम्मान करते हैं और उम्मीद करते हैं कि यह वादा जल्द धरातल पर उतरेगा।
बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक संघ शिक्षक हित के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। यदि भविष्य में अपने अधिकार और सम्मान के लिए पुनः संघर्ष की आवश्यकता पड़ी, तो हम अपने शिक्षक साथियों के साथ पूरी मजबूती से फिर खड़े होंगे।
संघर्ष रुका है, संकल्प नहीं।
वेतनमान केवल आर्थिक लाभ नहीं, शिक्षक का सम्मान है।
एकता • अधिकार • सम्मान
एक विद्यालय है जिसमें दो शिक्षक हैं - एक BPSC प्रधान शिक्षक और BPSC विद्यालय अध्यापिका!
प्रधान शिक्षक का कहना है कि 1 to 3 आप संभालिए और 4-5 हम संभालते हैं।
अध्याप���का का कहना है कि हम दिन भर क्लास नहीं ले सकते हैं, टोला सेवक को बोलिए आधे दिन क्लास लेने।
टोला सेवक स्थानीय है और उसका कहना है कि मेरा काम विद्यालय में क्लास लेना नहीं है। हम क्लास नहीं लेंगे।
ऐसे में क्या समाधान निकालना चाहिए?
हर बात में “UP-Bihar” या किसी राज्य की पहचान को बीच में लाना जरूरी नहीं है।
किस��� व्यक्ति का किसी आंदोलन में शामिल न होना एक अलग विषय है। इसे उसकी राज्य, भाषा, पहनावे या खान-पान से जोड़कर देखना उचित नहीं है
मुद्दा अगर सही है, तो समर्थन भी मुद्दे के आधार पर होना चाहिए,
7वें वेतनमान के लिए 4 दिन से अनशन चल रहा है। कितने UP वाले शिक्षक अनशन पर बैठे हैं? या कितनी UP की रीलबाज शिक्षिकाएं अनशन स्थल पर पहुंची?
इनको बस प���र्ण वेतनमान चाहिए लेकिन आंदोलन में हिस्सादरी - नील बटे सन्नाटा!
चौथा दिन है… शिक्षक अभी भी डटे हुए हैं।
आप कहाँ हैं?
सिर्फ अपडेट का इंतजार कर रहे हैं, या इस इंतजार में हैं कि आंदोलन खत्म हो और फिर आरोप लगाने लगें?
याद रखिए—
वेतनमान सबका अधिकार है, तो संघर्ष में हिस्सेदारी भी सबकी होनी चाहिए।
अभी नहीं तो कभी नहीं।
आज साथ दीजिए, आंदोलन स्थल पर आइए।
🔥 सिर्फ अपडेट मत देखिए, इति��ास का हिस्सा बनिए।