जनता की छोटी-छोटी समस्याओं को हल कराने के लिए जनता की पहल - इसी उद्देश्य से गठित एक संकल्प है। आम नागरिक अपने अनसुलझे सवालों के साथ हमसे सम्पर्क कर सकते हैं।
हम उचित माध्यमों तक उनकी समस्याएं पहुंचाने की कोशिश करेंगे और उनके समाधान की दिशा में हर संभव प्रयास करेंगे।
हाँ हाँ, वही ‘जंगलराज’ जहाँ पहली बार गरीबों, दलितों, पिछड़ों और आम जनता की आवाज़ विधानसभा की दीवारों तक पहुँची थी। वही दौर जब सत्ता सिर्फ़ अमीरों और रसूखदारों की जागीर नहीं रही, बल्कि गाँव के लोगों को लगा कि उनका भी हक़ और हिस्सा है।
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महागठबंधन के घोषणा पत्र का यह संकल्प सामाजिक न्याय और समान भागीदारी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न सिर्फ़ लोकतंत्र को मज़बूत करेगा, बल्कि समावेशी विकास की राह भी खोलेगा — जहाँ हर वर्ग की आवाज़ सत्ता के केंद्र तक पहुँचेगी।
पंचायत और नगर निकायों में अतिपिछड़ा वर्ग का आरक्षण 20% से बढ़ाकर 30% और SC-ST वर्गों के आरक्षण में बढ़ोतरी का फैसला, समाज के वंचित वर्गों को निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए पेंशन राशि बढ़ाने का वादा न सिर्फ़ आर्थिक सहारा देगा बल्कि उनके आत्मसम्मान और जीवन की गरिमा को भी मज़बूती प्रदान करेगा। हर साल पेंशन में बढ़ोतरी और दिव्यांगों के लिए दुगुनी राशि का प्रावधान एक जनकल्याणकारी सोच को दर्शाता है |
जीविका दीदियों का ₹30,000 मासिक वेतन और लिए गए लोन पर ब्याज माफ करने का वादा उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। यह निर्णय महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास – दोनों का सशक्त प्रतीक है। @yadavtejashwi@RJDforIndia
जीविका दीदियों को स्थायी दर्जा देना और उन्हें सरकारी कर्मचारी का सम्मानित स्थान देना, उनके वर्षों की मेहनत और योगदान की सच्ची पहचान है। महागठबंधन के घोषणा पत्र का यह बिंदु बेहद दूरदर्शी और संवेदनशील है। @yadavtejashwi@RJDforIndia
बिहार में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा राहत कदम साबित होगा। यह फैसला न सिर्फ़ कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करेगा बल्कि उनके मनोबल और सेवा-भावना को भी मज़बूती देगा। महागठबंधन के घोषणा पत्र का यह वादा वाकई सराहनीय है।
ये घोषणा पत्र वाकई में जनता की उम्मीदों और ज़मीनी हक़ीक़तों से जुड़ा हुआ है। इसमें बिहार के विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरी की जो बात की गई है, वो एक दूरदर्शी सोच को दर्शाती है। यह सिर्फ़ वादों का कागज़ नहीं बल्कि बिहार के भविष्य की रूपरेखा है।
आइए, हिन्दी दिवस पर हम सब मिलकर अपनी मातृभाषा हिन्दी को सलाम करें और वादा करें कि इसे न सिर्फ़ अपनी ज़ुबान में बल्कि अपने अमल और तालीम में भी ज़िन्दा रखेंगे।
"ज़ुबान से बढ़कर कोई पहचान नहीं, हिन्दी हमारी रूह है" -14 सितम्बर का दिन हिन्दुस्तान की ज़ुबान हिन्दी को समर्पित है। सन 1949 में इसी रोज़ संविधान सभा ने हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। तभी से यह दिन हमें हमारी तहज़ीब, हमारी ज़बान और हमारी पहचान की याद दिलाता है।
Kudos to the youth of Nepal for reminding us all:
🔥 Change is born when the young stand united.
🔥 No government is stronger than the will of its people.
🔥 Democracy breathes through courage, not silence.
#Nepal