@Asharamjibapu__ 🌼 चिंता नहीं, चिंतन का मार्ग अपनाइए। जब मन ईश्वर पर विश्वास करना सीखता है, तब परिस्थितियाँ वही रहती हैं, लेकिन उन्हें देखने की दृष्टि बदल जाती है। Sant Shri Asharamji Bapu का यह संदेश आंतरिक निश्चिंतता की प्रेरणा देता है।
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@Asharamjibapu__ मैंने तो शरीर को ईश्वरार्पण कर दिया है। अब उसकी भूख-प्यास, सुख-दुःखादि से मुझे क्या ? समर्पित वस्तु में आसक्त होना महा पाप है।
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@Asharamjibapu__ 🙏 जब मन चिंता से घिर जाए, तब प्रभु का स्मरण ही सबसे बड़ा सहारा है। अपनी चिंता भगवान को समर्पित कर दें और उनके चिंतन में डूब जाएँ। जहाँ चिंता समाप्त होती है, वहीं से शांति, सही बुद्धि और ईश्वर की कृपा का मार्ग खुलता है।
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तो जब चिंता सताए तो भगवान को बोलना कि, "प्रभु, मेरो चिंत्यो होत नहीं। मैं तेरी शरण हूँ।" भगवान को प्रार्थना करते-करते ध्यान में डूब जाना। आपकी चिंता से जो काम नहीं होगा, प्रभु के चिंतन से काम भी बनेगा, बुद्धि भी बढ़िया होगी।
तुलसी भरोसे राम के।
निश्चिंत होई सोय।।
अनहोनी होनी नहीं।
होनी होय सो होय।।
जो अनहोनी है, तो होनी वाली नहीं, और जो होनी होगी, होगी। भगवान हमारे परम हितैषी हैं। जो हुआ, अच्छा हुआ,जो हो रहा है, अच्छा है, जो होगा, वो भी अच्छा होगा। भले अभी अच्छा नहीं लगता, लेकिन भविष्य इसका अच्छा ही होगा।
मेरो चिंत्यो होत नहीं, हरि को चिंत्यो होय।
हरि चिंत्यो, हरि करे, मैं रहूँ निश्चिंत।
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@Asharamjibapu__ योग्यता से शांति नहीं मिलेगी,योग्यता के सदुपयोग से शांति मिलेगी। कई लोग सम्पत्ति के आधार पर शांति सुरक्षित रखना चाहते हैं। सम्पत्ति से शांति नहीं मिलेगी, सम्पत्ति के सदुपयोग से शांति मिलेगी,वैसे ही विपत्ति के सदुपयोग से भी शांति मिलेगी।
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वसिष्ठ जी बोले हे राम जी! ज्ञानवान पुरुषों के अनुसार ही संवेदन, मन और इंद्रियों का विचार रखना और जो इनसे विरुद्ध हो उनको कभी न करना। हे राम जी! जिन पुरुषों ने संतों और शास्त्रों के अनुसार पुरुषार्थ नहीं किया, उसका बड़ा राज्य, प्रजा, धन और विभूतियाँ मेरे देखते-देखते क्षीण हो गई।
लो वसिष्ठ जी का अनुभव है। जिन्होंने ज्ञानी महापुरुष की आज्ञा का अवहेलना किया, उनका धन, राज्य, विभूतियाँ नष्ट हो गई।
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द्वेषपूर्ण व्यवहार! ऐसा व्यवहार करने वाले के ओज को, तप को, भजन को, खा जाता अर्थात नष्ट कर देता है। जय रामजी की!
राग-द्वेष और काम-क्रोध, ये हमारी भक्ति को, योग्यता को, बुद्धिमत्ता को, हर लेते हैं।
तुलसीदास महाराज कहते हैं,
"काम-क्रोध अरु लोभ-मोह की, जब लग मन में खान।
तुलसी दोनों एक हैं, क्या मूरख और विद्वान।।"
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उचित उपचार और मानवीय व्यवहार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान हैं। Nirdosh Sant, Paid Media और #AsaramBapuCase पर संयमित और तथ्यपरक चर्चा ही बेहतर लोकतांत्रिक संस्कृति का आधार है।
यह न्याय नही है
हरड़ (Terminalia chebula) का 'चेबुलिनिक एसिड' आंतों की म्यूकोसा को हील कर क्रॉनिक कब्ज व गैस को जड़ से मिटाता है। यह आंखों की रोशनी बढ़ाने और लीवर डिटॉक्स में अचूक है। पूरी पोस्ट पढ़े 👉🏻 https://t.co/0GzOX0KwBt
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@Asharamjibapu__ सुख और दुःख दोनों जीवन के शिक्षक हैं। जो उन्हें समभाव से स्वीकार कर उनका सदुपयोग करता है, वही अंतर्मन की शांति और स्थायी आनंद का अनुभव करता है।
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@Asharamjibapu__ हरि ॐ! इस परिवर्तनशील संसार में केवल ईश्वर ही परम सत्य हैं। प्रभु से प्रीति बढ़ाना ही जीवन का असली उद्देश्य है। 🙏🚩
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