Advocate High court Lucknow.
State Executive Member Student Assembly
co-election in-charge ambedkar nagar
Founder _Free Samajwadi School Ambedkar Nagar
सशस्त्र बल जिन बेहद ख़तरनाक हथियारों से लैस करके जंतर-मंतर पर भेजे गये, उसे देखकर तो लगता है कि अब केवल टैंक आना बाक़ी है।
सत्ता जितनी डरी होती है, उसकी बंदूक उतनी बड़ी होती है।
‘जंतर-मंतर’ को शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित करना भाजपा सरकार की सबसे बड़ी हार है।
शुक्र तो ये मनाइए कि प्रदर्शन करने के लिए ‘किसी भूमिगत’ जगह पर जाने को नहीं कहा गया, जहाँ भाजपा और उनके अंडरग्राउंड संगी-साथी अपनी ख़ुफ़िया मीटिंग करते हैं।
भाजपा बेहद डरी-सहमी हुई है। वो जनाक्रोश से बचने के लिए उन जगहों से जनता को दूर करना चाहती है जहाँ सत्ताधीश बैठते हैं। अच्छा तो ये होता कि लोकतंत्र में लोक के कल्याण के लिए प्रदर्शन हेतु ‘लोक कल्याण मार्ग’ पर ही कोई जगह दे दी जाए। इससे नामकरण को सही साबित करने का तर्क भी मिल जाएगा। सर्वोच्च सत्ता तक जब बात सीधे पहुँचेगी तो समाधान भी तुंरत निकलेगा।
एक इंडिया एक आवाज़
अब नहीं सहेंगे अत्याचार
‘संविधान’ पर यूं आघात
‘आरक्षण’ पर घोर-प्रहार
‘किसान’ से विश्वासघात
‘नारी-युवा’ पर गहरी मार
हम मिलके करें तार-तार
‘वोट चोरी’ का मायाजाल
एकरंगी सोच की हर चाल
हों बेनक़ाब ये गिरोहबाज़
एक इंडिया एक आवाज़
जय संविधान-जय हिंदुस्तान!!!
एक इंडिया एक आवाज़
अब नहीं सहेंगे अत्याचार
‘संविधान’ पर यूं आघात
‘आरक्षण’ पर घोर-प्रहार
‘किसान’ से विश्वासघात
‘नारी-युवा’ पर गहरी मार
हम मिलके करें तार-तार
‘वोट चोरी’ का मायाजाल
एकरंगी सोच की हर चाल
हों बेनक़ाब ये गिरोहबाज़
एक इंडिया एक आवाज़
जय संविधान-जय हिंदुस्तान!!!
जिन्होंने भगवान के पैसे चुरा कर भगवान तक को धोखा दिया हो, वो भाजपाई धरती पर भगवान के रूप डॉक्टरों को भला क्या छोड़ेंगे।
भाजपा पैसों को छोड़कर किसी की सगी नहीं है।
और ये ख़ुद ‘स्वाभिमान-शून्य’ हैं, नहीं तो :
- नाम की पट्टी हटाने पर कुछ तो प्रतिक्रिया देते;
- कुर्सी की जगह स्टूल पर बैठानेवालों के उप नहीं होते;
- जनता द्वारा चुनाव हराये जाने के बाद सरकार में नहीं रहते;
- किसी के द्वारा दिये गये ‘कृपाप्राप्त पद’ को स्वीकार नहीं करते;
- प्रमुख मंत्रालय छिन जाने पर चुप्पी न साध लेते;
- मुख्यमंत्री जी द्वारा सरेआम अपने हाथ से हाथ नीचे कर देने पर वहीं बैठे न रहते;
- वर्चस्ववादियों के दिये अपमान के घूंट नहीं पीते;
- ’पीडीए समाज’ से होते हुए भी पीडीए का दमन- उत्पीड़न करनेवाले प्रभुत्ववादियों के पिछलग्गू न होते!
लूटनेवाले लुट गये।
ये समाचार सुनकर तो महाराष्ट्रवाले कुबेर तो डर के मारे ‘यूपी’ ही नहीं आएंगे।
ये है उप्र में अपराधियों के ख़िलाफ़ ज़ीरो हो गये ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ के दावे का सच।
मुखिया ही माफ़िया है!
उप्र की जनता भाजपाइयों से जो करवानेवाली है उसका रिहर्सल ये नेतागण कर रहे हैं।
‘भाजपाई’ उठा-बैठक का अभ्यास कर रहे हैं
क्योंकि अपने कुकर्मों की वजह से डर रहे हैं!
‘देश’ की ख़ातिर सब हैं साथ
एक इंडिया की एक आवाज़
‘चुनावी धांधली’ के ख़िलाफ़
एक इंडिया की एक आवाज़
‘लोकतंत्र’ की बन रही ढाल
एक इंडिया की एक आवाज़
संविधान-आरक्षण के रक्षार्थ
एक इंडिया की एक आवाज़
मिटे सब ‘अन्याय-अत्याचार’
एक इंडिया की एक आवाज़
हो रोज़ी-रोटी सबके ही पास
एक इंडिया की एक आवाज़
हो अपनी छत और बुनियाद
एक इंडिया की एक आवाज़
सबको मेहनत का मिले लाभ
एक इंडिया की एक आवाज़
खिलें खेत, दुकान, कारोबार
एक इंडिया की एक आवाज़
हों ‘युवाओं’ के सपने साकार
एक इंडिया की एक आवाज़
नारी के मान पर न हो प्रहार
एक इंडिया की एक आवाज़
हो शोषित-वंचित का उद्धार
एक इंडिया की एक आवाज़
हो सबको सुरक्षा का एहसास
न हो ऊँच-नीच न जात-पात
एक इंडिया की एक आवाज़
सब हो समान बिना भेदभाव
एक इंडिया की एक आवाज़
मिले नागरिकों को अधिकार
एक इंडिया की एक आवाज़
पहुँचे ‘तरक़्क़ी’ हर गाँव-द्वार
एक इंडिया की एक आवाज़
हो हर कोई स्वस्थ-ख़ुशहाल
एक इंडिया की एक आवाज़
‘बीजेपी, चुनाव आयोग और प्रशासन’ के त्रिगुट द्वारा SIR प्रक्रिया में डुप्लीकेट वोटर जुड़वाकर 2027 चुनाव जीतने की साज़िश -षड्यंत्र का पर्दाफ़ाश कल की प्रेस कांफ्रेंस में।
चार सौ तीन में चार सौ बीसी नहीं चलेगी!
राज्यसभा की बात करनेवाले उप्र के मुख्यमंत्री जी में अगर रत्ती भर भी लाज-शर्म-हया हो तो भाजपा द्वारा बनाए गए सिक्किम के विवादित ‘राज्यपाल’ के बारे में बोलें।
उत्तराखण्ड की बेटी के प्रति उप्र के मुख्यमंत्री जी का भी तो कोई दायित्व बनता है या नहीं। उत्तराखण्ड छोड़ आए तो क्या नैतिकता भी छोड़ आए हैं।
देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी की आवाज़ किसी बच्ची के साथ हुए पाप के ख़िलाफ़ निकलती है या भयभीत होकर उनकी घिग्घी बंध जाती है। हमारी उनसे अपील है कि यदि उनमें अंश मात्र भी धर्म है तो वो एक आरोपी को राज्यपाल बनाने के फ़ैसले का घोर विरोध करें। ये उनको सीधी चुनौती है, नहीं तो वो सदैव के लिए मौन धारण कर लें। फिर तो यही माना जाएगा कि इसमें उनकी ख़ामोश सहमति भी शामिल है।
दिल्ली का ड्रोन-दूरबीन तो सिक्किम तक नहीं देख पा रहा है देखते हैं उप्र के मुख्यमंत्री जी का बुलडोज़र वहाँ तक पहुँचाता है या नहीं।
आज पूरे देश की हर बेटी और उनके माँ-बाप भाजपा के इस फ़ैसले से बेहद आक्रोशित हैं कि भाजपा ने घोर निंदनीय निर्णय लेते हुए अपने दल के एक ऐसे व्यक्ति को सिक्किम का राज्यपाल बनाया है जिसके घिनौने कुकृत्यों की वजह से एक बच्ची के साथ अन्याय हुआ और उसकी हत्या भी कर दी गई।
भाजपा बेशर्म अपराधियों का गिरोह है।
उत्तराखण्ड की बेटी के साथ न्याय हो!