"जब तक मेरे बेटे का ब्राह्मण की बेटी से संबंध नहीं बने, तब तक आरक्षण रहे"
◆ IAS संतोष वर्मा ने एक कार्यक्रम में कहा
#SantoshVerma | IAS Santosh Verma |
रामलला के दरबार में धर्म ध्वजा स्थापना कार्यक्रम में मुझे न बुलाए जाने का कारण मेरा दलित समाज से होना है।
तो यह राम की मर्यादा नहीं,
किसी ओर की संकीर्ण सोच का परिचय है।
राम सबके हैं।
मेरी लड़ाई किसी पद या निमंत्रण की नहीं, सम्मान, बराबरी और संविधान की मर्यादा की है।
#Ayodhya
जब बिहार का सबसे पढ़ा-लिखा, ईमानदार उम्मीदवार 15,000 वोट पाता है…
और MMS वाले 1 लाख से ज़्यादा—
तो ये हार किसी नेता की नहीं,
हमारी सोच की है।
₹10,000 और 5 किलो राशन ने
बिहार को फिर 5 साल पीछे धकेल दिया।
प्रिय बीएलओ भाई और बहन
SIR का जो इम्प्रैक्टिकल टारगेट देकर आज आपके साथ जो अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और आपके ऊपर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है, वो बेहद निंदनीय और घोर आपत्तिजनक है। भाजपा राज ने तरह-तरह की प्रताड़ना और अशांति के सिवा किसी को कुछ नहीं दिया है।
भाजपा ने नई नौकरियाँ तो दी नहीं, जो चली आ रही हैं उन्हें भी इतना कठिन बना दिया है कि लोग हताश होकर नौकरी छोड़ दें। जो पूरे नहीं हो सकते ऐसे असंभव लक्ष्य देकर, बीएलओ से अपना घर-परिवार भूलकर मशीन का तरह काम करने की उम्मीद करना अमानवीय है। भाजपा ये सब काम अपने चुनावी महाघोटाले के लिए कर रही है लेकिन सवाल ये है कि जो बीएलओ हताश होकर नौकरी छोड़ रहे हैं या जो अपनी जान तक दांव पर लगा दे रहे हैं, वो इस सियासी घपलेबाजी का ख़ामियाज़ा क्यों भुगतें।
बीएलओ को किसी भी गलती के लिए ज़िम्मेदार ठहराना किसी भी परिस्थिति में न्यायसंगत नहीं है। देश भर के कर्मचारियों को एकजुट होकर अपनी आवाज़ उठानी चाहिए। हम हर बीएलओ के साथ हैं।
हमारी हर बीएलओ से अपील है कि इन हालातों में ऐसा कोई भी क़दम नहीं उठाएं जिससे आपका परिवार प्रभावित हो। माना भाजपा राज का ये बेहद दुखदायी काल चल रहा है परंतु धैर्य रखें और ये विश्वास भी कि हर क्रूर शासन के जुल्म का एक ना एक दिन अंत होता ही है, इसीलिए दुनिया में सच्चाई और अच्छाई आज तक बची है। लोगों को डराते-डराते भाजपा ख़ुद डर गयी है। भाजपाई राज की ज़्यादतियों से जनाक्रोश अपने पूरे उबाल पर है। भाजपा अपने अंतकाल की ओर है।
इन हालातों में अगर ईमानदारी से चुनाव हो जाएं तो भाजपाइयों के घरवाले तक भाजपा को वोट न दें। भाजपा जाए तो शांति आए!
भाजपाई चुनावी भ्रष्टाचार ने बीएलओ को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया है।
हर बीएलओ के दुख-दर्द का साथी।
आपका
अखिलेश
हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता…
अरे भाई पार्टी में पद के लिए इतना बेचैनी नईखे ठीक हो। कचरा इतना नहीं करो की वापिस में साफ़ करने में घिन बरे।ठीक हैं 🫵🏻
बिहार में जो खेल SIR ने किया है वो प. बंगाल, तमिलनाडू, यूपी और बाक़ी जगह पर अब नहीं हो पायेगा क्योंकि इस चुनावी साज़िश का अब भंडाफोड़ हो चुका है। अब आगे हम ये खेल, इनको नहीं खेलने देंगे।CCTV की तरह हमारा ‘PPTV’ मतलब ‘पीडीए प्रहरी’ चौकन्ना रहकर भाजपाई मंसूबों को नाकाम करेगा।
भाजपा दल नहीं छल है।
क्या हार में क्या जीत में,
किंचित नहीं भयभीत मैं,
संघर्ष पथ पर जो मिला,
ये भी सही वो भी सही…
जनता मेरे लिए तब भी सर्वोपरि थी, आज भी है और हमेशा रहेगी! मुद्दा तब भी उठल बा, आगे भी उठी...जय बिहार! 🙏🏻
लगता है लखनऊवालों से प्रतिस्पर्धा के चक्कर में किसी और ने भी नाम बदलना सीख लिया है, और ‘चुनाव आयोग’ का नाम बदलकर ‘विकास’ कर दिया है और उसे अपनी जुगाड़ी जीत का आधार बता रहे हैं।
यूपी में पिछले चुनाव में ख़ुद हारे हुए जो प्रतीक्षारत हैं वो भी आगे की जीत के दावे कर रहे हैं।
‘24 में हराया था, ‘27 में हटाएंगे
अपनी ‘पीडीए सरकार’ बनाएंगे!
भाजपा राज में अत्याचार के इस ‘रोड शो’ को देखने के बाद उप्र के माननीय मुख्यमंत्री महोदय किस मुँह से विदेशों में ‘रोड शो’ करेंगे। देखते हैं मुख्यमंत्री जी इन लोगों को बर्ख़ास्त करते हैं या थाने पर बुलडोज़र चलवाते हैं।
घोर निंदनीय भी, घोर दंडनीय भी।
भाजपा जाए तो महिलाओं का मान बच पाए!
पटना में बैठे कुछ वरीय पदाधिकारियों द्वारा जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिया जा रहा है कि जहाँ भी राजद का स्पष्ट बहुमत दिखाई दे, वहाँ काउंटिंग धीमा कर दिया जाए तथा जहाँ NDA की बढ़त दिखाई दे, वहाँ तुरंत रिजल्ट घोषित कर दिया जाए ताकि रिजल्ट में एनडीए को बढ़त दिखाकर गोदी मीडिया की मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके।
ऐसे पदाधिकारियों की पहचान कर ली गयी है उन्हें चेतावनी है कि अपनी कार्यशैली सुधार लें अन्यथा हर प्रकार के कठोर दंड के लिए तैयार रहें।