एक लड़के ने बताया कि वह अपने परिवार को ट्रेन में बैठाने के लिए महाराष्ट्र के कल्याण रेलवे स्टेशन गया था। ट्रेन दोपहर 12 बजे की थी लेकिन बाद में बताया गया कि वह 2 बजे आएगी।
लड़के ने प्लेटफॉर्म टिकट ले लिया था और परिवार के साथ इंतजार करता रहा। लेकिन ट्रेन लगातार लेट होती रही। शाम करीब 5 बजे वह परिवार को ट्रेन में बैठाकर वापस जाने लगा
तभी टीटी ने उसे रोक लिया और प्लेटफॉर्म टिकट दिखाने को कहा। उसने टिकट दिखाया तो टीटी ने कहा कि प्लेटफॉर्म टिकट 2 घंटे बाद एक्सपायर हो जाता है। इसके बाद उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगा दिया!
वीडियो में लड़के ने सवाल उठाया कि जब ट्रेन रेलवे की वजह से कई घंटे लेट हुई थी तो उसके इंतजार की जिम्मेदारी कौन लेगा??
उसने कहा कि उसने परिवार को छोड़ने के लिए वैध प्लेटफॉर्म टिकट लिया था, फिर भी उसे जुर्माना भरना पड़ा!
ये भी सवाल जायज है कि जब देरी रेलवे की तरफ से हुई थी तो उसकी सजा यात्री को क्यों मिली..?
स्टेट बैंक की शाखाओं में अब यह होने लगा है कि आप पैसा जमा करने जाओ तो बैंक के पास साइबर कैफे पर जमा करने के लिए बोलेंगे? आखिर क्यों? 30000 कोई छोटी रकम है? इनको किसलिए यहां बैठाया गया है लूडो खेलने के लिए?
हैलो
माननीय मुख्यमंत्री @vishnudsai जी
ऐसे रोड पर खड़े होकर आम नागरिकों से धन उगाही करने वाले पुलिसकर्मी सिर्फ पुलिस ही नहीं, सरकार की छवि भी खराब करते हैं।
वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि छत्तीसगढ़ पुलिस का एक अधिकारी रात में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मूवी देखकर लौट रहे युवक को अंधेरे में रोककर परेशान कर रहा है। युवक का आरोप है कि उसे मारा-पीटा गया और दबाव बनाया गया।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई की जगह पुलिस उसके बचाव में उतरती दिख रही है। आरोप है कि युवक जिस मकान में किराये पर रहता है, उसके मकान मालिक तक पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि उसे घर से निकाल दिया जाए।
वीडियो में युवक पुलिस के सामने कहता है कि उसे मुक्के मारे गए। इसके बावजूद कैमरे के सामने ही उसके साथ आक्रामक व्यवहार किया जाता है।
अगर वाकई पुलिस का पक्ष सही है तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लेकिन अगर कोई नागरिक सिर्फ इसलिए संदिग्ध मान लिया जाए कि वह "लोकल नहीं लग रहा था", तो यह बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है। कानून का काम नागरिकों की सुरक्षा करना है, उन्हें डराना नहीं।
@ChhattisgarhCMO@vishnudsai@CGPoliceDept
जब कहीं भी पुलिस कार्रवाई होती है तो कुछ लोग तुरंत केंद्र सरकार को दोष देने लगते हैं।
लेकिन इस बार मामला पंजाब का है, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है।
नौकरियों की मांग कर रहे युवाओं पर लाठियां बरस रही हैं।
अब बताइए, पंजाब के 'सुपर सीएम' अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी की जवाबदेही कौन तय करेगा?
BHU बना… तो उसके “कम्पटीशन” में AMU भी बना 🤔
नाम देखिए
📍 बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)
📍 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU)
एक हिंदू, एक मुस्लिम
दोनों यूनिवर्सिटी, नाम भी धर्म आधारित।
पर फर्क कहाँ आ गया?
👉 BHU सबके लिए है
👉 AMU “अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय” है
अब ज़रा जोर से बोलिए
❓ अल्पसंख्यक कौन है?
संविधान में कहीं साफ़-साफ़ लिखा है क्या?
कोई कॉलम, कोई परिभाषा, कोई निश्चित मापदंड?
❌ नहीं।
फिर भी AMU माइनॉरिटी यूनिवर्सिटी है और BHU न माइनॉरिटी है, न मेजॉरिटी। बस — सबका साथ, सबका विकास।
अब ज़रा इतिहास की दूसरी लाइन पकड़ते हैं 📜
🗓️ 1925 — बना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)
🗓️ 1926 — ठीक एक साल बाद बना एक और संगठन… 👉 तबलीगी जमात
अब गूगल कर लीजिए
🌍 दुनिया के कितने देशों ने तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाया है?
👉 9 देश
किन-किन में?
किर्गिज़स्तान, अज़रबैजान, अरब के कुछ देश…
और हैरानी की बात यह कि जिस संगठन का
📌 मुख्यालय भारत में है
📌 सुप्रीम कोर्ट से ~3 किमी
📌 संसद से ~4 किमी
📌 निज़ामुद्दीन में
उसके बारे में
❌ न Gen-X जानती है
❌ न Gen-Y
❌ न Gen-Z
❌ न बुज़ुर्ग
❌ न आम जनता
कोविड नहीं आता, तो शायद
👉 यह नाम भी सामने नहीं आता 😷
अब ज़रा और सीधे सवाल ❓
🩸 भारत-पाक विभाजन में
सबसे बड़ी भूमिका किसकी थी?
🩸 बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार में?
🩸 अफ़ग़ानिस्तान में हिंदुओं के सफ़ाए में?
और फिर पूछिए
🌍 दुनिया की सबसे बड़ी जमात कौन-सी है?
👉 जवाब वही है।
फिर सवाल यह भी
❓ जब 9 देशों ने बैन किया
तो भारत में
✔️ न बैन
✔️ न संसद में चर्चा
✔️ न राष्ट्रीय बहस
तो हम
👉 वाकई सुरक्षित हैं?
या
👉 बस चुप हैं?
📊 1931 की जनगणना याद कीजिए
अंग्रेज़ों ने 1881 से हर 10 साल में कराई।
1931 में
📍 सिंध में हिंदू ~70%
📍 लरकाना सहित कई इलाकों में 65–70%
तो ज़रा सोचिए
❓ क्या उन्होंने कभी सोचा होगा कि 15 साल बाद क्या होगा?
जवाब ज़ोर से बोलिए
👉 नहीं।
🔚 निष्कर्ष
ये सवाल
❌ न नफ़रत के हैं
❌ न डर फैलाने के
ये सवाल हैं
👉 इतिहास की अनदेखी
👉 नीति की असमानता
👉 संविधान की व्याख्या
👉 और चुप्पी की कीमत
सवाल पूछना ग़लत नहीं है।
ग़लत है — सवालों से भागना।
🗣️ सोचिए। पूछिए। समझिए।
सुप्रीम कोर्ट वरिष्ठ अधिवक्ता आदरणीय @AshwiniUpadhyay जी
@ARanganathan72@HMOIndia
इस Video को तबतक शेयर करें जबतक ये बत्तमीज़ पुलिस वाला सस्पेंड नहीं हो जाता 😡
धमतेरी में अर्जुनी SHO चंद्रकांत साहू ने रात को मूवी से लौट रहे आदमी को बाइक पर रोक लिया।
पत्नी-बच्चे के साथ था, वीडियो बनाने लगा तो थानेदार ने मारपीट शुरू कर दी।
पब्लिक रिकॉर्डिंग कानूनी है, फिर भी पुलिस वाले ताकत दिखा रहे हैं, कार्रवाई होनी चाहिए।
बबलू आलम और उसके साथी ने नाई की दुकान में काम करने वाले विकास की लकड़ी के फट्टे जिसके ऊपर कीले लगी हुई थी उससे मार मार कर विकास की हत्या कर दी गई।
बबलू आलम ने तो हत्या करने के बाद इंस्टाग्राम पर स्टेटस भी लगा दिया।
इस वीडियो का मुख्य सार (gist) नीचे दिया गया है:
आराम का ख़तरा: वीडियो में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि बच्चों को बहुत ज़्यादा ऐश-ओ-आराम में नहीं पालना चाहिए। यदि उन्हें हर चीज़ बिना किसी संघर्ष के आसानी से मिल जाएगी, तो वे अंदर से कमज़ोर (soft) हो जाएंगे।
दुबई के संस्थापक का संदेश: दुबई के निर्माता शेख राशिद के एक मशहूर कथन का ज़िक्र किया है। उसके दादा ऊंट पर चलते थे, उसके पिता भी ऊंट पर, वह मर्सिडीज पर, बेटा लैंडरोवर पर चलता है लेकिन उसका पड़पोता वापस ऊंट पर लौटेगा क्योंकि वह सबकुछ बर्बाद कर चुका होगें।
उन्होंने कहा था कि "कठिन समय मज़बूत लोगों को जन्म देता है, मज़बूत लोग अच्छा समय लाते हैं, अच्छा समय कमज़ोर लोगों को पैदा करता है और कमज़ोर लोग वापस कठिन समय लेकर आते हैं"।
धन बनाम शक्ति (अनुशासन): दुनिया के सबसे अमीर परिवार अपने बच्चों को सिर्फ़ पैसा या दौलत नहीं सौंपते, बल्कि वे उन्हें अनुशासन, नियम और संघर्ष करना सिखाते हैं। बिना आंतरिक शक्ति और क्षमता के मिली दौलत एक पीढ़ी में ही नष्ट हो जाती है।
सच्ची विरासत (Legacy): आप अपने बच्चों के लिए क्या छोड़कर जाते हैं (जैसे पैसा या संपत्ति), उससे कहीं ज़्यादा ज़रूरी यह है कि आप उनके भीतर किन गुणों (जैसे लचीलापन, मेहनत और संस्कार) का निर्माण करते हैं।
संक्षेप में, यह वीडियो सिखाता है कि बच्चों को जीवन में आने वाली मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार करना ही उनके लिए सबसे बड़ा उपहार है।
आदिनाथ मंदिर, जिसे आज 'आदिना मस्जिद' कहा जाता है, वहाँ आज भी देवी-देवताओं की मूर्तियाँ एवं मंदिर स्थापत्य के अवशेष स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, तो क्या बहुसंख्यक समाज को अपनी आस्था, अस्मिता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार नहीं है?
TMC को भी “युवराज” कल्चर खा गया।
सुनिए रिजू दत्ता बता रहे हैं कि कैसे एक युवराज और बाक़ी “नौकर” थे TMC में, और वो भी अलग अलग केटेगरी के नौकर थे।
पार्टी में जो बग़ावत करे सुनिए उसके साथ क्या क्या होता था।
जब BJP के लोग मारे जा रहे थे, तब ये लोग अंधे हुए पड़े थे!
जब बंगाल में BJP कार्यकर्ता मारे जा रहे थे, तब लोकतंत्र खतरे में दिखाई नहीं दे रहा था?
लेकिन आज अचानक लोकतंत्र, संविधान और अभिव्यक्ति की आज़ादी की चिंता क्यों होने लगी?
पत्रकार ने कपिल सिब्बल से लेकर राहुल गांधी तक सबको सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया!
वीडियो देखिए... जवाब सुनकर कई लोगों की बोलती बंद हो जाएगी। 👇🔥
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#BJP
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#KapilSibal
#PoliticalDebate
🚨फ़रूरख़ाबाद की घटना बताई जा रही है
बिना पिता की दलित बेटी का कहना है कि उनकी जमींन पर फिरोज मोहम्मद ख़ान ने जबरन क़ब्ज़ा कर रखा है ।
धर्म परिवर्तन का दवाब बनाया जा रहा है ।
धर्म परिवर्तन करो और मेरे बेटे से निकाह करोगे तो जमीन छोड़ेगे वरना नहीं छोड़ी जाएगी ।
बेटी न्याय के लिए sp ऑफिस में चक्कर लगा रही है ।
KATNI (M.P)📍
हमारे यहां ऐसा ही होता है...🫵
एक तरफ पति जिंदगी ओर मौत से लड़ रहा है दूसरी तरफ
पत्नी से एंबुलेंस साफ करवाई जा रही है इलाज बाद में होगा
सफाई पहले!!😳!!
क्या यही हमारा सरकारी सिस्टम है और इंसानियत है घायल का इलाज छोड़कर पत्नी से सफाई करवाना कौन सा नियम है
बंगाल में अभूतपूर्व संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद भी बीजेपी के कैंडिडेट को दौड़ाकर पीटने का आरोप लग रहा है TMC के लोगों पर।
इसको देखने के बाद तो डाउट हो रहा है कि अब भी कितने वोटर भयमुक्त होकर वोट दे पा रहे होंगे।
आदरणीय @DrPramodPSawant जी
कांग्रेस नेता की शिकायत पर गोवा पुलिस @GautamKhattar को गिरफ्तार करने हरिद्वार आई है।
प्रश्न यह है कि गौतम खट्टर ने जो कुछ कहा है वह सत्य या झूठ? यदि सत्य है तो FIR क्यों?
गौतम खट्टर नहीं मिले तो भाई को पकड़ लिया
@pushkardhami जी,
कृपया संज्ञान लें।
3 सवाल-
1)खुले में मुसलमानों से मारने का ऐसा आह्वान
तो बंद कमरे में क्या होता होगा ?
2)BJP नेता ने किसी अल्पसंख्यक संगठन को ऐसे मारने की बात की होती तो ?
3)खड़गे जी बंगाल में ममता के ख़िलाफ़ या केरल में लेफ्ट के ख़िलाफ़ ऐसा ज़हरीला बयान दे सकते हैं ?