#GodMorningWednesday
🌍 कबीर साहेब केवल एक कवि या बुनकर नहीं, बल्कि स्वयं पूर्ण परमेश्वर हैं। उन्होंने समय-समय पर आकर नानक जी, रविदास जी, मलूक दास जी और सूफ़ी संतों को सत्य ज्ञान देकर पार उतारा है। 🌟
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#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
कबीर परमात्मा सतयुग में 'सतसुकृत', त्रेतायुग में 'मुनीन्द्र', द्वापरयुग में 'करुणामय' तथा कलियुग में वास्तविक नाम 'कविर्देव' (कबीर प्रभु) से प्रकट हुए।
God Kabir In 4Yugas
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कबीर परमात्मा सतयुग में 'सतसुकृत', त्रेतायुग में 'मुनीन्द्र', द्वापरयुग में 'करुणामय' तथा कलियुग में वास्तविक नाम 'कविर्देव' (कबीर प्रभु) से प्रकट हुए।
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द्वापरयुग में 'करुणामय' रूप में आए कबीर साहेब ने रानी इन्द्रमती और उनके पति चंद्रविजय को अपनी शरण में लिया था। जब सर्प ने रानी इन्द्रमती को डसा, तब कबीर साहेब ने उनके गुरु रूप में प्रकट होकर उनकी रक्षा की थी।
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♦️द्वापरयुग में कबीर साहेब 'करुणामय' ऋषि के रूप में प्रकट हुए थे।जब पांडवों का यज्ञ सफल नहीं हो रहा था, तब कबीर साहेब ने अपने भक्त सुपच सुदर्शन के रूप में आकर उस यज्ञ को सफल करवाया था।इसका प्रमाण संत गरीबदास जी की वाणी में मिलता
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🦅 सतयुग में कबीर परमेश्वर 'सतसुकृत' रूप में विष्णु जी के वाहन गरुड़ से मिले और उन्हें वास्तविक ज्ञान दिया:
"ज्ञानी गरुड़ है दास तुम्हारा, तुम बिन नाहीं जीव निस्तारा।
इतना कह गरुड़ चरण लिपटाया, शरण लेवो अविगत राया।।"
जहां हिन्दू अटके है वहीं मुसलमान अटके है इन दोनों को उपर उठाएंगे जहां एक हुए थे और जहां से अनेक हुए, एक में मिलावेगे।
~ संत रामपाल जी महाराज
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#WatchegaFromHome#किसको_मिले_कबीरभगवान
While traditions generally hold Swami Ramanand Ji as the spiritual master of Kabir Ji, Kabir Ji assumed the role of a disciple merely to establish a righteous precedent.
On a spiritual level Swami Ramanand Ji himself recognized the absolute
#किसको_मिले_कबीरभगवान
कबीर परमेश्वर, सतगुरु के रूप में विश्नोई पंथ के संस्थापक संत जम्भेश्वर जी को समराथल (राजस्थान) में मिले थे। जम्भसागर (शब्द 90) में उल्लेख है:
जां जां पवन आसण, पाणी आसण, चंद आसण।
सूर (सूर्य) आसण गुरू आसण संमरा थले।
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