सतलोक में प्रत्येक हंस आत्मा का परमात्मा जैसा नूरी शरीर है। जिसका तेज 16 सूर्यों के समान है।
जबकि काल लोक/पृथ्वी लोक पर सभी का पांच तत्त्व से बना नाशवान शरीर है। जिसमें हजारों तरह की बीमारियां सदैव बनी रहती हैं।
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काल लोक/पृथ्वी लोक में सुविधाजनक वस्तुएं होने के बावजूद यहां कोई भी सुखी नहीं है।
यहां हर पल मौत का तांडव होता है।
यहां हर व्यक्ति के मन में रोग तथा मृत्यु का भय हर पल रहता है।
सतलोक में ना रोग का, ना मौत का भय। वहां किसी वस्तु का अभाव नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति का न
काल लोक/पृथ्वी लोक पर साधना करके जीव कुछ समय स्वर्ग रूपी होटल में चला जाता है। फिर अपनी पुण्य कमाई खर्च करके वापिस नरक तथा चौरासी लाख प्राणियों के शरीर में जाता है।
सतलोक में भक्ति नष्ट नहीं होती। सतलोक शाश्वत स्थान है। वहां हंस आत्माएं हैं।
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सतलोक निरामय लोक है जहाँ वृद्धावस्था व रोग नहीं है।
जबकि पृथ्वी लोक में इन दोनों स्तिथियों से कोई नहीं बचा है।
#KaalLok_Vs_Satlok
Sant Rampal Ji Maharaj
काल लोक/पृथ्वी लोक में सब कर्म बंधन से बंधे हैं। जीव को तीनों गुणों के प्रभाव से विवश कर सब कार्य करवाया जाता है
#KaalLok_Vs_Satlok
Sant Rampal Ji Maharaj
सतलोक में जाने के बाद जीवात्मा का जन्म-मरण हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
लेकिन सतभक्ति के अभाव में पृथ्वी के प्राणी 84 लाख योनियों के चक्कर में भटकते रहते हैं।
#KaalLok_Vs_Satlok
Sant Rampal Ji Maharaj
सतलोक में जाने के बाद जीवात्मा का जन्म-मरण हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
लेकिन सतभक्ति के अभाव में पृथ्वी के प्राणी 84 लाख योनियों के चक्कर में भटकते रहते हैं।
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Sant Rampal Ji Maharaj
काल लोक/पृथ्वी लोक पर साधना करके जीव कुछ समय स्वर्ग रूपी होटल में चला जाता है। फिर अपनी पुण्य कमाई खर्च करके वापिस नरक तथा चौरासी लाख प्राणियों के शरीर में जाता है।
#KaalLok_Vs_Satlok
Sant Rampal Ji Maharaj
सतलोक Vs काल लोक/पृथ्वी लोक
सतलोक में जन्म व मृत्यु नहीं है।
जबकि पृथ्वी पर कुछ भी स्थाई नहीं है। सब नाश्वान है।
#KaalLok_Vs_Satlok
Sant Rampal Ji Maharaj
काल लोक/पृथ्वी लोक में जन्म-मृत्यु और वृद्धावस्था सबसे बड़े दुख हैं।
जबकि सतलोक में सर्व सुख हैं। न ही जन्म-मृत्यु का दुख, न ही वृद्धावस्था का दुःख।
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Sant Rampal Ji Maharaj
सतलोक निरामय लोक है जहाँ वृद्धावस्था व रोग नहीं है।
जबकि पृथ्वी लोक में इन दोनों स्तिथियों से कोई नहीं बचा है।
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Sant Rampal Ji Maharaj
काल लोक/पृथ्वी लोक में सब कर्म बंधन से बंधे हैं। जीव को तीनों गुणों के प्रभाव से विवश कर सब कार्य करवाया जाता है
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Sant Rampal Ji Maharaj
सूरह फुरकान 25 आयत 52-59 में कहा है कि कादर अल्लाह कबीर है जिसने सब रचना की है। उसकी खबर किसी बाखबर से जानो। इससे स्वसिद्ध है कि कुरआन का ज्ञान अधूरा है।
#मुसलमान_नहीं_समझे_ज्ञान_क़ुरान
BaaKhabar Sant Rampal Ji
कुरआन ज्ञान देने वाले ने सूरह अंबिया-21 आयत 92, 30, 31, 32 में अपनी इबादत करने को कहा है तथा अपनी महिमा बताई है। सूरह बकरा-2 आयत नं. 255 में अपने से अन्य परमेश्वर की महिमा बताई है
#मुसलमान_नहीं_समझे_ज्ञान_क़ुरान
BaaKhabar Sant Rampal Ji
कबीर जी ने बताया है कि नबी मुहम्मद की आत्मा शिव (तमगुण) देवता के (शंकर द्वीप) लोक से आयी थी। भक्ति में ध्यान अधिक रहता था। जब उनको काल के भेजे फरिश्ते जिब्राईल ने काल ब्रह्म वाला ज्ञान
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BaaKhabar Sant Rampal Ji
जब कबीर खुदा ने देखा कि नेक आत्मा मुहम्मद काल के जाल में फँस गए हैं, तब उसे मिले। उनके आग्रह पर उनको ऊपर अपने लोक में जहाँ खुदा का सिंहासन है, लेकर गए।
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BaaKhabar Sant Rampal Ji
सूरह मुल्क-67 आयत 9 से पहले वाली आयतों में बताया है कि जो इस कुरआन का ज्ञान बताने वाले नबी से लोग कहते हैं कि तू झूठ बोल रहा है। और अल्लाह की हिदायतों की पालना न करके गलत साधना करके मरेंगे। फिर वे नरक में डाले जाएँगे तो उनसे दोजख के दरोगा पूछेंगे
#मुसलमान_नहीं_समझे_ज्ञान_क़ु