राजा ���िहिर भोज गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक थे। उस समय तक ओबीसी जातियाँ नहीं हुआ करती थीं। किसान-पशुपालक जातियाँ ही क्षत्रिय थीं। वही युद्ध करती थीं।
राजा मिहिर भोज महान गुर्जर शासक थे। उत्तर पश्चिम भारत में गुर्जरों के बड़े बड़े क़िले और अपने मंदिर थे। कुछ अभी भी बचे हैं।
उस समय यादव, कुर्मी, कुशवाहा, मराठा सब राजा यानी क्षत्रिय होते थे। जम्मू के राजा चर्मकार थे, जिनका ज़िक्र बाबर ने अपनी जीवनी बाबरनामा में किया है। कलवार, राजभर, पासवान सबमें राजा होते थे। ये योद्धा जातियाँ थीं।
दरअसल इन जातियों ने “राजा और पुजारी में बड़ा कौन” विवाद में पुजारी को श्रेष्ठ मानने से मना कर दिया। इस लिए पुजारियों ने उनसे जनेऊ यानी यज्ञोपवीत करने से मना कर दिया। यह मान्यता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंब��डकर की है। (पूरी जानकारी के लिए पढ़ें उनकी किताब शूद कौन थे?)
जनेऊ का हक छीनकर उन्हें जबरन शूद्र बनाया गया। जो पुजारी को बड़ा मानने को तैयार हो गए वे क्षत्रिय मान लिए गए।
धर्म सत्ता को हमेशा राज सत्ता के नीचे होना चाहिए। राजा और पुजारी में राजा को बड़ा होना चाहिए।
यूरोप में ये लड़ाई राज सत्ता ने जीती। वहाँ पुजारी यानी पोप हारा। इसलिए यूरोप का विकास हुआ।
भारत में धर्म सत्ता यानी पुजारी जी�� गए। इसलिए भारत अंधविश्वास में डूब गया। एक के बाद हमलावर आए और भारत के लोगों पर राज करते रहे।
धर्म सत्ता यानी पुजारियों ने इन हमलावर शक्तियों का दरबारी बनना स्वीकार कर लिया। शादी वग़ैरह करने लगे।
जब तक नंद वंशी, मौर्य वंशी, पाल वंशी, गुर्जर वंशी, राजभर वंशी, मराठा वंश, कुश वंशी, कुर्म वंशी, जाट, निषाद, यदुवंशी लोगों के हाथ में तलवारें थी, भारत मज़बूत था।
कहते हैं कि जो जीता वह सिकंदर। लेकिन वह नंद (सेन) वंशी मगध साम्राज्य के डर से पीछे लौटा।
फिर एक समय आया जब भारत पर धर्म ���त्ता हावी हुई। पुजारी मज़बूत हो गए। वे लोगों को स्वर्ग और नर्क भेजने लगे।
राजतिलक करने लगे।
राजगुरू ब�� बैठे।
मंत्री बन गए।
धार्मिक कहानियों से अपनी सत्ता मज़बूत कर ली।
पुनर्जन्म, भाग्यवाद, अवतारवाद, कर्म फल सिद्धांत आया। जाति श्रेष्ठता का धार्मिक आधार बना।
जिन किसान और पशुपालक जातियों ने उनकी सत्ता को मानने से मना कर दिया, उनका जनेऊ संस्कार करने से पुजारी वर्ग ने मना कर दिया। इस तरह सामाजिक ढाँचे में उनका पतन हो गया।
वही आज का ओबीसी हैं।
इसी क्रम में उनसे हथियार रखने का हक़ छीन लिया ग��ा।
यहीं से भारत का पतन शुरू होता है।
हमलावर जान गए कि भारत में सिर्फ़ एक जाति को ही लड़ने का हक़ है।
इस लड़ाई में हार तय थी।
सिख गुरुओं ने जब किसानों को हथियार पकड़ा दिए तो सिख साम्राज्य बन गया। सिखों ने पुजारी संस्था को ही नकार दिया। उनमें कोई ब्राह्मण नहीं है। कोई भी ग्रंथी बन सकता है। मराठा सेना में सभी जातियाँ थीं। वे मज़बूत सेनाएँ थीं।
भारतीय सेना में अब सभी जातियाँ हैं। पारा मिलि���री में भी सभी हैं। भारत की सीमा फिर से सुरक्षित है। ��ब कोई भारत को हरा नहीं सकता।
निवेदन है कि जिन लोगों ने भी मणिपुर का वह वीडियो शेयर किया है, उसे हटा लें।
इसके तीन कारण हैं।
1. सरकार इस वीडियो को प्रचारित करने पर अब कार्रवाई करेगी। आप जानते ही हैं कि वंचित समुदायों के लोग जब इन विवादों में फँसते हैं तो उन्हें बचाने कोई नहीं आता। विवादों में फँसकर नेता बनना सवर्ण युवाओं का विशेषाधिकार है। वह आपके लिए नहीं है। पढ़ाई, बिज़नेस और नौकरी पर ध्यान दें। कोई क्रांति नहीं हो रही है।
2. आप इस बात को समझिए कि हाई कोर्ट के एक बेवक़ूफ़ी भरे फ़ैसले के बाद से मणिपुर हिंसा में डूब गया है। दोनों तरफ़ से हिंसा हो रही है। एक ह्वाट्सऐप फारवर्ड के जवाब में दूसरा समुदाय नई हिंसा कर देता है और उसकी प्रतिक्रिया में पहला समुदाय फिर हिंसा कर रहा है। जब आप एक ऐसा वीडियो शेयर करते हैं तो अनजाने में आप अन्य समुदाय को नई हिंसा के लिए उकसा रहे हैं।
3. ���रकारें आती जाती रहती हैं। महाबली इंदिरा गांधी और वाजपेयी भी हारे हैं। नरेंद्र मोदी भी अमृत पीकर नहीं आए हैं। सब जाएँगे। पर राष्ट्र किसी भी नेहरू, इंदिरा, वाजपेयी और मोदी से बड़ा है। इसलिए राष्ट्र की सोचिए। राष्ट्रीय एकता की सोचिए।
हिंसा रोकने में अगर कोई भूमिका नहीं निभा सकते तो कम से कम हिंसा भड़काने में हिस्सेदार न बनें।
इस मैसेज को शेयर करें ताकि हमारा कोई भोला भाला युवक उत्तेजना में अपना नुक़सान न कर ले।
- दिलीप मंडल
मोदी सरकार की बेशर्म चुप्पी और अकर्मण्यता ने मणिपुर को एक ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया है जहाँ हिंसा, हत्या, आगजनी की घटनायें आगे बढ़कर महिलाओं को निर्वस्त्र करने और गैंगरेप करने तक पहुँच गई है।
देश-विदेश में घूम - घूमकर चुनाव प्रचार और ड्रामेबाजी करने वाला प्रधानमंत्री ने अब तक इसपर चुप्पी साधे रखी है!
#ManipurViolence
#नरेंद्र_मोदी_इस्तीफा_दो
अब बस भी करो।
बाढ़ दिखाने के लिए बेचारे रिपोर्टर्स को कमर या गले तक पानी में उतार देना कहाँ तक सही है। कैमरामैन जिस नाव ��र है, वहाँ से दिख तो रहा है कि पानी है। कपड़ा गीला हो जाता होगा। 🐍 बिच्छु हो सकता है पानी में। कोई मेन होल 🕳️ खुला हो सकता है।
पानी में उतार देने से एक्स्ट्रा क्या पता चला? चार पैसे के लिए चैनल कुछ भी कर लेते हैं।
हिंदुस्तान? वो कौन-सा देश है? मुग़ल थे हिंदुस्तान के बादशाह। वे बोलते थे हिंदुस्तान। मुग़ल ख़त्म, हिंदुस्तान खत्म।
अभी तो भारत यानी इंडिया 🇮🇳 ही है।
लोग पुरानी आदत छोड़ना नहीं चाहते।
वो जो बेचते थे दवा-ए-दिल
वो दुकान अपनी बढ़ा गए …
भ्रष्टाचार से लड़ने के नाम पर जिस ईडी को तोता की तरह इस्तेमाल किया जा ��हा है उसका निदेशक ही अवैध करार दिया गया!
जिस ईडी के छापे से विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है सुप्रीम कोर्ट ने उसके निदेशक संजय कुमार मिश्रा के सेवा विस्तार को अवैध कह दिया! मिश्रा की नवंबर 2018 में ईडी निदेशक के रूप में केवल 2 साल के लिए नियुक्ति हुई थी! लेकिन मोदी सरकार ने ग़लत तरीक़े अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए उसका सेवा विस्तार किया!
ईडी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ बनी सबसे बड़ी संवैधानि�� संस्थान है! जो लोग इसके सर्वोच्च पद पर ग़लत तरीक़े ��े किसी को बैठाकर अपने विरोधियों को कुचलने की साज़िश कर सकते हैं उनके हाथ में यह देश क़तई सुरक्षित नहीं है! है कि नहीं !!
टांगो इसको।
फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के बाद दोष सिद्ध हुआ तो इसको फाँसी होनी चाहिए। पता नहीं सरकार कर क्या रही है? देशद्रोह से बड़ा अपराध और क्या हो सकता है? इस मामले में ढिलाई से ग़लत संदेश जाएगा। @narendramodi@AmitShah
रवीश, बरखा दत्त और राणा अयूब वग़ैरह काफ़ी दिन से कह रहे हैं कि ट्रोल उनका उत्पीड़न करते हैं। ये बात मेरी समझ से परे हैं। किसी ने अपने डाटा से, अपने फ़ोन से, अपना समय लगाकर आपको ट्रोल कर दिया, मतलब आपके ट्वीट पर कमेंट लिख दिया। उससे आपका उत्पीड़न कैसे हो जाता है?
मुझे इतने लोग ट्रोल करते हैं। मै�� तो सबकी इज़्ज़त करता हूँ। उनको रुपए नहीं दे पाता हूँ। चाय नहीं पिला पाता हूँ। पर सम्मान देता हूँ।
किस बात के महान? सती तक तो ख़त्म नहीं कर पाए। थोड़ी सी भी इंसानियत होती तो यमुना किनारे ज़िंदा जलाई जा रही औरतों को देखकर जग जाती। इन बातों से मतलब ही नहीं था। भारतीय इलीट के साथ मिलकर मौज कि��ा, मुजरा देखा, महल और मक़बरा बनाया। कैसे महान? https://t.co/6veaz0DBv4
देश में अभी दो ही विकल्प है - NDA और UPA. वैसे NDA सभी सार्वजनिक उपक्रमों को बेचकर अगले दस सालों में दलितों को कोर्ट पैंट और बनियान मुक्त कर देगी...सिर्फ़ लंगोट बचेगा. बाद में ना कहना कि मैंने चेताया नहीं था.
वैसे एक और विकल्प है - लोकसभा में ज़ीरो सीट जीत��र प्रधान मंत्री बनना.😜
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#BoycottZomato
सुनो @zomato. तुम्हारा विज्ञापन जातिवादी और अपमानजनक है। माफ़ी माँगो और वापस लो।
इनपर मुक़दमा ठोकिए। ये #$%£€₹ ऐसे नहीं सुधरेंगे। @deepigoyal
अगर किसी शहरी को बीच-बीच में गाँव जाना अच्छा लगता है तो लगभग पक्का है कि वह प्रभावशाली जाति का है। मैं अनुसूचित जाति के सैकड़ों, बल्कि हज़ारों अफ़सरों और कर्मचारियों को जानता हूँ। किसी ने भी रिटायरमेंट के बाद रहने के लिए गाँव में घर नहीं बनाया। गा��व वंचित समुदायों के लिए नर्क कुंड हैं।
रिज़र्वेशन के विरोधी राष्ट्रीय एकता के दुश्मन हैं। 87% SC, ST, OBC आबादी, जिनमें ज़्यादातर हिंदू हैं, का विकास और उनकी हिस्सेदारी का विरोध करने वालों की देशभक्ति संदिग्ध है। पाकिस्तान और होनोलुलु में आरक्षण नहीं है। आरक्षण विरोधियों को वहाँ भेज देना चाहिए। वहीं वे अपना मेरिट दिखाएं। भारत तो संविधान से ही चलेगा।