भगवान विश्वकर्मा के पावन जयन्ती पर्व के शुभ अवसर पर विश्व शिल्पी को सादर प्रणाम करते हुए भारत महान के यशस्वी प्रधानमंत्री एवं विश्व में कीर्तिमान स्थापित करने वाले अद्वितीय नेता माननीय नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएँ ।
दुर्भावना को जन्म देने वाले पूर्व के सभी कानून को समाप्त कर सद्भावना स्थापित करने का कीर्तिमान स्थापित चाहिए। देह से अमर होना बहुत दुष्कर है किन्तु कल्याणकारी कृत्य से अमरता निश्चित वरण करती है। ईश्वर आपको अपनी कृपा से आच्छादित रखें। जय भारत, जय भारती, जय भाजपा,वन्दे मातरम्
बच्चों के चरित्र निर्माण जैसे अनेक विषय पर व्याख्यान ने उपस्थितजन का मनमोह लिया। "शिक्षा के उद्देश्य राष्ट्र एकता में सहायक" विषय ने प्रभावित किया।
जय हिन्द वन्दे मातरम् जयभारत जय भारती
स्वतंत्रता दिवस समारोह, हम सबके लिए गौरव का दिन, प्रयागदत्त पाठक इण्टर कालेज पट्टी-बहराइच, हर्षोल्लास भरे वातावरण में राष्ट्र की आध्यात्मिक उन्नति, सामाजिक सद्भाव, आर्थिक समरसता तथा कठिन परिश्रम एवं संघर्ष के साथ साथ धैर्य, सहनशीलता, करुणा, उदारता का संकल्प सुखद रहा।
यशस्वी राजनेता, लोकप्रिय विधायक तथा आमजनमानस के प्रति उदार, समर्पित, अहर्निश सेवामहे पथ के पथिक माननीय देवेन्द्र प्रताप सिंह जी! कोटि कोटि प्रणाम
रक्षार्थ संघर्ष करते हुए आपने साबित किया है कि आज के समय में भी नेक जन हैं आपकी सदैव जय हो। वन्देमातरम्
@MLCDPSingh@DPSinghMLC
@MLCDPSingh@myogiadityanath आपकी कृपा और न्याय प्रियता को कोटि कोटि प्रणाम
पूज्य महाराज माननीय मुख्यमंत्री जी! दयालु हैं अब निश्चित ही हमसबके का कल्याण करेंगे
सादर
तदर्थशिक्षक सपरिवार आजीवन ऋणी रहेगा
रक्षा हेतु अपने प्राणों को उत्सर्ग करने वाले लोग हैं ऐसी निकृष्ट विचारधारा का अंकुरण असहनीय और चिंतनीय है।
आओ परिवार को संजोयें पारिवारिक संस्कार को पाश्चात्य संस्कृति की आधुनिकता से दूर रखते हुए धर्म- अधर्म के समझ की नींव पर पोषित करें।
वन्दे मातरम् जयतु भारतम्
""धरती के स्वर्ग दिव्य भारत का संक्रमणकाल""
भारत सांस्कृतिक संक्रमण के दौर में है,सामाजिक ढांचे में विकृति का प्रवेश तो राजनैतिक दलों के स्वार्थ ने करवा ही दिया है किन्तु संवैधानिक अधिकार स्वतंत्रता की गलत व्याख्या ने नवीन पीढ़ी के बच्चों को दिग्भ्रमित किया है जिसको माननीय
ऐ आधार पर जीवन जीने की स्वीकार्यता बलवती थी।
विषय चाहे तात्कालिक प्रकरण चेतन अग्रवाल का हो या अन्य किसी बहन का, न जाने कितने प्रकरण इस वैदिक सनातन संस्कृति से पोषित देश में घटित हो रहें हैं। अब कितना पतन होगा पावन,दिव्य,प्रेम से भरपूर देश का? हम दिव्य सात्विक प्राणिमात्र की
हे ईश्वर! सम्पूर्ण विश्व में जो भी किसी भी प्रकार की दुर्घटना का शिकार हो जाये तो ऐसी मानवीय संवेदना बलवती करना जिससे पीड़ित राजनीति का शिकार न बने, सरकार और समाज दोनों के द्वारा इतनी सहायता मिल जाये कि मानवता का आभास हो जाये।
हे प्रभु! सभी की रक्षा करें।
है समय के साथ।
जिस देश में शहीदों के परिवार की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु कोई मजबूत व्यवस्था नहीं है तो दुर्घटनाओं से प्रभावित जन के संबंध में अपेक्षाएँ बेईमानी है।
पीड़ित परिवार के पास आज के विकसित समाज में भी भाग्य को कोसने के अतिरिक्त कुछ नहीं है।
रहे हैं और कमजोर शोषित होने पर मजबूर हैं। निर्बल को अनसुना तथा भयभीत किया जाता रहा है।
किसी भी दुर्घटना से प्रभावित परिवार,स्वजन के उस मर्म को कौन सुनता है? जिसकी भरपाई हो ही नहीं पायेगी। सामर्थ्यवान बच निकलते हैं अपने पहुॅंच, रसूख के बल पर। कमज़ोर की आवाज़ दब या दबा दी जाती
सबसे दु:खद आज के दौर में है कि चाहे जितनी बड़ी दुर्घटना हो जाये, एक-दो दिन बहुत अधिक एक सप्ताह हो-हल्ला होता है फिर विषय को बड़ी सफाई के साथ ऐसे मोड़ दिया जाता है जैसे कुछ हुआ ही न हो। दोहरा चरित्र चाहे किसी(सरकार, समाज)का भी हो बहुत दु:खदायी होता है।
सामर्थ्यवान हमेशा सताते
बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई
इक शख़्स न जाने कितनों को वीरान कर गया.....
श्रद्धेय गुरुवर स्मृतिशेष ओमप्रकाश त्रिपाठी जी की प्रथम पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि शत शत नमन, कोटिशः वन्दन ।
ऊॅं शान्ति ऊॅं
😭😭
18 जून 2025 एक ऐसी तिथि जिसकी स्मृति से अन्तर्मन में कचोट उत्पन्न हो जाती है इतना व्याकुल शायद ही जीवन में कभी हुआ मन। जब सूचना मिली कि पूज्य गुरुश्रेष्ठ को प्रभु ने अपने चरणों में स्थान दे दिया,सहसा वज्रपात हुआ धरती खिसकी पैर डगमगाये,बेसुध निर्जीव सा हो गया, सब कुछ खो गया था।
सहजता उनका पर्याय बन चुकी थी। यही सहजता आजीवन उनके आचरण में समाहित हो गई। उनके आशीर्वाद और स्नेह पर मानो अधिकार हो गया था। स्नेह में कभी किसी तरह की गिरावट नहीं आई। यादों के झरोखे से कहने को बहुत कुछ है किन्तु वाणी मौन हो जाती है जब ईश्वर की कृपा कम हो जाती है।