कोई इंसान लॉजिक से सोचना चाहता है, लेकिन 2nd side की 'वाइब' उसके सब-कॉन्शियस पर हमला करती है।
यह दिमाग और दिल के बीच का युद्ध बन जाता है, जिससे एनर्जी डिस्ट्रॉय होती है।
#mental pressure #brainfog
"कर्म" और "उजागर" होने का सिद्धांत
_उजागर होना: जब कोई राज बाहर आता है, तो वह अक्सर 'दंड' नहीं बल्कि 'शुद्धिकरण' (Purification) की एक प्रक्रिया होती है।
समाज भले ही तोड़ दे, लेकिन उस वक्त इंसान के पास अपनी पूरी सच्चाई के साथ खड़े होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
#LifesGood
"कर्म" और "उजागर" होने का सिद्धांत
दफन होना: जब कोई गलती या राज हमें अंदर से सुधार देता है (Self-correction), तो वह कर्म धीरे-धीरे 'हलका' होने लगता है। प्रकृति उसे दफन रहने देती है क्योंकि उसका मकसद (आपको सिखाना) पूरा हो चुका है।
#lifelesson#lestraîtres
हम खुद ही बकवास लोगों को choose करते हैं,और उनसे उम्मीद करते हैं कि वो हमे समझे,
कितना complicated बना लेते है
Firstly लाइफ में chu***a लोगों को choose करना बंद करना होगा...
जो जितने attractive और अच्छे दिखते हैं, वो उतने ही नमूने होते हैं...
#lifeseries#fuck
क्षणभंगुरता: दर्शन कहता है कि जो चीज़ तर्क से परे है और जिसका कोई ठोस आधार (Common ground) नहीं है, वह केवल मन का एक 'खेल' है।
यह लगाव 'बौद्धिक' (Intellectual) नहीं है, बल्कि केवल 'मानसिक' (Mental projection) है।
साहित्यकार मुक्तिबोध अक्सर 'अंतर्मन के अंधेरे' की बात करते हैं।
कई बार हम अपनी वर्तमान बोरियत या पढ़ाई के भारी दबाव (Pressure) से बचने के लिए अनजाने में 'Distractions' ढूंढ लेते हैं।
दर्शनशास्त्र में एक अवधारणा है कि जब इंसान का जीवन बहुत ज्यादा 'अनुशासित' (Disciplined) हो जाता है,
तो उसका मन अनजाने में 'अराजकता' (Chaos) की तलाश करने लगता है।
सार्त्र (Sartre) जैसे अस्तित्ववादी मानते हैं कि इंसान अपने चुनावों से बनता है।
भावनाएं आपके बस में नहीं हो सकतीं,
लेकिन 'Action' (क्रिया) आपके बस में है।