The media that ignored Jantar Mantar protest all this time has finally arrived.
Their first job? Smear the protest with baseless propaganda. Just look at this ABP News reporter.
Delhi Police is planning to crackdown on our protest during night or early hours of morning - silencing the voice of youth.
We request everyone to join us for night vigil at Jantar Mantar, so that together we can march to Sansad on 20th
धर्मेन्द्र प्रधान को पद से हटाने के बजाए
मोदी सरकार के कहने पर,
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से ���ोनम वांगचुक को जबरन हटा दिया !
डरपोक
कायर
बुजदिल
निकम्मी
नाकारा
संवेदनशून्य सरकार !
एक को हटाओगे, तो दूसरा खड़ा होगा।
अभिजीत द��पके ने ऐलान किया है,
मैं आज से अपना अनशन शुरू कर रहा हूं… आंदोलन ख़त्म नहीं होगा।उनका संदेश साफ़ है कि आंदोलन जार��� रहेगा।
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
और इस तरीके से चादर से Cover करके ताकि कोई वीडियो ना बना सके उठा कर ले जाना उस शख़्स को जो देश के तमाम बच्चो के भविष्य के लिए अनशन पर है कहा तक उचित है ?
क्या सही तरीका ये नहीं कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा करवा देते , या आप सरकार के किसी मंत्री के द्वारा बातचीत करके उनका अनशन तुड़वाने की कोशिश करते ���ेकिन जबरदस्ती इस तरीके से अनशन तुड़वाना ये अनशन और देश का अपमान है
लोकतंत्र की हत्या है ! ......
दमन हर चीज का हुआ है ! तो दमन सत्ता के गलियारों में घर कर गया उस घमंड का भी होगा जिसके सामने आम नागरिकों की आवाज नहीं सुनाई दे रही !......
सोनम वांगचुक जी पिछले 20 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे हैं।
उनका स्वास्थ्य ठीक रहे, यह देश का हर नागरिक चाहता है। लेकिन कोर्ट के आदेशों और मेडिकल इमरजेंसी की आड़ लेकर आज सुबह जिस तरह पुलिस के दम पर उन्हें जबरन कपड़ों के आड़ में छुपाकर अस्पताल ले जाया गया, वो तरीका किसी भी लोकतांत्रिक देश में सही नहीं ठहराया जा सकता।
आंदोलन खत्म कराने का यह पुलिसिया शॉर्टकट बेहद निराशाजनक है। अगर शासन में बैठे ज़िम्मेदार लोगों में थोड़ी भी संवेदनशीलता होती, तो वे प���लिस भेजने के बजाय खुद आकर उनसे बात करते, उनकी जायज मांगों को सुनते और सम्मानपूर्वक उनका अनशन ख़त्म कराने की कोशिश करते।
लेकिन जायज सवालों से मुंह चुराकर केवल प्रशासनिक नियमों के पीछे छिपना वर्तमान सत्ता के उस गहरे अहंकार को दिखाता है जो जनभावनाओं को समझने की क्षमता खो चुका है।
जिम्मेदार नेतृत्व कर्ताओं को यह समझना होगा कि जनता और युवाओं की आवाज़ को इस तरह दबाया नहीं जा सकता, क्योंकि लोकत��त्र पुलिस की लाठी से नहीं, बल्कि असहमतियों का सम्मान करने और जनता की समस्याओं के वास्तविक समाधान से मजबूत होता है!
सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से जबरन हटाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के संवैधानिक अधिकार पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
लोकतंत्र में असहमति का जवाब संवाद से दिया जाता है, दमन से नहीं। किसी भी सरकार की परिपक्वता उसकी आलोचना सुनने और बातचीत करने की क्षमता से तय होती है, न कि विरोध की आवाज़ को बलपूर्वक दबाने से।
लोकतंत्र की असली पहचान संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही है - डर, दमन और चुप्पी नहीं।
श्री सोनम वांगचुक जी को ‘बल-प्रयोग’ करके, ज़बरदस्ती उनके आमरण अनशन स्थल से उठाकर ले जाना अत्यंत निंदनीय समाचार है। आज सुबह घटी ये घटना थोड़ी ही देर में पूरे देश और संपूर्ण विश्व में फैल चुकी है। सारी दुनिया और देशभर में श्री सोनम वांगचुक जी को लेकर गहरी चिंता है और भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश भी। जो लोग सादी वर्दी में इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए धोखे से अचानक घुसे थे, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए।
ये हमारी पुरज़ोर माँग है कि श्री सोनम वांगचुक जी की चिकित्सा ‘न्यायिक निगरानी’ में हो क्योंकि श्री सोनम वांगचुक जी का जीवन मानवता, पर्यावरण-संरक्षण, लोकतांत्रि��� मूल्यों, युवा ऊर्जा की प्रेरणा, साइंस और इनोवेशन के लिए अनमोल है।
हमारे देश की जनता व समस्त विश्व इस समय भाजपा सरकार को संदेह और सवाल भरी संदिग्ध नज़र से देख रहा है। दमनकारी राजनीति करनेवाली भाजपा सरकार की इस अवांछनीय कार्रवाई ने इंटरनेशनल लेवल पर हमारे देश की मानवीय और डेमोक्रेटिक इमेज को बेहद धूमिल और खंडित करने का काम किया है।
भाजपा ने न कभी गांधी जी में विश्वास किया, न कभी उनके गांधीवादी तौर-��रीक़ों में।
भाजपा की नकारात्मक विचारधारा ही ‘विवाद’ की है; संवाद की नहीं।
भाजपा निराशा का पर्याय बन चुकी है।
भाजपा सरकार नहीं, अहंकार है!
भाजपा की सोच दरारवादी है, इसीलिए जहाँ भी एकता, सौहार्द और एकजुटता होती है, भाजपा डरकर प्रतिक्रियावादी बनकर आंदोलनों को तितर-बितर कर देती है लेकिन भाजपा भूल गयी है कि आज की नई पीढ़ी ‘डिजिटल यूनिटी’ के माध्यम से वैचारिक क्रांति लाने में सक्षम है. ऐसा हुआ है, हो रहा है और होगा भी…
@Wangchuk66
This is the condition of country,
No one is caring about the health of Sonam wangchuk sir who is on hunger strike at Jantar Mantar,
Where is goverment??
कभी ‘माँ गंगा के उद्धार के लिए’ अनशन पर बैठे श्री जी. डी. अग्रवाल जी ने निरंतर अपनी माँग बीजेपी सरकार के सामने रखी थी लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई थी और वो अपना जीवन खो बैठे थे।
श्री सोनम वांगचुक जी और केन-बेतवा के आदिवासी-किसान आंदोलनकारियों को भाजपा से किसी भी प्रकार की सहानुभूति और सहृदयता की अपेक्षा नहीं करन�� चाहिए। इसीलिए आप अनशन के माध्यम से अपने बहुमूल्य जीवन को दाँव पर न लगाएं। आप सबके अदम्य संघर्ष और संकल्प की शक्ति जब भाजपा को हटाने के, हम सबके आंदोलन से जुड़ेगी, तो भाजपा हारेगी और हमेशा के लिए हट -मिट जाएगी।
जो भाजपाई और उनके संगी-साथी महात्मा गांधी जी में विश्वास नहीं करते हैं, वो उनके संघर्ष और विरोध के तरीकों में क्या विश्वास करेंगे।
अन्दर तक हिला कर रख दिया इस विडियो ने 😳
"मैं BJP नेता का बेटा हूँ लेकिन बच्चों की मौत पर ख़ामोश नहीं रहूँगा।"
घर छोड़कर जंतर-मंतर पहुँचे युवक का भावुक बयान "अगर 30 बच्चों की मौत तुम्हें नहीं झकझोरती, तो 31वाँ मेरा नाम समझ लेना।"
एक ब्यान जिसने राजनीति से ज़्यादा इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए।