🚨"जब फांसी के तख्ते पर नाथूराम गोडसे ने 2 बार कपड़ों में मूत दिया…
जल्लाद साहब ने खुद बताई वो कहानी जो इतिहास की किताबों में नहीं मिलेगी!"
शत-शत नमन उस अंबाला सेंट्रल जेल के जल्लाद साहब को… 🙏
जिन्होंने भारत के "पहले आतंकवादी" मादरजात स्वान का पिल्ला, हरामी नाथूराम गोडसे को फांसी पर लटकाया।
जल्लाद साहब ने अनऑफिशियल बताया
जब सुरक्षा सेल से आंतकवादी नाथूराम को फांसी के तख्ते पर ले जाया गया, तो 2 बार उसने कैदी कपड़ों में ही डर के मारे मूत दिया था।
लेकिन जेल के नियम होते हैं साफ कपड़ों में ही फांसी पर लटकाना होता है।
तो 3 ड्रेस मंगवानी पड़ी।
फिर स्वान का पिल्ला आंतकवादी नाथूराम गिड़गिड़ाया...
"मुझसे गलती हो गई… मेरा ब्रेन वॉश किया गया… मुझे बख्श दो…"
पर तब तक डॉक्टर मजिस्ट्रेट आ चुके थे।
चूंकि उस जमाने में डायपर नहीं होते थे, तो स्वान का पिल्ला नाथूराम को 4 कपड़े की लेयर का एक खद्दर का कच्छा पहनाया गया।
देशी भाषा में इसे "बोचा बंद" कहा गया
ताकि ये फांसी घर के किवाड़ ना खराब कर दे।
(फांसी घर में 2 किवाड़ होते हैं जो सॉफ्ट खींचने से खुल जाते हैं)
जैसे ही फांसी की रस्सी खिंची…
और बाहर सेंट्रल जेल के गेट पर और जेल के अंदर देशभक्तों का कोरस गूंज उठा....
"ला ला लाला… मर गया मादरचो…"🤣🤣🤣
मित्रों इस पोस्ट को देखकर अंधभक्त का गांव में आग लग जाएगी, इसलिए इस पोस्ट को रिपोस्ट कर के अंधभक्तों को टैग किजिए, फिर देखिए अंधभक्त कैसे बिलबिलाते है।