इस देश में बेरोजगारी की हालत देखनी हो तो कल का KBC एपिसोड जरूर देखिए। यह आपको सोचने पर मजबूर कर देगा।
हॉट सीट पर पहुंचा विवेक दिहाड़ी मजदूरी करता है। उसके पिता और मां भी मजदूरी करते हैं। विवेक के ₹1 लाख जीतने पर अमिताभ बच्चन ने उसके पिता से पूछा—“अब तो खुश हैं?”
पिता ने हाथ जोड़कर कहा—“अगर यहां बैठे किसी व्यक्ति के पास मेरे बेटे के लिए छोटी-सी भी नौकरी हो, तो दे दीजिए। जिंदगी भर दुआ करेंगे।”
यह अपील सुनकर अमिताभ बच्चन ने भी दर्शकों से विवेक को नौकरी देने की अपील की।
पूरे संवाद के दौरान विवेक सिर झुकाए बैठा रहा।
सोचिए, जो युवा अपने ज्ञान के दम पर KBC की हॉट सीट तक पहुंच सकता है, उसे इस देश में एक छोटी-सी नौकरी के लिए भी अपील करनी पड़ रही है। यही तस्वीर हमारी बेरोजगारी की हकीकत दिखाती है।
NCLT - “नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल”
किसान 50 हज़ार न चुकाए तो ज़मीन नीलाम हो जाती है। Salaried एक EMI न भर पाएं तो घर पर बैंक के गुंडे पहुंच जाते हैं। गरीब छात्रों को तो शिक्षा तक के लिए लोन नहीं मिलता।
मगर, चुनिंदा "मित्रों" के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति है - कितना भी निकालो, जो मर्ज़ी चुकाओ।
मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना रखी हैं - एक चंद अरबपतियों के लिए, दूसरी बाक़ी सबके लिए।
ये वीडियो भारत में सत्तारूढ़ दल BJP के कर्नाटक यूनिट @BJP4Karnataka की तरफ़ से पोस्ट किया गया है। PM मोदी दुनिया में भारत को ‘Mother of Democracy’ के रूप में पेश करते हैं। लेकिन ये ‘हिंसात्मक वीडियो’ बताता है कि BJP अपने विरोधियों से कैसे निपटता चाहती है!
22 लाख होम लोन न चुकाने पर मध्यम वर्ग के लोगों का घर नीलाम हो जाता है! इस नाइंसाफी के ख़िलाफ़ मध्यवर्ग को आवाज़ उठाना चाहिए। पर वो कहाँ उठाएगा। वह तो ‘राष्ट्रवाद के चिलम में धर्म की अफ़ीम’ पी रहा है और उधर असली माल सुभाष चंद्रा जैसे अरबपति को उड़ाने को मिल रहा है…
Zee समूह के मालिक सुभाष चंद्रा पर 22 हज़ार करोड ₹ का कर्ज था।NCLT ने चंद्रा साहब को बड़ी राहत दी है।अब उन्हें सिर्फ 6.5 करोड़ ही चुकाने होंगे।ऐसी लोकलुभावन योजनाएं सिर्फ धन्ना सेठों के लिए होती है।किसान,मज़दूर,छोटे व्यापारी के घर तो बैंकों के गुंडे पहुँच जाते हैं !
सुभाष चंद्रा तो अगस्त में ही दीवाली मान रहे हैं…
गाँव वालों को अपने बच्चों के लिए नहीं चाहिए बेहतर स्कूल तो क्यों शोर मचाना? आगे से किसी गांव में जाने पहले से पूछकर जाना! गाँव वालों को बेहतर स्कूल चाहिए होता तो खुद भी आंदोलन कर लेते। विधायक, सांसद का घेराव कर लेते! उन्हें जो मिल रहा है, उतने से खुश हैं!
तस्वीर जयपुर के एक गांव की है। कॉकरोच जनता पार्टी वाले एक खुशहाल गांव में स्कूल सुधार की आवाज उठाने जा रहे थे!
“आप हमको चाइनीज़ बोलते हो तो बहुत गुस्सा आता है, बहुत दुख होता है… प्लीज़ हमको ऐसे मत बोलो। हम इंडिया हैं।”
ईटानगर की इस छोटी बच्ची की बात सिर्फ़ एक मासूम शिकायत नहीं है, बल्कि उस सोच पर सवाल है जो भारत के नक्शे को तो पहचानती है, लेकिन भारत के लोगों को नहीं।
चेहरा अलग दिखा तो “चाइनीज़” कह दिया।
कब समझेंगे हम कि नॉर्थ-ईस्ट कोई विदेश नहीं, भारत ही है। और वहाँ के लोग भी किसी से कम भारतीय नहीं हैं।
शायद देशभक्ति सिर्फ़ झंडा लगाने से नहीं, अपने ही देश के लोगों को पहचानने और सम्मान देने से भी साबित होती है।
इससे पहले कि हम कहें कि हम इंडिया नहीं हैं, हमें चाइनीज मत कहो।#NortheastIndia #India #Racism #StopRacism #ArunachalPradesh #Indian
Spoke to Abdul, whose father was murdered by BJP members.
While talking to him, I broke down. But it was Abdul who gave me strength and said, “Tootna nahi hai… Humein school theek karne hain. Papa chale gaye, lekin hum school theek karke rahenge.”
Abdul, mere bhai, I am deeply sorry for your loss. Your courage says so much about the values and strength your father gave you. Even after losing him, you are the one giving strength and courage to others.
I’m sorry that today I had no words to console you or lift your spirits. All I can say is that you are family now, and we will always stand with you and your family. You are not alone in this fight.
The country is proud to have a son like you. Even after losing your father to a hate crime, you remain determined to improve the schools in your locality and make sure other children have a better future.
Your father would be proud of you, Abdul.
“हमारे पास खोने के लिए अब झारखंड में बचा क्या है? मैं इकत्तीस साल का हो गया हूँ। मेरे पिता किसान हैं। उन्होंने अपनी सारी जमा पूँजी लगा दी मेरे पीछे। मैं उनसे आँख मिला के देख नहीं पाता हूँ।”
भारत के युवा की कड़वी सच्चाई। कितने सशक्त ढंग से इन्होंने व्यक्त की है। आँखें भर गईं।
धन्यवाद अभिनव ज़बरदस्त ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए।
- जवाहरलाल नेहरू ने अपने कार्यकाल में 33 सरकारी कंपनियों की स्थापना की थी,
- लाल बहादुर शास्त्री ने अपने छोटे से कार्यकाल में 5 सरकारी कंपनियाँ बनाईं,
- इंदिरा गांधी ने तो सरकारी कंपनियाँ बनाने में अपने पिता को भी पीछे छोड़ दिया, उनके कार्यकाल में कुल 66 सरकारी कंपनियाँ बनाई गईं...
- मोरारजी देसाई ने 9 और राजीव गांधी ने 16 सरकारी कंपनियाँ बनाईं,
- वीपी सिंह ने 2, और पीवी नरसिम्हा राव ने 14 कंपनियाँ बनाईं,
- एच डी देवी गौड़ा और आई के गुजराल ने 3-3 कंपनियाँ बनाईं,
- अटल बिहारी वाजपेयी ने 17 कंपनियाँ बनाईं, लेकिन उन्होंने 7 बड़ी कंपनियों का निजीकरण भी किया...
- मनमोहन सिंह ने अपने 10 साल के कार्यकाल में 23 सरकारी कंपनियाँ बनाईं और 3 को बेचा,
- भारत के इतिहास में नरेंद्र मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने एक भी नई सरकारी कंपनी नहीं बनाई, बल्कि 23 सरकारी कंपनियों को बेचा..
- अब आप तय करें.. कि देश हित और देश को मजबूत करने का काम किसने किया और देश की संपत्तियों को अपने मित्रों को औने-पौने दामों में बेचकर देश को खोखला करने का काम कौन कर रहा है।
अन्ना और निर्भया से बड़ा था छात्र आंदोलन। एक 'मज़बूत' सरकार को छात्रों का मज़बूत जवाब?
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