एक और वीडियो आ गया Part 2
लेकिन असली ट्विस्ट तो अब आया है
रात जो कुछ हुआ उसने सिर्फ माहौल नहीं बदला कई रिश्तों की सच्चाई भी सामने ला दी
लेकिन सच को न कैमरे की ज़रूरत होती है न शोर की
वीडियो आते रहेंगे दावे होते रहेंगे लेकिन अंत में पहचान उसी की बचेगी जिसने अपने संस्कार अपनी मर्यादा और अपना चरित्र नहीं छोड़ा।
सोशल मीडिया की दौड़ कुछ दिनों की होती है लेकिन सम्मान की उम्र बहुत लंबी होती है
सत्ता पक्ष के 240 सांसदों को साइड कर दिया जाए…
तो बाक़ी बचे हुए लगभग 300 सांसदों में से…
क्या कोई एक भी ऐसा सांसद हैं…
जो हनुमान बेनीवाल की तरह कार्यरत हो…??
सड़क से लेकर संसद तक…
पाँच साल चौबीस घंटे लगातार…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कहा जाता है कि 18 घंटे काम करते है, कभी छुट्टी नहीं लेते…
उनकी हक़ीक़त तो हमें नहीं पता…
लेकिन हनुमान बेनीवाल को हम अपनी आँखों के सामने देखते है
18 घंटे नहीं चौबीसों घंटे…
और मजाल है कभी किसी ने बेनीवाल को छुट्टी मनाते या घूमने जाते हुए देखा हो…
आपको एक फ़ोटो या विडियो तक नहीं मिलेगा घूमते हुए या छुट्टी मनाते हुए का…!!
और संसद का कोई ऐसा सत्र नहीं रहा होगा…
जहाँ घंटों पूरे सदन को सुनने के बाद…
अपने हिस्से के 2-3 मिनट के समय का पूरा utilisation ना किया हो…!!
ऐसा दूसरा कोई सांसद हो तो ज़रूर बताइएगा…!!
हनुमान बेनीवाल जैसी दमदार और आक्रामक भाषण शैली आज न भाजपा में आसानी से दिखती है, न कांग्रेस में।
अगर भाजपा के पास ऐसा वक्ता होता तो विपक्ष को जवाब देना मुश्किल हो जाता, और कांग्रेस के पास होता तो सत्ता पक्ष पर लगातार भारी पड़ता...
सांसद हनुमान बेनीवाल को सदन में अपनी बात रखने के लिए 3 मिनट का समय दिया गया...तो, उनका मजाकिया अंदाज देखने की मिला।
सांसद बेनीवाल ने कहा कि "रात को 12 -12 बैठकर हम आपका कोरम पूरा करते हैं। और आप 3 मिनट, 5 मिनट, 8 मिनट ?
जो लोग इस आंदोलन से सीधे जुड़े हुए थे, जंतर - मंतर भी गए, रील बनाने के लिए नहीं आया था मैं उसके अंदर। जंतर -मंतर पर थे, यहां कर थे, सब जगह तमाम जगह पर थे और लड़ाई लड़ी। और जो नेता सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ता है, उसको टाइम देना चाहिए।
अभी - धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं
खुद शिक्षा मंत्री थे तब - "पेपर मैंने थोड़े करवाया है"
राजस्थान में रहते 21 पेपर लीक का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले डोटासरा जी🤡
बीकानेरी भुजिया….!!
ये अमिताभ बच्चन जो भुजिया दुनिया भर को खिला रहे हैं…
वो बीकानेर के सबसे बेकार क्वालिटी के भुजिया हैं…
टॉप क्वालिटी चाहिए तो लाइन में लगना पड़ेगा…😂
खाने पीने की हर प्रसिद्ध चीज़ का यही हाल है…
अगर आपको घर बैठे आसानी से उपलब्ध हो रही है…
इसका मतलब वो authentic नहीं है…
Authenticity चाहिए तो गलियों के चक्कर काटिए
लाइनों में लगिए… और वास्तविक स्वाद से रूबरू होइए…!!
आज इस आवाज में दर्द है...
राजवीर सिंह चलकोई को हम सुनते रहे हैं। उनकी बोली में हमेशा एक खनक रहती है अल्हड़पन झलकता है। मैंने इस पूरे वीडियो में देखा कि वो बात कहीं भी नहीं है। क्यों?
क्योंकि हमारे आत्मसम्मान पर चोट ही हुई है
राज्यपाल महोदय ने एक आदेश जारी कर राजस्थान के सभी विश्वविद्यालयों में मराठी के केंद्र खोलने के लिए कह दिया है। दूसरी तरफ वर्षों से राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे लोग अभी तक राजस्थान के विश्वविद्यालयों में राजस्थानी के केंद्र नहीं खुलवा पाए हैं। स्कूलों में राजस्थानी की पढ़ाई शुरू नहीं करवा पाए हैं। राजस्थान की राजभाषा नहीं बनवा पाए हैं। पीड़ा तो है। सच्ची है। झलकेगी ही। छलकेगी ही।
राजस्थान वालों के चेहरे पर ऐसा जोरदार झापड़ मारा गया है, जिसका अहसास तो हुआ है लेकिन आत्म गौरव खो चुके लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि रिएक्ट क्या करना है और कैसे करना है। इस पीड़ा को सभी सुनें और और सोचें कि हम अभागे लोग कहां खड़े हैं?
वीडियो साभार @republic
जयपुर के विजय शर्मा का परिवार…
विजय शर्मा खुद कोर्ट में LDC के पद पर कार्यरत थे
एयरपोर्ट कॉलोनी में दो मकान, करोड़ों की ज़मीन…
पत्नी गृहणी थी…
एक बेटी आयूषी शर्मा….
और एक मानसिक रूप से विकलांग छोटा भाई…
साल भर पहले विजय शर्मा की मौत हो गई…
पिता के पीछे अनुकंपा नियुक्ति के तौर पर घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलनी थी…
आयुषी चाहती थी ये नौकरी उसे मिले…
लेकिन नौकरी ले ली आयुषी की माँ ने…
आयुषी ने सात लाख रुपये में भाड़े के क़ातिलों को बुलाया…
अपनी ही माँ का मर्डर करवाया…
और उसे एक्सीडेंट की शक्ल दे दी…
लेकिन पुलिस के सामने चालाकी टिक नहीं पायी…
और सारा मामला खुल गया…
पिता प्राकृतिक मौत मर गए…
माँ को बेटी ने मार दिया…
बेटी जेल चली गई…
अब घर में एक अकेला मानसिक रूप से अस्वस्थ छोटा भाई बचा है…!
13 साल की मासूम से
हैवानियत करने वाले दरिंदो के लिए राजस्थान
पुलिस ने बेहद सही तरीका ईजाद किया है...
सड़क पर परेड... और डंडा बहनों के हाथ में...
क्या कहना है आपका... ✍️
इस वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि उसने अपनी गाड़ी बीच सड़क में लाकर रोक दी। पुलिसकर्मी लगातार उसे हटाने का अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं दिखता। कानून से ऊपर खुद को समझने वाली मानसिकता और दूसरों की सुरक्षा की अनदेखी किसी भी समाज के लिए ठीक नहीं है।