दशकों से चले आ रहे प्रोपेगैंडा और आजादी के बाद हुए 'भीमकरण' ने हिंदुओं, खासकर ब्राह्मणों को एक विचित्र किस्म के अपराधबोध में धकेल दिया है।
अपराधबोध का स्तर भी कुछ ऐसा कि अपने ही समाज के एक असाधारण विद्वान बालक की कालजयी उपलब्धि पर वो भीतर ही भीतर प्रफ्फुलित तो हो रहे हैं परंतु उसे बाह्य रूप से उद्घोषित करने में, वामी-भीम प्रोपेगैंडा के समक्ष तर्क देने में सकुचा जा रहे हैं मानों यजुर्वेद के सबसे दुष्कर खंड का पारायण करना कोई पाखंड का, पाप का काम हो।
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गिल्ट ट्रैप में डूबे समस्त हिंदुओं और ब्राह्मणों को अपना कंठस्वर प्रखर करके उनसे पूछना चाहिए कि जिन चीनी एथलीटों के बरक्स खड़े करके इस बालक की उपलब्धि को तौला जा रहा है, उनके गोल्ड जीतने से आखिर चीन के गरीबों का क्या भला हुआ?
अरुंधति रॉय के बुकर प्राइज जीतने से देश की जीडीपी कितनी बढ़ी?
अंबेडकर की हजारों करोड़ की मूर्तियां लगाने से राष्ट्रहित में कौन सी आहुति डाल दी गई?
बीथोवेन और मोजार्ट द्वारा अमानुषिक जटिल संगीत रचना करने से कितने दुर्भिक्ष पीड़ितों को अन्न प्राप्त हुआ?
रोनाल्डो-मेसी के गोल करने से आखिर हमारा क्या सम्बंध?
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दरअसल गलती ऐसे कुतर्कियों की भी नहीं है जो इस बालक का मख़ौल उड़ा रहे हैं। वो पारसी RF Nariman (Ex. SC Judge) द्वारा जेन्द अवेस्ता कंठस्थ करने पर तो खूब प्रसन्न होते हैं।
परंतु उससे कई गुना कठिन यजुर्वेद के सांगोपांग स्मरण किये जाने पर चिढ़ उठते हैं क्योंकि 1835 में मैकाले मिनट से, उसके दुष्प्रभावों के परिणाम से स्वंय हम भारतीय ही अनजान हैं और अंदर ही अंदर अपनी सभ्यता की उच्चतम उपलब्धियों को हिकारत के भाव से देखने लगे हैं।
बड़े ही सुनियोजित तरीके से देश में साइंस Vs सनातन का ऐसा बीज रोप दिया गया है कि त्रिपुंड तिलक वाले ब्राह्मण कुमार को देखकर ही लोग उसे पाखंडी मानने लगे हैं।
आश्चर्यजनक रूप से ये बीज रोपने वाले यह नहीं बताना चाहते कि आखिर कैसे श्रीनिवास रामानुजन जैसे गणितज्ञ अपनी कुलदेवी की प्रेरणा से हार्डी जैसे गणितज्ञ को भी मात दे देते थे।
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ताज्जुब तो इसपर होना चाहिए कि कला, खेल, साहित्य, संगीत को आखिर कबसे इस तराजू पर तौला जाने लगा कि उनसे जीडीपी में क्या बढ़ोतरी हुई अथवा उससे कितने रॉकेट लांच होने लगे?
तिसपर इन उज्जडों को कौन बताए कि मानव सभ्यता का चर्मोत्कर्ष सदैव से इस बात से तौला जाता रहा है कि आखिर उनके मानवीय गुणों की अभिव्यक्ति शारीरिक या मानसिक रूप से कितने उच्च स्तर पर की जा सकती है?
एक पल के लिए सोचिए कि लियोनार्डो डा विंची या माइकलएंजेलो की पेंटिंग, इलियड के होमर, टॉलस्टाय के एना कैरेनिना को देखकर अगर कोई कहे कि इससे इसरो के कितने रॉकेट लांच होंगे तो उसपर हँसने के सिवा क्या किया जा सकता है?
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इसीलिए अपनी सभ्यता में, अपनी परम्पराओं में, उसके झंडाबरदारों में और Refined Tastes of Civilisation के ऊपर गर्व महसूस करना सीखिए....
क्योंकि इंग्लिश इतिहास पर अंग्रेज, फ्रेंच फैशन पर फ्रांसीसी, पेंटिंग पर इतालवी और वैदिक ज्ञान की महान पौर्वात्य परंपरा, आपकी वैदिक धरोहर वाली कुलपरंपरा पर आप गर्व नहीं करेंगे तो कौन करेगा?
@VBkramnik@WesleySo_ 3 probable reasons for over intoxication, drugs overdose, heart failure. In any of the 3 reasons vlad is responsible?? Please someone explain
@WesleySo_ Maybe there are different reasons for death , then will you all say sorry to vlad or like Magnus- Hans episode keep hiding faces!! Common guys at least the real reason come out then blaze your guns
@akaNemsko No one knows exactly the reason for death and all giving judgement. In this world everyone can give an opinion on public figures (good or bad) , How the hell he can be the reason for death .
@VBkramnik@WesleySo_ It is even quite surprising for me , no one knows exactly the reason for death and all giving judgement. In this world everyone can give an opinion on public personalities (good or bad) , where the hell he can be the reason for death .
@Atheist_Krishna Management was superb , cleanliness was on another level but on mouni amavasya there was too much crowd I tried to volunteer but even I somehow saved myself.. overall an amazing experience