सोचिए आप सुबह जगते हैं और फिर रात में सो जाते हैं। सुबह जागने से लेकर रात के सोने के बीच आप जो भी करते हैं, या तो प्रत्यक्ष याअप्रत्यक्ष उसका संबंध राजनीतिक से नहीं रहता है
आप पाएंगे आपका 80% काम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति से संबंध रख रहा है।
यानी अगर हम यह कहते हैं हमें राजनीति से क्या मतलब तो शायद अपने दिनचर्या के 80% महत्व पूर्ण कामों को नेगलेक्ट करते है। और फिर आपके हिस्से का राजनीति ऐसे व्यक्ति करने लगता है जो ना योग्य है ना सामाजिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है ना वैसा अनुभव रखता है। राजनीति का मतलब सिर्फ वोट देना चुनाव की बात करना पार्टी पॉलिटिक्स का बात करना नहीं होता है। राजनीति का मतलब होता है विधायिका द्वारा बनाया गया नियम जो आम जनता के लिए होता है वह नियम देश के हर एक नागरिक को समझना चाहिए उसके प्रति जिम्मेदारी रखनी चाहिए और जोउस काबिल नहीं है जो इस काबिल है उनका फर्ज बनता है कि वैसे व्यक्ति को बताएं कि देश में जो कानून बना है आपके हित के लिए है या नहीं है।
इससे क्या होगा संसद के अंदर बोली गई हर एक बात जनता आम जन देश का 140 करोड़ आबादी अपने हित में विश्लेषण कर पाएगा और चुनाव के समय उसे विश्लेषण का आधार बनाकर मतदान करके लोकतंत्र को सच्ची मजबूती प्रदान कर सकता है।
इसीलिए राजनीति से दूर मत जाइए उसे समझिए अपने हिस्से का राजनीतिक खुद कीजिए। भले वह अप्रत्यक्ष हो या प्रत्यक्ष हो।
महान क्रांतिकारी शहीद ए आजम भगत सिंह जी ने भी कहा है की विद्यार्थी को युवा को राजनीति से नहीं भागना चाहिए बल्कि राजनीति उसके लिए क्या नीति बना रहा है उसे समझना चाहिए परखना चाहिए।।
धन्यवाद राहुल जी।
आप ने यह साबित कर दिया कि अगर नियत साफ हो तो संवेदना भी स्व वेदना के बराबर होता है। छात्र के समस्या को छात्र बन कर समझने के लिये। शुक्रिया।
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