हिंदुओं आपलोगों ने गौर किया पिछले 70 वर्षों में ये पहला चुनाव है जहां हिन्दू, ब्राह्मण,गौत्र, तिलक पर ही चर्चा हो रही है,पहले तो टोपी, मजार, बुरखे का ही बोलबाला रहता है
बंगाल जीतना कोई एक राज्य में सरकार बनाना मात्र नहीं है...
बल्कि एक ऐसे प्रदेश को देश की मुख्यधारा में लाना है जो,
कि अब पूरी तरह से देशद्रोहियों और अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों का अड्डा बन चुका है।....
ममता बनर्जी ने यह स्वीकार करके कि उन्होंने नंदीग्राम में BJP नेता को फोन कर मदद मांगी थी,खुद को/पार्टी को एम्बैरेस करने से ज्यादा उन तथाकथित पत्रकारों को एमबैरेस किया है जो बंगाल में दीदी की लहर बता रहे। हांलाकि सूअर से भी मोटी चमड़ी के स्वामी ऐसे पत्रकारों को फर्क पड़ेगा नहीं।
परमवीर सिंह को हटाया तो उगल दिया कि अनिल देशमुख के इशारे पर सचिन वाजे सौ करोड़ महीने की उगाही करता था,
अब अनिल देशमुख हटा तो ?? पूरी दाल ही तो काली नही है?
यदि राजनीति सेवा है तो फिर सैलरी और पेंशन क्यों...
और अगर राजनीति जॉब/व्यवसाय है तो उसका एग्जाम क्यों ना हो.?
जो क्वालीफाई करेगा उसे ही चुनाव लड़ने का मौका दिया जाए..?