Congratulations to all the Padma Awardees for their outstanding contributions to our nation. Their excellence, dedication and service across diverse fields enrich the fabric of our society. The honour reflects the spirit of commitment and excellence that continues to inspire generations.
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सोहराई जतरा :- “एक रूढ़िजन्य आदिवासी विरासत”
यह जतरा सिर्फ एक मेला नहीं,बल्कि देवताओं की पूजा के साथ प्रकृति प्रेम और पशुधन प्रेम का त्योहार है ।
🌱त्योहार , रीति रिवाज और प्रथाएँ समाज के लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है , उनके पूर्वजों और देवताओं से जोड़ती है
🌱क़ानून की भाषा में - ये प्रथाएँ आदिवासी को उनके संवेधैनिक अधिकार , पेसा क़ानून , इत्यादि, से भी जोड़ती है
🌱 संविधान में आदिवासी शब्द कहीं नहीं लिखा - किंतु 13(3) में “रूढ़िजन्य प्रथाओं” यानी कस्टमरी लॉ का उल्लेख है
🌱आदिवासी रूढ़िजन्य प्रथाएँ - सामाजिक तथा धार्मिक प्रथाओं , दोनों का मिश्रण है
🌱 आदिवासी समाज में रीति रिवाज और धार्मिक आस्था एक दूसरे से जुड़े हैं ।
🌱बिना धार्मिक आस्था के आदिवासी रीति रिवाज के पालन का कोई आधार नहीं
🌱आधुनिक युग में कई बार पूर्ण रूप से रूढ़िजन्य विधियों का पालन नही हो पाता- ऐसे में रूढ़िजन्य आदिवासी की , अपने पूर्वजों और देवताओं पर उनकी आस्था ही उनकी पहचान है
सोहराई जतरा में कुल देवता , प्रकृति और पशु की पूजा की जाती है । उन्हें आभार व्यक्त किया जाता है । धान कटाई के बाद , इस त्योहार में कृषि उपकरणों की सफ़ाई और मरम्मती की जाती है
आज के जतरा में नवागढ़, कुचु , ओरमांझी और गेतलसूद पंचायत के गाँव वासी की सहभागिता हुई