हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष की यात्रा पर हमारे सहयोगी प्रशिक्षु विद्यार्थियों ने यह संक्षिप्त वृत्त चित्र तैयार किया है।
आप सभी के अवलोकनार्थ प्रस्तुत है इस डॉक्यूमेंट्री- ''हिन्दी पत्रकारिता : 200 वर्ष की गौरव गाथा'' का प्रथम भाग।
इसके द्वितीय भाग का प्रसारण भी शीघ्र किया जाएगा। आप सभी के सुझाव आमंत्रित हैं।
निर्माता-निर्देशक - डॉ. राकेश कुमार उपाध्याय,
संपादन- आदर्श पांडेय
#Hindi #हिंदीपत्रकारिताके200साल #उदंतमार्तण्ड #जुगलकिशोरशुक्ल
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#हिंदीपत्रकारितादिवस की सभी को शुभकामनाएं
उदंत मार्तण्ड के 200 वर्ष की सभी को शुभकामनाएं।
हिंदी गूंजे जग झकझोर, युगल किशोर-युगल किशोर।
200 साल पहले विचारों और शब्दों के सृजन रूपी संसार में एक अद्भुत और साहसपूर्ण कार्य हुआ था। उदंत मार्तण्ड का बीजारोपण हिंदी पत्रकारिता, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी महानतम सूर्योदय था। इस महान सूर्योदय के उद्गाता पंडित युगल किशोर शुक्ल की स्मृति में शत श्रद्धांजलि...।
आज उस महान मृत्युंजयी समय की स्मृति हमें पुलकित करती है। #हिंदीपत्रकारिता के परिवेश में नूतन साहस और पराक्रम करते रहने का अमर संदेश देती है।
#उदंतमार्तण्ड का अमर संदेश है कि अब आगे अंग्रेजों और अंग्रेजियत की और प्रभुसत्ता स्वीकार नहीं। औपनिवेशिक गुलामी के सभी चिन्हों को जड़ से मिटाकर विकसित भारत-2047 के स्वप्न को साकार करना ही 200 साल की हिंदी पत्रकारिता का अगला चरण है।
सभी को पुनः शुभकामनाएं।
पुराने पत्रकार मित्र, और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के वर्तमान चेयरमैन आदरणीय श्री किशोर भाई मकवाणा से प्रेमपूर्ण भेंट हुई।
20 साल पहले गुजरात के डांग में साथ रिपोर्टिंग का अवसर मिला। निजी चर्चा में अनेक पुरानी स्मृतियों में हम दोनों ने गोते लगाए।
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बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं।
चार आर्य सत्य सहित मुक्ति या निर्वाण के लिए सम्यक अष्टांगिक आर्य मार्ग (सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाणी, सम्यक् कर्म, सम्यक् आजीव, सम्यक् प्रयत्न, सम्यक् स्मृति तथा सम्यक् समाधि) का प्रवर्तन भगवान बुद्ध ने किया।
वह आर्य मार्ग के अनुयायी और प्रणेता थे, वह जानते थे कि आर्य संतानें और आर्य विचार भारत भूमि की संसार को देन है। दुर्भाग्य देखिए कि हमारे वामपंथी इतिहासविदों ने एक बार भी इस प्रश्न का उत्तर देना उचित नहीं समझा को बुद्ध ने स्वयं को और अपने मार्ग को आर्य क्यों कहा था? यदि आर्य कहीं से आक्रमणकर आए होते तो बुद्ध को अपने पुरखों से उनके मूल स्थान का पता अवश्य रहा होता। लेकिन संपूर्ण बौद्ध साहित्य में किसी आर्य संबंध में किसी कथित विदेशी मूल का कोई उल्लेख नहीं।
जिस सं उपसर्ग का प्रयोग कर बुद्ध ने सम्यक अष्टांग मार्ग प्रस्तुत किया, उसमें सं का तात्पर्य शुभत्व, पूर्णत्व और कल्याण से है। यह सं उपसर्ग संसार को भारतीय शब्द परंपरा की अद्भुत देन है। यह सं नहीं रहता तो भारतीय मनीषा विकलांग हो जाती। दर्शन दूर तक देख ही नहीं पाता। भारत का विचार खंडित हो जाता।
वस्तुतः इस सं-दर्शन ने भारत को, भारतीय परंपरा को और इसके समस्त लोक-मन को गढ़ा है। बुद्ध ने भी इसी सं से उत्पन्न समदर्शी भावना से सं का साक्षात्कार कर मुक्ति प्राप्त कर ली। यह सं उपसर्ग वेदों में सबसे पहली बार अस्तित्व में आया।
अनेक विद्वानों के अनुसार, वेदों के संज्ञान सूक्त ने सं की महिमा बतायी और सामवेद के सामगान का अस्ति���्व भी इसी सं उपसर्ग से प्रारंभ हुआ बताते हैं। ऋग्वेद के अंतिम भाग में संज्ञान सूक्त है। इसमें मानव जीवन में सामंजस्य और समन्वय के महत्व को ऋषि अंगिरा ने समझाया है। उन्होंने भारत को एक समरस जीवन अंगीकार करने का मंत्र दिया।
संज्ञान सूक्त के मंत्रों के अनुसार,
सं ग॑च्छध्वं॒ सं व॑दध्वं॒ सं वो॒ मनां᳚सि जानताम् ।
दे॒वा भा॒गं यथा॒ पूर्वे᳚ संजाना॒ना उ॒पास॑ते ॥
अर्थ: "तुम सब मिलकर चलो, मिलकर बोलो, तुम्हारे मन एक समान हों। जैसे प्राचीनकाल में देवतागण एकमत होकर अपने-अपने भाग को स्वीकार करते थे, वैसे ही तुम भी समान विचार वाले बनो।"
स॒मा॒नो मन्त्रः॒ समि॑तिः समा॒नी स॑मा॒नं मनः॑ स॒ह चि॒त्तमे᳚षाम् ।
स॒मा॒नं मन्त्र॑म॒भि म᳚न्त्रये वः समा॒नेन॑ वो ह॒विषा᳚ जुहोमि ॥
अर्थ: "तुम्हारा मंत्र (विचार) एक हो, समिति (सभा) समान हो, मन एक हो, और हृदय एक समान हो। मैं तुम सबके ल��ए एक ही मंत्र से पूजा करता हूं, और तुम सबको समान हवि (आहुति) प्रदान करता हूं।"
समानी व आकूतिः समाना ह्रदयानि वः।
समानस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति।।
तुम्हारा संकल्प एक हो। तुम्हारा ह्रदय भी एक हो। तुम लोगों का मन भी एक हो। इस प्रकार एक हो कि तुम्हारा जीवन सुंदर साथ हो जाए।
हाल ही में प्रख्यात संस्कृत विद्वान एवं राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के मा. कुलपति श्रीयुत् श्री��िवास वरखेड़ी जी का एक प्रेरक आलेख राष्ट्रीय समाचार पत्र दैनिक जागरण में प्रकाशित हुआ।
इस आलेख में भारतीय साधना परंपरा के प्रमाण मार्ग और प्रयोग मार्ग की सुंदर चर्चा आई है। भगवान बुद्ध ने प्रयोग मार्ग को अपना लिया, और अपने अनुभूत प्रयोग से जिस मार्ग को सिद्ध किया, वह वही मार्ग था जिसे षड्दर्शनों ने प्रमाण मार्ग कहा था।
इस आलेख के अनुसार भी वेदों के प्रमाण मार्ग में बताए सत्य को भगवान बुद्ध ने अपने अनुभूत प्रयोगों से पुनः प्रमाणित कर दिखाया।
वस्तुतः समता, समानता और समरसता नामक जो शब्दावली है उसमें सं उपसर्ग का होना ही सारी वेद-कथा का विस्तार है। इस सं उपसर्ग को हम यदि समझने और इस पर शोध करें तो दर्शन और शब्द परंपरा के अनेक गहरे रहस्य स्वतः खुल जाएंगे।
#बुद्धपूर्णिमा
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समकालीन राजनीति में संपूर्ण जीवन सिद्धांतों और आदर्श का पालन करने में डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी जैसा तो कोई नहीं!
वह विज्ञान, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, राजनीति, एथिक्स और दर्शन के मार्गदर्शक आचार्य हैं,
उनकी छाया मिलना हमारे समय का सौभाग्य है।
पत्रकारों को भी सदा उनका प्रेम मिला और असहमति को भी वह सम्मान देते रहे हैं।
डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी फाउंडेशन में कुछ मंतव्य प्रकट करने का अवसर मिला।
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ग्राम ऊर्जा #स्वराज के संकल्प को लागू करने का यही समय, सही समय
अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के महायुद्ध का पार्ट-2 जल्द शुरु होने की संभावना है। होर्मुज की खाड़ी से तेल-गैस के जहाजों के सहज आवागमन पर इसका खतरनाक असर अवश्यंभावी है। देश की ऊर्जा जरुरतों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आखिर उपाय क्या है? संकट अवसर लेकर भी आता है। तो इस समय कुकिंग गैस और ऊर्जा जरूरतों के संकट से उबरने की चाभी भी देश के गांव-गांव में, हमारे इंडीजीनस तकनीकी कौशल में छिपी है।
समाधान है कंप्रेस्ड बायोगैस यानी जैविक कचरे से पैदा होने वाली वह ऊर्जा जिसे अब सिलेंडर में भरा जा सकता है। एलपीजी सिलेंडर की तरह जिसकी आसानी से कहीं भ�� आपूर्ति हो सकती है। और इस उत्पादन प्रक्रिया में कुकिंग गैस उत्पादन के साथ खेतों के लिए उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद भी आसानी से सुलभ हो सकती है।
केंद्र और राज्य सरकारों ने संदाबीय बायोगैस यानी सीबीजी के उत्पादन की ओर तेज कदम आगे बढ़ा दिए हैं। सदियों से भारत के गांवों में इस पद्धति से रसोई की जरूरत के लिए गैस का उत्पादन किया जाता रहा है। आज से कई दशक प��र्व गांव-गांव में ऐसे बायोगैस संयंत्र लगे हुए थे जो कम से कम परिवार की जरूरत की रसोई गोबर गैस से पैदा करते थे। इस प्रक्रिया में एक कठिनाई थी कि रसोई घर के उपयोग के बाद बाकी गैस को सुरक्षित स्टोर कर पाने की प्रौद्योगिकी के अभाव में उत्पादन बेकार हो जाता था।
लेकिन 2 दशक पहले दिल्ली #आईआईटी के ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर सुब्बाराव, प्रो. वीरेंद्र विजय, प्रो. अशोक गुप्ता आदि के प्रयास��ं से बायो गैस को उच्च दाब पर सिलेंडर में भरने की प्रौद्योगिकी भारत को मिल गई। इस कार्य में तत्कालीन एनडीए सरकार के केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. #मुरलीमनोहरजोशी ने विशेष रूचि दिखाई थी, और देश के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को उन्होंने इस दिशा में लगातार सक्रिय रहने के लिए मंत्रालय के साथ निजी स्तर पर भी प्रेरित किया।
साल 2004-05 में जब यह प्रौद्योगिकी सफल हुई, तब तक केंद्र ��ें नीति निर्धारक बदल गए थे, हालांकि प्र���द्योगिकी को पेटेंट मिल गया था। दुर्भाग्य से अथवा अंतर्राष्ट्रीय तेल-गैस लॉबी के दबाव में इस प्रौद्योगिकी का उपयोग गांव-गांव में विकेंद्रित रीति से नहीं किया जा सका या होने ही नहीं दिया गया। किंतु, 2014 के बाद ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से स्वदेश केंद्रित इस प्रौद्योगिकी का सदुपयोग शुरू हुआ।
इसी प्रौदयोगिकी के आधार पर साल 2018 में केंद्र सरकार ने गोबर-धन (GOBAR-DHAN - Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना प्रारंभ की। इस योजना का लाभ उठाने के लिए केंद्र सरकार के एक एकीकृत पोर्टल (https://t.co/TilHHwxl4d) पर जाकर पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है, और खुद भी यदि गांव में इस उद्यम को कोई खोलने का इच्छुक है तो उसे पूरी सहायता मिलती है।
महाराष्ट्र में भारत का पहला सहकारी मल्टी-फीड कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र महाराष्ट्र के कोपरगाँव (अहिल्यानगर जिला) में में स्थापित किया गया है। इसका उद्घाटन केंद्रीय गृह और सहकारित�� मंत्री #अमितशाह ने अक्टूबर 2025 में किया था। यह संयंत्र गन्ने की खोई (press mud) और कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके रोजाना 12 टन CBG का उत्पादन करता है।
कुल मिलाकर साल 2026 के मार्च महीने तक करीब 180 सीबीजी संयंत्र देश में कुल 1000 टन बायो-सीएनजी अर्थात कुकिंग गैस का उत्पादन कर रहे हैं। इन संयंत्रों की स्थापना में तेजी लाने की जरूरत इसलिए भी है कि आज भारत अपनी दैनिक ऊर्जा जरुरतों के लिए प्रतिदिन 80,000 टन (अस्सी हजार टन प���रतिदिन) कुकिंग गैस का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें से 60-70 फीसद कुकिंग गैस हमें विदेश से आयात करनी पड़ती है।
यदि 2026 के अंत तक 5000 बायो-सीएनजी संयंत्र स्थापित कर इसे आगामी दो साल में 10 हजार संयंत्रों तक ले जाया जा सके तो देश के प्रत्येक जनपद और बड़े नगरों मेँ बडे़ व्यापारिक संसार का सृजन करने में भी हम सफल होंगे। एक सीबीजी प्लांट यदि 5-7 टन गैस प्रतिदिन पैदा करता है तो 5000 प्लांट से 30 हजार टन और दस हजार संय���त्र से 60 हजार टन कुकिंग गैस ��ैदा की जा सकती है।
यदि हम देशी गौवंश और पशु संपदा की रक्षा करना चाहते हैं, देसी नस्लों के गौवंश के दूध-दही-घी से लबालब संतृप्त, अच्छा स्वास्थ्य चाहते हैं तो खेतों में रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद से जैविक अन्न, फल-सब्जियां हमें चाहिए होंगी, यदि हम विकेंद्रित ग्राम स्वराज चाहते हैं, हम चाहते हैं कि पलायन रूक जाए, नगरों में लोग रोजगार के लिए भागना बंद करें तो गांव-गांव तक बायो गैस का सदुपयोग कर ह��� इसे कर सकते हैं। बायो-सीएनजी के संयंत्र इस दिशा में क्रांतिकारी युग का सूत्रपात कर रहे हैं। @PMOIndia
21 अप्रैल शाम, नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में, नव���ठित डॉ. मुरली मनोहर जोशी फाउंडेशन ने देश के शीर्ष शिक्षाविदों एवं प्रशासनिक हस्तियों के साथ डॉ. जोशी की अकादमिक-भारतीय विचार केंद्रित विरासत पर संक्षिप्त व्याख्यान देने के लिए मुझे भी अवसर प्रदान किया। फाउंडेशन के ट्रस्टी और देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञ आदरणीय डॉक्टर राजेंद्र गुप्त जी सहित सभी ट्रस्टियों का बहुत धन्यवाद।
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नित्यानंद मिश्र जी ने प्रेरक शोधपरक तथ्य रखे हैं। जितने स्वनामधन्य कोचरदिग्रेट हैं, अब कुछ भी बोलने और लिखने से पहले सावधान रहें। भारतीय ज्ञान-विज्ञान की महानतम धाराओं पर निरंतर कालिख लगाने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। ब्रिटिश राज के समय की उलटबांसी अब और नहीं। @narendramodi
ब्राह्मणों का पढ़ाई-लिखाई पर सौ प्रतिशत आरक्षण था?
कुछ लोगों का कहना ���ै भारत में सारी पढ़ाई-लिखाई पर ब्राह्मणों का सौ प्रतिशत आरक्षण था। क्या यह सच है? आइए जानते हैं।