जो जो सेक्युलर-लिबरल उर्दू नाम वाले विजेता धैया को अपना मसीहा बनाकर बैठे हैं, वे इसकी सच्चाई भी देख लें कि भारतीय मुसलमानों को लेकर इसके क्या विचार हैं।
लेकिन इन उर्दू नाम वालों को शर्म आती ही नहीं। बस जहाँ किसी ने BJP के खिलाफ बोल दिया, उसे अपना मसीहा मान लेते हैं, चाहे उसकी विचारधारा कुछ भी हो। इनके लिए वही मसीहा है, क्योंकि उसने BJP के खिलाफ बोला है। उर्दू नाम वाले विजेता धैया को अपना मसीहा बनाकर बैठे हैं वे इसकी सच्चाई भी देख लें कि भारतीय मुसलमानों को लेकर इसके क्या विचार हैं
लेकिन इन उर्दू नाम वालों को शर्म है की आती नहीं
बस जहाँ किसी ने BJP के खिलाफ बोल दिया उसे अपना मसीहा मान लेते हैं चाहे उस मसीहा की विचारधारा कुछ भी हो
इन उर्दू नाम वाले सेक्युलर-लिबरल केलिए वही मसीहा है क्योंकि उसने BJP के खिलाफ बोला है
जिन लिबरल और सेक्युलर उर्दू नाम वाले यह मानते हैं कि मुस्लिम लीडरों या मुस्लिम समाज को SJP के प्रोटेस्ट में हिस्सा लेना चाहिए वे पहले यह स्क्रीनशॉट देख लें
अगर यह स्क्रीनशॉट देखने के बाद भी उन्हें लगता है कि मुस्लिम लीडरों या मुस्लिम समाज को SJP के प्रोटेस्ट में शामिल होना चाहिए तो उन्हें अपने नफ़्स और ईमान का मुहासबा करना चाहिए
क्योंकि SJP के प्रोटेस्ट के कर्ता-धर्ताओं में से कई लोग ब्लासफेमर और इस्लामोफ़ोबिक हैं
ऐसी ही इस्लामोफ़ोबिक मानसिकता वाले लोगों में सेक्युलर-लिबरल उर्दू नाम वालों का नया मसीहा विजेता धैया भी शामिल है
मेरी मनोकामना है कि मोदी जी आप दोबारा प्रधानमंत्री बनें।
जुम्मनों के मसीहा, मुलायम सिंह यादव भाजपा की B-Team, समाजवादी पार्टी के संस्थापक
#AIMIM#AIMIMUttarPradesh
जो सनातनी है, वही समाजवादी है
यह कहना मेरा या किसी राइट-विंग वाले का नहीं है
यह कहना जुम्मनों के मसीहा टोटी भैया का है इनके कहने के अनुसार हर मुसलमान समाजवादी नहीं होता
अगर समाजवादी होने की शर्त सनातनी होना है तो क्या मुसलमान समाजवादी नहीं हो सकते?
शायद इसी वजह से टोटी भैया ने 2013 के मुज़फ्फरनगर दंगों में मुसलमानों को इंसाफ नहीं दिलाया
अब जुम्मनों को खुद फैसला करना है कि वे मुसलमान हैं या सनातनी
एक ही कोट में भाई ने अपनी पूरी आईडी से ब्लॉक कर दिया
भाई साहब लड़का होकर ज़्यादातर लड़कियों के नाम से अकाउंट बना रखा है
पंडित
मेरा
कौसर
चौधरी
अगर और नाम बता दिया तो आप लोग के सिर चकराने लगेंगे😂😂
ये है हमारा असली हिंदुस्तान जहाँ सब मिल-जुलकर रहते हैं
और एक ख़ास तबके को मानसिक तौर पर ऐसा ग़ुलाम बना दिया गया है कि वह ख़ुद को दूसरे दर्जे का नागरिक समझता है और हर जगह ख़ुद को ग़ुलाम बनाकर पेश करता है
कमाल की बात यह है कि मुझे ऐसा कभी कहीं नहीं दिखा कि कोई अब्दुल सो रहा हो और दूसरे वर्ग के लोग उसे पंखा झल रहे हों
आप लोगों को दिखे तो मुझे भी बताना
समाजवादी पार्टी पूरी तरह हिन्दुत्व के रास्ते पर चलकर भाजपा से कम्पटीशन कर रही है।
@yadavakhilesh जी को एक मुफ्त की सलाह है, अगर आवाम को हिंदुत्व के नाम पर ही वोट देना होगा तो वो आपको वोट क्यों देंगे? उनके पास तो पहले से ही हिंदुत्व का सबसे बड़ा चेहरा भाजपा मौजूद है।
इसलिए आप विचारधारा से समझौता मत कीजिए, नहीं तो, “ना इधर के रहेंगे और ना ही उधर के”..!
फ़ेक न्यूज़ अलर्ट 🚨
यह फ़र्ज़ी स्क्रीनशॉट समाजवादी पार्टी के समर्थकों और IT सेल की तरफ़ से वायरल किया जा रहा है दावा किया जा रहा है कि सपा ने मस्जिदों में सोलर लाइट लगवाई है
जबकि यह दावा पूरी तरह झूठा है
आप ख़ुद इस सूची को देख सकते हैं इसमें एक भी मस्जिद के अंदर सोलर लाइट लगाने का उल्लेख नहीं है
जो भी लाइटें लगाई गई हैं वे अलग-अलग गली मोहल्लों और चौराहों पर लगाई गई हैं
गली मोहल्ले और चौराहे पर लाइट लगने का मस्जिद से क्या लेना-देना?
शायद इस दूध वाले भैया को यह नहीं मालूम कि जैसे शतरंज के खेल में राजा के लिए प्यादे की क़ुर्बानी दी जाती है, उसी तरह राजनीति में भी बड़े राजनीतिक मक़सद पूरे करने के लिए कई तरह की रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं 2004 में BJP की B-Team सपा ने कांग्रेस को समर्थन दिया इसलिए दिया ताके ताकि किसी को B-Team होने का शक न हो
और शायद इसने 2006 की सच्चर समिति (Sachar Committee) की रिपोर्ट भी नहीं पढ़ी, जिसमें बताया गया था कि उस समय मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति दलितों से भी कई मामलों में बदतर थी।
और बात रही घरों पर बुलडोज़र मॉब लिंचिंग और दोहरी नागरिकता जैसे मुद्दों की तो अभी सपा या कांग्रेस मुसलमानों का वोट लेकर विपक्ष में बैठकर ऐसा कौन-सा काम रोक पा रही है?
क्या विपक्ष का काम सिर्फ़ मुँह में दही जमाकर बैठना होता है?
तुम्हारे विपक्ष में बैठे रहने से भी और तुम्हें वोट देने के बाद भी अगर हमें मरना ही पड़े तो इससे अच्छा है कि हम ख़ुद लड़कर क्यों न मरें?
कहीं सत्य, कहीं असत्यवादी
कहीं कठोर, कहीं प्रियभाषिणी
कहीं हिंसा करने वाली, कहीं दयालु,
कहीं लोभी, कहीं उदार
कहीं नित्य प्रति बहुत द्रव्य व्यय करने वाली और कहीं बहुत से संचय करने वाली यह राजनीति—वेश्या के सामान अनेक रूप से रहती है।
#राजनीति
चंद्रशेखर आज़ाद अपने समाज के लिए कैसे लड़ते हैं यह देखकर
सपा और कांग्रेस के इन उर्दू नाम वाले पुरपार्ट नेताओं को चुल्लू भर पानी में डूब जना चाहिए
वोट लेने के बाद चाहे मुस्लिम समाज जिए या मरे इन्हें कोई मतलब नहीं है बस इन्हें अपनी AC की ठंडक मिलती रहनी चाहिए
हाँ 2027 मिशन शुरू करो मुसलमानों बरगला कर BJP का डर दिखाकर वोट हासिल कर लो
उसके बाद चाहे मुसलमानों की लिंचिंग हो घरों पर बुलडोज़र चले मस्जिदें मदरसे और इदारे शहीद हों आप अपने AC में आराम करना
आपके आराम में कोई ख़लल पैदा न हो
ज़ाकिर भाई आपके सेंस ऑफ ह्यूमर का जवाब नहीं
आप अखिलेश यादव के लिए ट्रोल हो रहे हैं उन तक यह बात पहुँचाने का तरीका भी अच्छा है कि आपको अखिलेश के लिए ट्रोल किया जा रहा ह
इसलिए अगर सपा सत्ता में आती है तो सबसे अच्छे पोस्ट का हक़दार आप ही हो
इसलिए मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं कि अखिलेश यादव आपको सबसे अच्छा पोस्ट दें
अब सवाल यह है कि जब मुस्लिम समाज के बच्चों की लिंचिंग होती है तब माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @yadavakhilesh और उनकी सहयोगी नेता @IqraMunawwar_ जैसे नेता मुस्लिम पीड़ित परिजनों से मुलाक़ात करने क्यों नहीं जाते?
और न्याय की लड़ाई में उनके साथ खड़े क्यों नहीं होते?
क्या इसका जवाब कोई ग़लखोर जुम्मन दे सकता है?
कमाल की बात यह है कि यही राहुल गांधी और दरबारी शायर इमरान
मुसलमानों की लिंचिंग पर मुसलमानों से खुलकर बात नहीं करते
मुसलमानों के घरों पर बुलडोज़र चलाने के मुद्दे पर मुसलमानों से खुलकर बात नहीं करते
मुसलमानों की मस्जिदों और मदरसों को शहीद (ध्वस्त) किए जाने के मामले में मुसलमानों से खुलकर बात नहीं करते
हिजाब के मुद्दे पर मुसलमानों से खुलकर बात नहीं करते
मुसलमानों के ख़िलाफ़ बनाए जाने वाले तरह-तरह के क़ानूनों पर भी मुसलमानों से खुलकर बात नहीं करते।
यहाँ तक कि मुसलमानों के किसी भी मुद्दे पर मुसलमानों से खुलकर बात नहीं करते
शायद मुसलमानों के किसी भी मामले में संविधान ख़तरे में नहीं रहता
अखिलेश यादव ने 2022 में कहा था कि जब मैं मुख्यमंत्री था तब योगी आदित्यनाथ की फ़ाइल मेरे पास कार्रवाई के लिए आई थी लेकिन मैंने वह फ़ाइल वापस कर दी थी
तो जो लोग यह कहते हैं कि भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार ग़लत कर रही है और हमारे लिए मुसीबत बनी हुई है
तो उन गलखोर जुम्मन समाज से मैं यह जानना चाहता हूँ कि अगर ऐसा है तो क्या इस मुसीबत को बढ़ावा देने में अखिलेश यादव का भी योगदान नहीं था?
क्या जुम्मन समाज तुम्हें ऐसा नहीं लगता कि उस समय अखिलेश भैया ने कहीं यह समझौता तो नहीं कर लिया था कि मैं मुख्यमंत्री हूँ इसलिए तुम्हारी फ़ाइल वापस कर देता हूँ जब तुम मुख्यमंत्री बनो तो मेरी फ़ाइल वापस कर देना और उसके बदले सपा के किसी बड़े उर्दू नाम वाले नेता को अंदर कर देना